संसद में उठा पत्रकार सुरक्षा का सवाल

संसद में उठा पत्रकार सुरक्षा का सवाल

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना, 28 मार्च ::

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं है, बल्कि एक मिशन के रूप में देखी जाती है। यह समाज का दर्पण है, जो न केवल घटनाओं को सामने लाता है बल्कि सत्ता और जनता के बीच एक सेतु का कार्य भी करता है। पत्रकारिता लोकतंत्र की आत्मा है, क्योंकि यह सरकार को जवाबदेह बनाती है और आम जनता को जागरूक करती है। ऐसे में पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष निशिकांत राय ने बताया कि हाल ही में राज्यसभा सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने संसद में पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय को उठाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों को कई तरह की चुनौतियों और खतरों का सामना करना पड़ता है। चाहे वह अपराध की रिपोर्टिंग हो, राजनीतिक घटनाक्रम हो या फिर सामाजिक मुद्दे, हर जगह पत्रकार जोखिम के बीच काम करते हैं। सांसद चौधरी ने इस बात पर जोर दिया कि पत्रकारों को केवल नैतिक समर्थन ही नहीं, बल्कि ठोस सुरक्षा और कल्याणकारी नीतियों की आवश्यकता है।

राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग पत्रकारों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के लिए कार्य कर रहा है। इस दिशा में राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य संदीप कुमार के प्रयास भी सराहनीय रहे हैं, जिनकी पहल पर यह मुद्दा संसद तक पहुंचा। आयोग का उद्देश्य है कि पत्रकारों के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण तैयार किया जाए, जिससे वे निर्भीक होकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सके।

सांसद चौधरी ने पत्रकारों के हित में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जो उनके जीवन और कार्य को बेहतर बना सकते हैं। पत्रकारों के लिए एक समग्र और प्रभावी सुरक्षा नीति बनाई जाए। पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए जीवन और स्वास्थ्य बीमा अनिवार्य किया जाए। उनके बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष सहायता योजनाएं लागू की जाएं। पूर्व की तरह पत्रकारों को यात्रा में छूट दी जाए। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर टोल टैक्स से छूट प्रदान की जाए। ये सभी प्रस्ताव पत्रकारों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।

सांसद ने नरसिंहपुर और औरंगाबाद जैसे स्थानों पर पत्रकारों के लिए विशेष कार्यालय स्थापित करने की मांग भी की। इससे स्थानीय स्तर पर पत्रकारों को सहयोग और सुरक्षा मिल सकेगी। इसके अलावा, उन्होंने ब्लैकमेलिंग और पत्रकारों को रोकने वाले समूहों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। इसके लिए राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर एक पारदर्शी तंत्र विकसित करने की बात कही गई।

पत्रकार समाज के प्रहरी होते हैं। जब-जब भ्रष्टाचार या अन्याय होता है, तब पत्रकार ही उसे उजागर कर समाज को सही दिशा में ले जाने का काम करते हैं। यदि पत्रकार स्वयं असुरक्षित होंगे, तो वे स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पाएंगे, जिसका सीधा असर लोकतंत्र पर पड़ेगा। इसलिए पत्रकारों की सुरक्षा केवल एक पेशेवर आवश्यकता नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का भी एक महत्वपूर्ण आधार है।

राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष निशिकांत राय ने सांसद द्वारा इस मुद्दे को संसद में उठाए जाने को बेहद सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा के साथ-साथ लोकतंत्र की मजबूती के लिए भी आवश्यक है।

श्री राय ने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा और कल्याण से जुड़ी यह पहल निश्चित रूप से एक सकारात्मक संकेत है। अब आवश्यकता है कि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाए और एक व्यापक नीति तैयार करे, जिससे पत्रकार निर्भीक होकर अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें। यदि पत्रकार सुरक्षित रहेंगे, तो लोकतंत्र भी मजबूत रहेगा और समाज सही दिशा में आगे बढ़ेगा।
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