कृषि मंत्री जी द्वारा ‘‘जल-जीवन-हरियाली’’ अभियान अंतर्गत राज्यस्तरीय ‘‘जल-जीवन-हरियाली दिवस’’ कार्यक्रम का किया गया उद्घाटन

कृषि मंत्री जी द्वारा ‘‘जल-जीवन-हरियाली’’ अभियान अंतर्गत राज्यस्तरीय ‘‘जल-जीवन-हरियाली दिवस’’ कार्यक्रम का किया गया उद्घाटन

जल संरक्षण पर अभी से ध्यान नहीं दिया गया तो अगली लड़ाई पानी के लिए लड़नी होगी

जल-जीवन-हरियाली अभियान मानव जीवन को सुरक्षित रखने वाली एक व्यापक और बहुआयामी पहल
-राम कृपाल यादव
(दिनांक 07.04.2026)

पटना- माननीय कृषि मंत्री, बिहार श्री राम कृपाल यादव द्वारा आज कृषि भवन, मीठापुर, पटना के सभागार में ‘‘जल-जीवन-हरियाली’’ अभियान अंतर्गत राज्यस्तरीय ‘‘जल-जीवन-हरियाली दिवस’’ कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया।
माननीय कृषि मंत्री ने अपने सम्बोधन में कहा कि यह दिवस पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन के प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही यह हमे जल-जीवन-हरियाली के गहरे संबंध को समझाने और इसे संरक्षित करने की प्रेरणा भी देता है। हम सभी जानते है कि जल ही जीवन का आधार है। जल के बिना जीवन की कल्पना भी असंभव है। लेकिन आज के दौर में जल संकट एक गंभीर समस्या बन चुका है। बढ़ती जनसंख्या अनियंत्रित शहरीकरण और जल के असंतुलित उपयोग के कारण भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है। इसके साथ ही वृक्षों की अंधाधुंध कटाई ने पर्यावरण असंतुलन को और भी बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण पर अभी से ध्यान देने की जरूरत है नहीं तो अगली लड़ाई पानी के लिए लड़नी होगी।

माननीय मंत्री ने कहा कि इसी संकट को देखते हुए राज्य को प्रदुषण से मुक्त करने एवं वातावरण को स्वच्छ तथा स्वस्थ्य बनाने के उद्देश्य से 13 जुलाई 2019 को बिहार विधान मंडल के माननीय सदस्यों की संयुक्त बैठक में सभी माननीय सदस्यों से विचार विमर्श किया गया एवं प्राप्त सुझावों के आलोक में माननीय मुख्यमंत्री के मार्ग दर्शन में बिहार जल-जीवन-हरियाली जागरूकता अभियान की रूप-रेखा तैयार की गई। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 150 वीं जयंती के मौके पर 02 अक्टूबर, 2019 को ज्ञान भवन, पटना में माननीय मुख्यमंत्री द्वारा जल-जीवन-हरियाली अभियान का शुभारम्भ किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण, हरियाली को बढ़ावा देना और पर्यावरण संतुलन बनाये रखना है। जल-जीवन-हरियाली अभियान मानव जीवन को सुरक्षित रखने वाली एक व्यापक और बहुआयामी पहल है। जिसकी सराहना न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर भी किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत सार्वजनिक जल संरचनाओं, तालाब, पोखर, कुँआ, नदी, नाला, आहर, पाईन को अतिक्रमण मुक्त कराकर उनका जीर्णोद्धार किया जा रहा है। इसके अलावा छोटी-छोटी नदियों, नालों और पहाड़ी क्षेत्रों में जल संग्रहण के लिए चेक डेम और अन्य संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। सरकारी भवनों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था, सघन वृक्षारोपन और सौर ऊर्जा के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

माननीय मंत्री ने कहा कि इस अभियान को सफल बनाने में कृषि विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। कृषि विभाग को इस अभियान के तहत स्पष्ट दायित्व दिया गया है। कृषि विभाग के द्वारा जैविक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम, सूक्ष्म सिंचाई, जलछाजन के विकास के लिए नये जल स्रोतो के सृजन का कार्यक्रम चलाया जा रहा है। साथ ही आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्राकृतिक खेती, शुष्क बागवानी, संरक्षित खेती, सिंचाई कूप तथा साद अवरोधक बांध जैसे अन्य अवयव को शामिल किया जा रहा है। जलवायु अनुकूल खेती के लिए सभी जिलों में कार्यक्रम चलाये जा रहे है। मौसम के उपयुक्त फसल का चुनाव तथा फसल प्रभेद का चुनाव बहुत आवश्यक है, यही बात वैज्ञानिक किसानों को समझा रहें है। बाजरा, मडुआ, चीना, कोनी जैसे फसलों की खेती किसान छोड़ चुके है। बदलते मौसम में ये फसल महत्वपूर्ण विकल्प बन रहा है। बदलते मौसम के परिपेक्ष्य में खेती को नये तरीके से देखने की जरूरत है तथा नये फसल पद्धति को विकसित करना आवश्यक है। 

