हरित खाद और मृदा परीक्षण से टिकाऊ खेती का मंत्र लेकर पहुँचे आईसीएआर के वैज्ञानिक

हरित खाद और मृदा परीक्षण से टिकाऊ खेती का मंत्र लेकर पहुँचे आईसीएआर के वैज्ञानिक

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा 'खेत बचाओ अभियान' के अंतर्गत 29 जून 2026 को बिहार के भोजपुर जिले के गढ़हनी प्रखंड स्थित बलीगांव एवं रौशन टोला गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को संतुलित उर्वरक प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को मृदा परीक्षण के महत्व, मृदा स्वास्थ्य, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, फसलों की आवश्यकता के अनुरूप संतुलित उर्वरक प्रबंधन, हरित खाद के रूप में ढैंचा एवं सनई की खेती तथा मृदा की उर्वराशक्ति बनाए रखने के वैज्ञानिक उपायों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग करने से उत्पादन लागत में कमी आती है, फसल की उत्पादकता बढ़ती है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक सुरक्षित रहती है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में बलीगांव के 30 तथा रौशन टोला के 35, कुल 65 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। किसानों ने मृदा स्वास्थ्य, पोषक तत्व प्रबंधन एवं हरित खाद के उपयोग से संबंधित अनेक जिज्ञासाएँ व्यक्त कीं, जिनका वैज्ञानिकों ने सरल एवं वैज्ञानिक ढंग से समाधान किया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार राय, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी श्री ए. एस. महापात्र तथा कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. सच्चिदानंद सिंह मौजूद थे | कार्यक्रम के अंत में किसानों से अपने खेतों की नियमित मृदा जांच कराने, हरित खाद को फसल प्रणाली में शामिल करने तथा वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुरूप उर्वरकों का उपयोग करने का आह्वान किया गया, ताकि स्वस्थ मृदा, समृद्ध किसान और टिकाऊ कृषि के लक्ष्य को साकार किया जा सके।

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