जानीपुर थाना में खुलेआम जान से मारने की धमकी - कार्रवाई पर उठे सवाल - डीजीपी से शिकायत की हो रही तैयारी : भारतीय मानव अधिकार रक्षक

जानीपुर थाना में खुलेआम जान से मारने की धमकी - कार्रवाई पर उठे सवाल - डीजीपी से शिकायत की हो रही तैयारी : भारतीय मानव अधिकार रक्षक

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना, 17 जुलाई, 2026  ::

पटना के जानीपुर थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कानून-व्यवस्था, नागरिक सुरक्षा और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय मानव अधिकार रक्षक संस्था का दावा है कि थाना परिसर में दोनों पक्षों के बीच समझौते का प्रयास किया गया, लेकिन बातचीत के दौरान एक पक्ष द्वारा खुलेआम जान से मारने और हिंसा करने की कथित धमकी दी गई। संस्था का आरोप है कि इतने गंभीर कथित बयान के बावजूद तत्काल कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे पीड़ित परिवार में भय और असुरक्षा का माहौल उत्पन्न हो गया है। उक्त जानकारी भारतीय मानव अधिकार रक्षक संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद कुमार ने दी। 

उन्होंने बताया कि भारतीय मानव अधिकार रक्षक की संस्थापिका रीता सिन्हा के नेतृत्व में संस्था की एक टीम जानीपुर थाना पहुँची थी। टीम का उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद बढ़ाना नहीं था, बल्कि दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर कानून के दायरे में रहते हुए विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालना था। बैठक के दौरान संस्थापिका रीता सिन्हा ने दोनों पक्षों को समझाया कि यदि जमीन अथवा संपत्ति को लेकर कोई विवाद है तो उसका निपटारा न्यायालय और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में धमकी, मारपीट या हिंसा समाधान का रास्ता नहीं हो सकती है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष के अनुसार, बातचीत के दौरान द्वितीय पक्ष के रूप में उपस्थित राजू राय ने समझौते से स्पष्ट इनकार कर दिया। आरोप है कि थाना परिसर में पुलिसकर्मियों और संस्था के सदस्यों की मौजूदगी में उन्होंने कथित रूप से कहा कि अवसर मिलने पर वे मारपीट करेंगे और हत्या करके जेल जाने से भी नहीं डरते, चाहे इसके लिए उन्हें 8 से 10 लाख रुपये ही क्यों न खर्च करने पड़े। भारतीय मानव अधिकार रक्षक का कहना है कि इस प्रकार की कथित धमकी न केवल पीड़ित परिवार के लिए चिंता का विषय है, बल्कि कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से भी अत्यंत गंभीर है। संस्था का आरोप है कि ऐसे कथित बयान के बाद भी तत्काल कोई ठोस कानूनी कार्रवाई होती दिखाई नहीं दी।

उन्होंने कहा कि यदि किसी नागरिक को सार्वजनिक रूप से जान से मारने जैसी कथित धमकी मिले और उसके बाद भी उसे पर्याप्त सुरक्षा का भरोसा न मिले, तो स्वाभाविक रूप से उसके मन में भय और असुरक्षा की भावना उत्पन्न होगी। प्रत्येक नागरिक का यह संवैधानिक अधिकार है कि वह स्वयं और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर निश्चिंत महसूस करे। यदि किसी व्यक्ति को अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर आशंका हो तो संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे मामले की गंभीरता से जांच करें और आवश्यक कानूनी कदम उठाएं।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि इस बैठक में भारतीय मानव अधिकार रक्षक की संस्थापिका रीता सिन्हा के अलावा पटना जिला महासचिव शुभम प्रकाश, एचआरएस न्यूज से संतोष अग्रवाल, मशरख ग्राम उपाध्यक्ष रवि सिंह, महिला सदस्य राजकुमारी जी, महिला सदस्य सीमा जी तथा सक्रिय सदस्य राम अयोध्या जी उपस्थित रहे। संस्था के सभी सदस्यों ने दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण एवं कानूनी समाधान निकालने का भरसक प्रयास किया, ताकि विवाद आगे न बढ़े और कानून-व्यवस्था बनी रहे।

राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद कुमार ने बताया कि भारतीय मानव अधिकार रक्षक ने घोषणा की है कि संस्थापिका रीता सिन्हा सोमवार को प्रातः 11 बजे पटना स्थित डीजीपी कार्यालय जाकर पूरे घटनाक्रम से वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अवगत कराएंगी। संस्था द्वारा दिए जाने वाले आवेदन में कथित धमकी की घटना, पीड़ित परिवार की सुरक्षा की मांग, मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई तथा जानीपुर थाना द्वारा शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने संबंधी तथ्यों को शामिल किए जाने की बात कही गई है। साथ ही निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुरूप कार्रवाई की मांग भी की जाएगी।

भारतीय मानव अधिकार रक्षक ने यह भी स्पष्ट किया है कि संस्था किसी भी पक्ष का समर्थन करने के उद्देश्य से कार्य नहीं करती है। उसका मुख्य उद्देश्य प्रत्येक नागरिक के मानवाधिकारों की रक्षा, सुरक्षा की भावना को मजबूत करना तथा कानून के शासन में लोगों का विश्वास बनाए रखना है। संस्था का कहना है कि किसी भी विवाद का समाधान न्यायिक और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ही होना चाहिए। यदि किसी नागरिक को धमकी या भय का सामना करना पड़ता है, तो उसकी शिकायत पर निष्पक्ष सुनवाई और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

यह मामला फिलहाल भारतीय मानव अधिकार रक्षक संस्था के आरोपों और पक्षकारों के दावों पर आधारित है। मामले में संबंधित पक्षों और पुलिस प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने आना अभी शेष है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, तथ्यों का सत्यापन और कानून के अनुसार कार्रवाई ही न्याय की कसौटी होती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों का सुरक्षा का अधिकार सर्वोपरि है। यदि किसी व्यक्ति को अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर भय हो, तो प्रशासन का दायित्व है कि वह उसकी शिकायत को गंभीरता से सुने और कानून के अनुरूप आवश्यक कदम उठाए। न्याय तभी सार्थक माना जाएगा, जब प्रत्येक नागरिक स्वयं को सुरक्षित, संरक्षित और कानून पर विश्वास करने योग्य महसूस करे।
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