माननीय कृषि मंत्री ने कहा कि जैविक खेती को बढ़ावा देने एवं किसानों के आय में वृद्धि तथा उन्हें उचित बाजार एवं विपणन की व्यवस्था हेतु बिहार राज्य जैविक मिशन का गठन किया गया है। यह योजना जल-जीवन-हरियाली अभियान के अन्तर्गत एक महत्वकांक्षी पहल है। जैविक कोरिडोर जिलो में मुख्य रूप से सब्जी की खेती की जाती है। इसके अतिरिक्त विशिष्ट फसलों यथा- काला गेहूँ, कतरनी चावल, बैगनी, पीले एवं हरे रंग का फूलगोभी, ब्रोकली, लाल, पीला एवं हरा सिमला मिर्च, ड्रैगन फ्रूट की खेती की जा रही है। राज्य सरकार ड्रीप तथा स्प्रींक्लर सिंचाई को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान दे रही है। जल छाजन क्षेत्रों में नये जल स्रोतो के सृजन के लिए 90 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान किया गया है। नए जल स्रोतो के सृजन से सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा कि जल होगा तो हरियाली होगी और हरियाली होगी तो जीवन होगी। इसलिए जल-जीवन हरियाली अभियान प्रदेश ही नहीं विश्व के प्रत्येक मानव का अभियान बनना चाहिए। हम सभी की यह जिम्मेदारी है कि इस अभियान को केवल सरकार की पहल न मानकर, इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनायें। अगर हर व्यक्ति जल बचाने और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए छोटा सा भी योगदान दें, तो हम इस धरती को आने वाली पीढ़ियों के लिए हरा-भरा और जल समृद्ध बना सकते है। मैं जल-जीवन-हरियाली अभियान की सफलता की कामना करता हूँ।

कृषि निदेशक, बिहार श्री सौरभ सुमन यादव ने कहा कि जैसा कि हम सभी जानते है प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को जल-जीवन-हरियाली अभियान अन्तर्गत जल जीवन-हरियाली दिवस के रूप में मनाया जाता है। दिनांक 02 अक्टूबर, 2019 को प्रारंभ इस अभियान का क्रियान्वयन 15 विभागों के समन्वय से मिशन मोड में लक्षित अवयवों के त्वरित कार्यान्वयन के साथ किया जा रहा है। इस अभियान को सफल बनाने में कृषि विभाग द्वारा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाया जा रहा है। राज्य स्तर पर आयोजित इस कार्यक्रम हेतु परिचर्चा का विषय है-‘‘कम पानी से अधिक उत्पादन कृषि नवाचार से बदलता परिदृश्य’’। जल-जीवन हरियाली अभियान के 11 चिन्हित अवयवों में से 5वें, 6ठे0 एवं 9वें अवयव का लक्ष्य कृषि विभाग को प्राप्त है, जो जलवायु अनुकूल कृषि, फसल अवशेष प्रबंधन, टपकन सिंचाई, नए जल स्रोतो का सृजन एवं जैविक खेती है। बदलते मौसम के कारण उत्पन्न हुई चुनौतियों के फलस्वरूप फसल पद्धति में बदलाव लाने के उद्देश्य से जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम योजना के तहत राज्य के 190 गाँवों को मौसम के अनुकूल मॉडल कृषि गाँव के रूप में तथा 1710 गाँवों को द्वितीयक गाँव के रूप में सम्मिलित किया गया है। प्रत्येक मॉडल गाँव एक Resilience Hub के रूप में काम करेगा, जो नजदीकी गाँव के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और सेवा प्रदाता के रूप में कार्य करेगा, जिससे द्वितीयक गाँव भी प्राथमिक गाँव का अनुकरण कर जलवायु अनुकूल कृषि से संबंधित फसल चक्र और नवीनतम तकनीक को अपनाकर अपनी फसल उत्पादकता एवं लाभप्रदता में उतरोत्तर वृद्धि कर सके। प्रत्येक कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रक्षेत्र में 2.5 एकड़ जमीन मौसम अनुकूल कृषि तकनीक के प्रत्यक्षण एवं प्रायोगिक ट्रायल के लिए अगले 50 वर्षों तक कर्णाकिंत किया गया है।
जल-जीवन-हरियाली अभियान में कृषि विभाग के साथ ग्रामीण विकास विभाग, शिक्षा विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, लघु जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, जल संसाधन विभाग, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, उर्जा विभाग प्रत्यक्ष रूप से और राज्य सरकार के सभी विभाग अप्रत्यक्ष रूप से शामिल है। यह हर्ष का विषय है कि इतनी कम समय अवधि में इस अभियान के क्रियान्वयन का सकारात्मक प्रभाव परिलक्षित होने लगा है।

0 Response to "कृषि मंत्री जी द्वारा ‘‘जल-जीवन-हरियाली’’ अभियान अंतर्गत राज्यस्तरीय ‘‘जल-जीवन-हरियाली दिवस’’ कार्यक्रम का किया गया उद्घाटन"

एक टिप्पणी भेजें

Ads on article

Advertise in articles 1

advertising articles 2

Advertise under the article