माउथ अल्सर बना जानलेवा, होंठ में पड़े कीड़े; पारस हेल्थ में सफल सर्जरी से मरीज की बची जान
पटना। बांका निवासी 36 वर्षीय गुफ़रान (बदला हुआ नाम) के लिए सामान्य दिखने वाला माउथ अल्सर गंभीर और भयावह रूप ले बैठा। पिछले छह महीनों से वह बार-बार हो रहे अल्सर से परेशान था और वैकल्पिक चिकित्सा से इलाज करा रहा था, लेकिन स्थिति लगातार बिगड़ती गई। हालात तब और गंभीर हो गए जब उसके मुँह से कीड़े निकलने लगे और निचला होंठ पूरी तरह संक्रमित हो गया। परिजन उसे कई डॉक्टरों के पास लेकर गए, लेकिन गंभीर संक्रमण को देखते हुए उसे अस्पताल भेज दिया गया, जहां भी समुचित इलाज नहीं हो सका। इसके बाद मरीज को पारस हेल्थ में इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। मरीज को सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी।
पारस हॉस्पिटल के ईएनटी विभाग की कंसल्टेंट *डॉ. रश्मि प्रसाद* के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने तत्काल लाइफ सेविंग सर्जरी की। करीब दो घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी में 600 से 700 कीड़ों को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया। साथ ही सड़े-गले मांस को भी हटाया गया। डॉ. रश्मि ने बताया कि कीड़ों ने होंठ के अंदर सुरंग जैसी संरचना बना ली थी, जिससे संक्रमण तेजी से फैल रहा था।
उन्होंने कहा कि माउथ अल्सर को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है, समय पर जांच और इलाज बेहद जरूरी है। सर्जरी के अगले ही दिन मरीज की हालत में सुधार होने लगा। 4-5 दिनों के उपचार के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
पारस हेल्थ के *जोनल डायरेक्टर श्री अनिल कुमार* ने बताया कि पारस एचएमआरआई हॉस्पिटल में मरीजों को प्राथमिकता दी जाती है। अत्याधुनिक तकनीक और उपकरणों से लैस अस्पताल में गुणवत्तापरक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
*पारस हेल्थ के बारे में*
पारस हेल्थ पटना ने 2013 में परिचालन शुरू किया। यह बिहार का पहला कॉर्पोरेट अस्पताल है जिसके पास परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड द्वारा लाइसेंस प्राप्त कैंसर उपचार केंद्र है। जून 2024 में एक्सेस किए गए एनएबीएच पोर्टल के अनुसार, पारस एचएमआरआई अस्पताल, पटना 2016 में एनएबीएच मान्यता प्राप्त करने वाला बिहार का पहला अस्पताल था। इस अस्पताल की बेड क्षमता 400 से ज्यादा की है, जिसमें 80 आईसीयू बेड शामिल हैं साथ ही 2 LINAC मशीन एंव PET-CT की सुविधा भी उपलब्ध है।
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