गवर्नमेंट तिब्बी कॉलेज अस्पताल, पटना में 3-दिवसीय ओरिएंटेशन वर्कशॉप का आगाज़: 2020-21 बैच के प्रशिक्षु डॉक्टरों को मिलेगी विशेषज्ञ ट्रेनिंग

गवर्नमेंट तिब्बी कॉलेज अस्पताल, पटना में 3-दिवसीय ओरिएंटेशन वर्कशॉप का आगाज़: 2020-21 बैच के प्रशिक्षु डॉक्टरों को मिलेगी विशेषज्ञ ट्रेनिंग

​गवर्नमेंट तिब्बी कॉलेज अस्पताल (GTCH), पटना के तत्वावधान में बैच 2020-21 के प्रशिक्षुओं (Internees) के लिए एक विशेष तीन दिवसीय 'ओरिएंटेशन वर्कशॉप' का भव्य आयोजन किया जा रहा है। 16 फरवरी से 18 फरवरी, 2026 तक चलने वाली इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नए चिकित्सकों को उनके पेशेवर जीवन की चुनौतियों, चिकित्सा नियमों और नैतिक मूल्यों के व्यावहारिक ज्ञान से लैस करना है। "शानदार अतीत, उज्ज्वल भविष्य" के संकल्प के साथ संस्थान ने इस व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की है। कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन सोमवार, 16 फरवरी को सुबह 10:30 बजे अस्पताल के मुख्य कॉन्फ्रेंस हॉल में होगा। उद्घाटन सत्र के तुरंत बाद वैज्ञानिक सत्र (Scientific Session) की शुरुआत होगी। पहले दिन डॉ. मोहम्मद तनवीर आलम प्रशिक्षुओं को 'इंटरनशिप के नियमों और विनियमों' की बारीकियों से अवगत कराएंगे। इसके पश्चात, डॉ. मोहम्मद रजी अहमद 'विटल्स' (Vitals) के सिद्धांतों और डॉ. खेसाल अहमद ईएनटी (ENT) विभाग में एक्स-रे की उपयोगिता पर तकनीकी जानकारी साझा करेंगे। दोपहर के सत्र में यूनानी चिकित्सा की महत्वपूर्ण पद्धति 'इलाज बित तदबीर' और आधुनिक डायग्नोस्टिक टूल्स पर गहन चर्चा की जाएगी।
​व्यावहारिक कौशल और विशेषज्ञ सत्र
​कार्यशाला के दूसरे और तीसरे दिन चिकित्सा जगत के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है। इसमें डॉ. मोहम्मद निजामुद्दीन द्वारा 'प्रिस्क्रिप्शन राइटिंग', डॉ. शुहैबा एफ अहमद द्वारा 'प्रसव पूर्व और प्रसव पश्चात देखभाल' (Antenatal & Postnatal Care) और डॉ. राजकुमार चंदन द्वारा 'एनेस्थीसिया' के व्यावहारिक उपयोग पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। मस्कुलोस्केलेटल विकारों के प्रबंधन में फिजियोथेरेपी और यूनानी दृष्टिकोण के समन्वय पर डॉ. अमरेश कुमार और डॉ. जावेद अहमद विशेष व्याख्यान देंगे।
​नैतिकता और भविष्य की दिशा
​केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील चिकित्सक बनने के लिए 'मेडिकल एथिक्स' (चिकित्सा नैतिकता) पर भी विशेष सत्र रखा गया है, जिसका संचालन डॉ. मोहम्मद नफीस इकबाल करेंगे। कार्यशाला के अंतिम दिन बाँझपन प्रबंधन के क्लिनिकल प्रोटोकॉल पर चर्चा होगी। समापन डॉ. शैलेश के. पंकज के प्रेरणादायक संबोधन (Motivational Talk) के साथ होगा, जो प्रशिक्षुओं में नई ऊर्जा का संचार करेगा।

अस्पताल के अधीक्षक प्रो. डॉ. शहनवाज़ अख्तर ने सभी प्रशिक्षु डॉक्टरों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा, "यह कार्यशाला हमारे भविष्य के चिकित्सकों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। हमारा लक्ष्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि समाज को ऐसे डॉक्टर देना है जो तकनीकी रूप से दक्ष होने के साथ-साथ नैतिक रूप से भी सुदृढ़ हों।" उन्होंने सभी इंटरनीज़ को इस अवसर का लाभ उठाकर अपनी विशेषज्ञता निखारने के लिए प्रोत्साहित किया।

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