आधुनिक तकनीक और जनजागरूकता से आपदा प्रबंधन को मिलेगा नया आयाम

आधुनिक तकनीक और जनजागरूकता से आपदा प्रबंधन को मिलेगा नया आयाम

- गांव से राज्य स्तर तक मजबूत होगा पूर्व चेतावनी तंत्र, लू एवं वज्रपात से बचाव को लेकर बैठक आयोजित
- आपदा मंत्री रत्नेश सदा बोले - पूर्व चेतावनी प्रणाली को गांव-गांव तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता
- आधुनिक तकनीक और जनजागरूकता से आपदा प्रबंधन को मिलेगा नया आयाम

पटना, 20 मई : बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सभागार में माननीय उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत की अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन विभाग एवं बिहार मौसम सेवा केंद्र के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय मंत्री, आपदा प्रबंधन विभाग, श्री रत्नेश सदा उपस्थित रहे। बैठक का उद्देश्य लू एवं वज्रपात जैसी आपदाओं से संबंधित पूर्व चेतावनी प्रणाली को गांव एवं पंचायत स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना तथा एसपीडीआरआर को और अधिक सशक्त बनाना था।
इस अवसर पर प्राधिकरण के माननीय सदस्य श्री पी.एन. राय, श्री कौशल किशोर मिश्र, श्री नरेंद्र कुमार सिंह, श्री प्रकाश कुमार, सचिव मो. वारिस खान, बिहार मौसम सेवा केंद्र की निदेशक श्री सी.एन. प्रभु सहित प्राधिकरण के अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, आपदा प्रबंधन विभाग एवं बिहार मौसम सेवा केंद्र के बीच समन्वित प्रयासों के माध्यम से पूर्व चेतावनी प्रणाली को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। पंचायत एवं वार्ड स्तर पर वार्ड सदस्यों, आपदा मित्रों, सुरक्षित तैराकों, प्रशिक्षित राजमिस्त्रियों तथा मास्टर ट्रेनरों की टीम गठित कर पूर्व सूचना तंत्र को सुदृढ़ बनाने तथा जनजागरूकता एवं त्वरित प्रत्युत्तर अभियान चलाने पर विशेष बल दिया गया। साथ ही ब्लॉक से राज्य स्तर तक दोतरफा संचार प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने हेतु कार्ययोजना तैयार करने पर भी सहमति बनी।
इस अवसर पर माननीय मंत्री, आपदा प्रबंधन विभाग,  श्री रत्नेश सदा ने कहा कि वे महादलित, गरीब एवं वंचित समाज के बीच लंबे समय से कार्य करते रहे हैं और अब आपदा प्रबंधन विभाग के माध्यम से राज्य की जनता तक समय पर पूर्व सूचना पहुंचाने के लिए प्राधिकरण परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि गरीबों, मजदूरों, किसानों एवं वंचित वर्गों को आपदाओं से सुरक्षित रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनसहभागिता, सामाजिक जागरूकता एवं शिक्षा के माध्यम से बिहार को अधिक सुरक्षित और सशक्त बनाया जा सकता है।

बिहार मौसम सेवा केंद्र की निदेशक श्री सी.एन. प्रभु ने बैठक में बताया कि 21 से 26 मई के बीच बिहार के दक्षिण एवं मध्य भाग के कई जिलों में भीषण गर्मी एवं लू चलने की संभावना है तथा अधिकतम तापमान 41 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, पटना, नालंदा, नवादा, सीवान, सारण, शेखपुरा, लखीसराय, जमुई, बांका एवं मुंगेर जिले इससे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। इस अवधि में दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहने की संभावना जताई गई। उन्होंने कहा कि इस दौरान निर्जलीकरण, चक्कर आना, थकान एवं हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। 
इस पर माननीय उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत ने संवेदनशील पंचायतों में विशेष जागरूकता अभियान चलाने तथा सचेत ऐप एवं अन्य माध्यमों से लोगों तक समय पूर्व सूचनाएं पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने एसपीडीआरआर के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों एवं नवाचारों को लगातार शामिल किया जा रहा है। 

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