सारांश पब्लिक स्कूल की शिक्षिका का व्यवहार - विद्यालय में अनुशासन या भय का माहौल?

सारांश पब्लिक स्कूल की शिक्षिका का व्यवहार - विद्यालय में अनुशासन या भय का माहौल?

मोहन कुमार, सदस्य आई एफ डब्लू जे, पटना,  17 जुलाई ::

पटना के रामनगरी आशियाना स्थित “सारांश पब्लिक स्कूल” (Sharons Public School) एक बार फिर अभिभावकों की शिकायतों को लेकर चर्चा में है। विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि एक शिक्षिका के व्यवहार के कारण उनके बच्चे मानसिक तनाव और भय के वातावरण में पढ़ाई करने को विवश है। इस संबंध में अभिभावकों ने विद्यालय के प्रबंध निदेशक को लिखित शिकायत भी दी है और विद्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं।

अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय केवल शिक्षा देने का केंद्र नहीं होता है, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण स्थान होता है। ऐसे में यदि शिक्षक का व्यवहार ही भय और दंड पर आधारित हो जाए तो इसका सीधा प्रभाव बच्चों के मानसिक विकास और शिक्षा पर पड़ता है।

शिकायतकर्ता अभिभावकों के अनुसार, उनका सात वर्षीय पुत्र कक्षा-2 में तथा पुत्री कक्षा-6 में अध्ययनरत है। उनका आरोप है कि कक्षा-2 के बच्चे के साथ संबंधित शिक्षिका छोटी-छोटी बातों को अनुशासनहीनता मानकर बार-बार डांटती-फटकारती है तथा कई बार थप्पड़ मारने जैसी सजा भी देती हैं।

अभिभावकों का कहना है कि लगातार डांट और दंड के कारण बच्चा विद्यालय जाने से घबराने लगा है। वह हमेशा भयभीत रहता है और पढ़ाई के बजाय शिक्षिका के व्यवहार को लेकर मानसिक दबाव महसूस करता है। उनका आरोप है कि विद्यालय की छुट्टी के बाद भी किसी न किसी बहाने बच्चे को रोककर दंडित किया जाता है, जिससे उसका आत्मविश्वास प्रभावित हो रहा है।

परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि परिवार में एक सदस्य के निधन के बाद बच्चों का परंपरागत मुंडन कराया गया था, जिसके कारण बच्चे टोपी पहनकर विद्यालय गए। अभिभावकों के अनुसार, शिक्षिका ने इस परिस्थिति को समझने के बजाय टोपी पहनने को अनुशासन का उल्लंघन मानते हुए बच्चे को दंडित किया। इसी प्रकार बच्चे के हाथ में पारिवारिक परंपरा के तहत पहने गए कंगन को भी आपत्ति का विषय बनाकर उसे फटकारा गया। अभिभावकों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए था।

शिकायतकर्ता का कहना है कि शिक्षिका के व्यवहार को लेकर उन्होंने पहले भी विद्यालय के प्रबंध निदेशक को मौखिक एवं लिखित रूप से अवगत कराया था। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद संबंधित शिक्षिका के व्यवहार में कोई सुधार नहीं हुआ और बच्चों के प्रति कठोरता का सिलसिला जारी रहा। अभिभावकों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी भी बच्चे को इस प्रकार की मानसिक प्रताड़ना का सामना न करना पड़े।

अभिभावकों ने विद्यालय की स्वच्छता व्यवस्था पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका आरोप है कि विद्यालय के शौचालय पर्याप्त रूप से साफ नहीं रहते तथा वहां दुर्गंध की समस्या बनी रहती है। उनका कहना है कि गंदगी के कारण बच्चों में संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि उनकी कक्षा-6 में पढ़ने वाली पुत्री भी संक्रमण से प्रभावित हुई है। इस संबंध में विद्यालय प्रबंधन को सूचना और सुझाव दिए जाने के बावजूद स्वच्छता व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं किया गया। उनका मानना है कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में विद्यालय प्रशासन को अधिक संवेदनशील और सक्रिय होना चाहिए।

शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि विद्यालय में केवल बच्चों के साथ ही नहीं बल्कि कई बार अभिभावकों के साथ भी उचित व्यवहार नहीं किया जाता है। अभिभावकों का कहना है कि जिन बच्चों के लिए परिवहन की व्यवस्था उनके परिवार द्वारा की गई है, उन्हें भी कभी-कभी विद्यालय परिसर में रोक लिया जाता है और अभिभावकों को दोपहर की गर्मी में विद्यालय बुलाया जाता है। उनका कहना है कि यदि कोई प्रशासनिक आवश्यकता हो तो अभिभावकों को पहले से सूचित किया जाना चाहिए। बिना पूर्व सूचना बच्चों को रोकना और अभिभावकों को तत्काल बुलाना एक सुव्यवस्थित शैक्षणिक संस्थान की कार्यप्रणाली के अनुरूप नहीं माना जा सकता है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालय में अनुशासन आवश्यक है, लेकिन उसका आधार भय नहीं बल्कि संवाद, संवेदनशीलता और सकारात्मक मार्गदर्शन होना चाहिए। छोटे बच्चों के साथ कठोर व्यवहार उनके आत्मविश्वास, मानसिक स्वास्थ्य और सीखने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। साथ ही विद्यालय परिसर की स्वच्छता, सुरक्षित वातावरण तथा अभिभावकों के साथ सम्मानजनक संवाद भी किसी भी शिक्षण संस्थान की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित शिकायतों पर उचित कार्रवाई करने तथा विद्यालय में बच्चों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की है। यह समाचार अभिभावकों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित विद्यालय प्रबंधन या शिक्षिका का पक्ष अनुपलब्ध है। 
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