कृषि विकास को राज्य विकास की आधारशिला बताते हुए बिहार के रोड मैप की चर्चा-राम कृपाल यादव
कृषि विकास को राज्य विकास की आधारशिला बताते हुए बिहार के रोड मैप की चर्चा
-राम कृपाल यादव
(दिनांक 02.01.2026)
मुंबई स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान में आयोजित वैज्ञानिक किसान संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माननीय कृषि मंत्री, बिहार श्री राम कृपाल यादव ने कहा कि आज का यह संवाद “लैब से लैंड” की भावना को और अधिक सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण अवसर है। वैज्ञानिक शोध, नवाचार और किसानों के व्यावहारिक अनुभवों के समन्वय से ही कृषि को लाभकारी एवं टिकाऊ बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ लगभग 76 प्रतिशत आबादी की आजीविका प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि का योगदान लगभग 21 प्रतिशत है, जिससे यह स्पष्ट है कि कृषि का समग्र विकास ही राज्य के विकास की आधारशिला है। इसी दृष्टिकोण के तहत बिहार सरकार कृषि रोड मैप के माध्यम से चरणबद्ध एवं योजनाबद्ध तरीके से कृषि विकास को आगे बढ़ा रही है।
माननीय मंत्री ने कहा कि बिहार की कृषि अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रही है, बल्कि आय वृद्धि, मूल्य संवर्धन और बाज़ार से जुड़ाव के समग्र दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रही है। इस क्रम में कपास जैसी औद्योगिक एवं नकदी फसल बिहार के किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि बिहार के कई क्षेत्रों में मृदा, जलवायु और श्रम उपलब्धता कपास की खेती के लिए अनुकूल संभावनाएँ प्रस्तुत करती हैं। कपास को फसल विविधीकरण के रूप में अपनाने से किसानों की जोखिम क्षमता कम होगी तथा आय के नए स्रोत विकसित होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि कपास उत्पादन को सफल बनाने के लिए बीज चयन, कीट एवं रोग प्रबंधन, फाइबर गुणवत्ता सुधार तथा लागत घटाने वाली तकनीकों पर वैज्ञानिक सहयोग अत्यंत आवश्यक है। साथ ही कपास आधारित जिनिंग, स्पिनिंग एवं वैल्यू एडिशन इकाइयों की स्थापना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के व्यापक अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
माननीय कृषि मंत्री ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे बिहार-विशेष कपास पैकेज ऑफ प्रैक्टिस, कम अवधि एवं जलवायु-अनुकूल किस्मों, कीट एवं रोग प्रतिरोधी तकनीकों तथा किसान-हितैषी लागत मॉडल पर अपने व्यावहारिक सुझाव साझा करें। उन्होंने यह भी अपेक्षा जताई कि इन सुझावों को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बिहार में लागू करने की दिशा में संस्थागत सहयोग किया जाए।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि बिहार सरकार किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, बाज़ार एवं उद्योग से जोड़ने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। किसान- वैज्ञानिक- सरकार की मजबूत साझेदारी से ही टिकाऊ कृषि और समृद्ध किसान का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब किसान समृद्ध होगा, तभी राज्य और देश भी समृद्ध होगा।
उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व एवं लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी के मार्गदर्शन में कृषि को विकास का केंद्र बनाकर राज्य को प्रगति की नई दिशा दी जा रही है। कृषि के समग्र विकास से ही बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। विकसित बिहार के माध्यम से ही विकसित भारत की संकल्पना को साकार किया जा सकता है।
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