पटना में राज्य स्तरीय अंतर-प्रमंडल दिव्यांग खेल प्रतियोगिता भव्य रूप से संपन्न

पटना में राज्य स्तरीय अंतर-प्रमंडल दिव्यांग खेल प्रतियोगिता भव्य रूप से संपन्न

250 खिलाड़ियों ने दिखाया हौसला, अतिथियों के प्रेरक संदेश से गूंजा पाटलिपुत्र खेल परिसर

पटना, 15 फरवरी। खेल विभाग, बिहार तथा बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में जिला प्रशासन, पटना द्वारा पाटलिपुत्र खेल परिसर, कंकड़बाग में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय (अंतर प्रमंडल) दिव्यांग खेल प्रतियोगिता भव्य एवं सफल आयोजन के साथ संपन्न हो गई। प्रतियोगिता में राज्य के सभी नौ प्रमंडलों से चयनित लगभग 250 दिव्यांग खिलाड़ियों ने अपने प्रशिक्षकों, स्काउट एवं टीम प्रभारियों के साथ भाग लेकर अद्भुत खेल प्रतिभा, आत्मविश्वास और संघर्षशीलता का परिचय दिया।

प्रतियोगिता के अंतर्गत एथलेटिक्स स्पर्धाएं बालक एवं बालिका वर्ग में आयोजित की गईं, जिनमें खिलाड़ियों को उनकी दिव्यांगता के आधार पर मानसिक दिव्यांग, शारीरिक दिव्यांग, मूकबधिर तथा ड्वार्फ (लघु कद) श्रेणियों में विभाजित कर प्रतिस्पर्धाएँ कराई गईं। प्रतियोगिता का वातावरण खिलाड़ियों के जोश और दर्शकों की तालियों से गूंजता रहा।
इस आयोजन का विशेष आकर्षण दृष्टि बाधित खिलाड़ियों के लिए आयोजित क्रिकेट एवं फुटबॉल मुकाबले रहे। इन मैचों में खिलाड़ियों ने सीमाओं को चुनौती देते हुए शानदार टीम भावना, समन्वय और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन किया। दर्शकों ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए उन्हें निरंतर प्रोत्साहित किया, जिससे खेल परिसर में प्रेरणादायक माहौल बना रहा।

समापन समारोह में विजेता खिलाड़ियों को पदक एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर आनंदी कुमार, क्रीड़ा कार्यपालक, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण, ओम प्रकाश, जिला खेल पदाधिकारी, पटना, झंडु कुमार, अंतर्राष्ट्रीय पैरा खिलाड़ी तथा डॉ. शिवाजी कुमार, अध्यक्ष, बिहार पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन ने खिलाड़ियों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि दिव्यांग खिलाड़ी अपनी इच्छाशक्ति, परिश्रम और आत्मविश्वास से यह सिद्ध कर रहे हैं कि कोई भी शारीरिक बाधा सफलता की राह में रुकावट नहीं बन सकती। आनंदी कुमार ने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांग खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, खेल उपकरण और प्रतियोगिताओं के आयोजन को लेकर गंभीर है और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ओम प्रकाश ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन का उद्देश्य दिव्यांग खिलाड़ियों को समान अवसर प्रदान करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है, क्योंकि खेल आत्मविश्वास, अनुशासन और सामाजिक समावेशन का सशक्त माध्यम है।
अंतर्राष्ट्रीय पैरा खिलाड़ी झंडु कुमार ने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए अपने अनुभव साझा किए और कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद निरंतर अभ्यास, सही मार्गदर्शन और लक्ष्य के प्रति समर्पण से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचना संभव है। उन्होंने खिलाड़ियों से हार न मानने और अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहने का आह्वान किया। 

वहीं डॉ. शिवाजी कुमार ने कहा कि बिहार में पैरा स्पोर्ट्स तेजी से विकसित हो रहे हैं और राज्य के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि संघ दिव्यांग खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं में भागीदारी और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग खिलाड़ियों को राज्य स्तर पर मंच प्रदान करना, उनकी प्रतिभा को पहचान दिलाना तथा खेलों के माध्यम से आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास को बढ़ावा देना रहा। आयोजन ने यह संदेश दिया कि खेल सभी के लिए हैं और समाज में समावेशी खेल संस्कृति को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। खेल प्रेमियों, अभिभावकों एवं अधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि दिव्यांग खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने के अधिक अवसर मिल सकें।

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