राज्य में मछली पालन की है असीम संभावनाएं, इससे रुकेगा पलायन: नंदकिशोर राम
मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मीठापुर स्थित नवनिर्मित मत्स्य विकास भवन में आयोजित हुआ कॉन्क्लेव
* इस कॉन्क्लेव में बड़ी संख्या में मछली पालक हुए शामिल
* मत्स्य विकास भवन में खुल चुका है राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) का क्षेत्रीय कार्यालय
पटना, 16 जून।
राज्य में मात्स्यिकी, मत्स्य और जल कृषि के विकास की असीम संभावनाएं हैं। हमारा विभाग गांवों में पहुंचेगा और बिहार के पलायन को रोकने में कामयाब होगा, ऐसा भरोसा है। इससे बेरोजगारी कम होगी। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग गांवों का विभाग है। ये बातें डेयरी मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के माननीय मंत्री श्री नंद किशोर राम ने मंगलवार को कही। वे मीठापुर स्थित नवनिर्मित मत्स्य विकास भवन में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए आयोजित कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे।
ध्यान रहे कि बीते सोमवार को मत्स्य विकास भवन में राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) के क्षेत्रीय कार्यालय के शुभारंभ का माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी के हाथों किया गया था।
मंगलवार को हुई इस कॉन्क्लेव में माननीय मंत्री श्री नंद किशोर राम ने कहा कि समग्र मात्स्यिकी विकास के लिए हुए इस आयोजन से राज्य के मत्स्य पालकों, किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग मिलेगा।
माननीय मंत्री ने कहा कि बिहार में मछली उत्पादन में लगातार रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि दर्ज की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में जहां राज्य का कुल मछली उत्पादन 9.69 लाख मीट्रिक टन था, वहीं यह वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 10.28 लाख मीट्रिक टन हो गया है।
सरकार के प्रयास से 7,990 हेक्टेयर में नए जल क्षेत्र का सृजन, 2,721 हेक्टेयर चौर भूमि में आधुनिक तालाबों का निर्माण और 5,264 ट्यूबवेल का अधिष्ठापन किया गया है। साथ ही, 233 मत्स्य बीज हैचरी अधिष्ठापित की गई है। इन कार्यशील हैचरियों से राज्य की लगभग 70 प्रतिशत मत्स्य बीज की आवश्यकताओं की पूर्ति की जा रही है। जिसका परिणाम है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 2,753.45 मिलियन मत्स्य बीज का वार्षिक उत्पादन हुआ है। वहीं राज्य में स्थापित 89 फिश फीड मिलों से 50 हजार टन मछली आहार का उत्पादन राज्य के अंदर ही होने लगा है।
मत्स्य बाजारों में स्वच्छता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अब तक 6,449 वाहन एवं 12,172 मत्स्य विपणन किट का वितरण किया जा चुका है। 'मुख्यमंत्री मत्स्य विपणन योजना' के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य के चिह्नित 3 प्रखंडों व 7 पंचायतों में आधुनिक मत्स्य बाजारों का निर्माण किया जा रहा है। कृषि विभाग की तरह मछली पालकों को रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
वहीं इस मौके पर डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव श्री शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि मछली पालन को बिज़नेस की तरह विकसित करने की जरूरत है। इस क्षेत्र में निर्यात की असीम संभावनाएं हैं। हम निर्यात बढ़ाकर मछली पालकों की आय बढ़ा सकते हैं। इसके लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें प्रोसेसिंग प्लांट लगाना, फिश फ़ीड मिल लगाना और आरएएस या बायोफ्लॉक इत्यादि से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य में एनएफडीबी का कार्यालय खुल चुका है, इससे राज्य में मछली उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। जब तक उत्पादन सरप्लस नहीं होगा, तब तक दूसरे राज्यों को निर्यात नहीं कर सकते।
इस मौके पर एनएफडीबी के मुख्य कार्यपालक श्री विजय कुमार बेहरा और विभाग के निदेशक मत्स्य श्री तुषार सिंगला ने भी अपनी बात रखी। कार्यक्रम में विभाग के संयुक्त सचिव श्री कुमार रविंद्र, एनसीडीसी के क्षेत्रीय निदेशक श्री अनिरुद्ध सिंह, नाबार्ड के जीएम श्री पार्थ मंडल सहित बड़ी संख्या में राज्यभर से आए मत्स्य किसान मौजूद थे।
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