नाद, पटना की ओर से मुंशी प्रेमचंद की कहानी *" बूढ़ी काकी "* की नाट्य प्रस्तुति 9 जुलाई 2026 को पटना के प्रेमचंद रंगशाला में किया गया, जिसके सफल निर्देशन मो जानी ने किया
*कथासारः-बूढी काकी*
प्रस्तुत नाटक महान कहानीकार मुंशी प्रेमचंद लिखित कहानी 'बूढी काकी' पर आधारित है, जिसका नाट्य रूपांतरण विवेक कुमार द्वारा किया गया है!
प्रस्तुत नाटक में एक वृद्ध महिला 'बूढी काकी' मुख्य पात्र है। काकी शारीरिक रूप से निर्बल है किंतु जैसा कि बुढ़ापा में अक्सर होता है, उसकी स्वादेन्द्रियां सक्रिय हैं। उक्त नाटक में मध्यम वर्गीय परिवार में बुजुर्गों की उपेक्षा को भी वर्णित किया गया है। काकी को भतीजे के घर में उपेक्षित हो कर रहना पड़ता है। अंततः काकी की बहू को अपने अपराध का अनुभव होता है और वह ग्लानि का अनुभव करती है।
नाटक वृद्धावस्था की समस्या को अपने केंद्र में रखकर एक वैवाहिक आयोजन पर समाप्त हो जाता है, जब एक वृद्धा अपने घर के आयोजन में ही उपेक्षित और तिरस्कृत होकर जूठे पत्तल चाटने को विवश हो जाती है। यह नाटक सामान्य मध्यम वर्गीय परिवारों में वृद्धाओं की स्थिति को बहुत ही मार्मिक ढंग से प्रकट करने का प्रयास है!
पात्र - परिचय,
*मंच पर*
बूढ़ी काकी - अपराजिता कुमारी
रूपा - कोमल कुमारी
लाडली - सानिया परवीन
बड़की - सोना
बुद्धिराम - सोनु कुमार
मुखराम - हर्ष कुमार
शादीराम - रवि कुमार
सूत्रधार 1- प्रिंस राज
सूत्रधार 2- अभिषेक कुमार
सूत्रधार 3- प्रियांशु कुमार
सूत्रधार 4- मो आसिफ
सूत्रधार 5- सुनील नौबतपुरी
सूत्रधार 6- आदर्श आर पटेल।
शहरी बाबू - दीपक कुमार
*मंच परे*
ढोलक - सहदेव चौधरी।
काँगो - राजीव घोष
बांसुरी - राजेश कुमार सिंह
झाल, खंजरी - अरविंद कुमार
प्रकाश - विनय चौहान
रूप सज्जा - जितेन्द्र कुमार जीतू
वस्त्र विन्यास - सौरभ शेखर।
संगीत, परिकल्पना एवं निर्देशन - मो जानी
*प्रस्तुति - नाद*
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