पटना समाहरणालय में श्रवण श्रुति कार्यक्रम पर प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन

पटना समाहरणालय में श्रवण श्रुति कार्यक्रम पर प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन

नये साल में 6 महीना के अंदर 500 मूक-बधिर बच्चों के सर्जरी का लक्ष्य; पटना जिला को मूक-बधिर मुक्त करेंगेः जिलाधिकारी
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श्रवण श्रुति कार्यक्रम ने सैकड़ों बच्चों के जीवन को नई दिशा दी है; अभिभावकों के चेहरों पर खुशी लौटी है; परिवारों में प्रसन्नता का माहौल है
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पटना, शुक्रवार, दिनांक 02.01.2026: जिलाधिकारी, पटना डॉ. त्यागराजन एस.एम. की अध्यक्षता में आज समाहरणालय सभागार में श्रवण श्रुति योजना अन्तर्गत प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन हुआ। इसमें पटना जिलान्तर्गत सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों/प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक, सीडीपीओ, महिला पर्यवेक्षिका, आशा फैसिलिटेटर, आशा कार्यकर्त्ता, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के समन्वयक-प्रबंधक एवं अन्य भी उपस्थित थे। स्व. एस.एन. मेहरोत्रा मेमोरियल ईएनटी फाउण्डेशन, कानपुर के प्रो. डॉ. रोहित मेहरोत्रा, एम.एस. ईएनटी द्वारा सभी चिकित्सा पदाधिकारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को श्रवण श्रुति कार्यक्रम के संबंध में वृहद प्रशिक्षण दिया गया। बच्चों में कम उम्र में ही सुनने की समस्या पहचानने के संकेत, जाँच, उपचार, सर्जरी, नियमित स्पिच थेरैपी इत्यादि के बारे में विस्तार से बताया गया। 
जिलाधिकारी ने चिकित्सा पदाधिकारियों एवं अन्य को प्रशिक्षण कार्यशाला में संबोधित करते हुए कहा कि पटना जिला को मूक-बधिर मुक्त करना है। इसके लिए स्वास्थ्य, आईसीडीएस, जीविका, पंचायती राज, समाज कल्याण, शिक्षा, ग्रामीण विकास, कल्याण, सिविल सोसायटी, माता-पिता, अभिभावकगण सहित सभी स्टेकहोल्डर्स को सजग, तत्पर एवं प्रतिबद्ध रहना होगा। 

जिलाधिकारी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार हमारे देश में प्रति 1,000 बच्चों में 5 से 8 बच्चे बधिर जन्म लेते हैं। राज्य सरकार दिव्यांगजन के अधिकारों, गरिमापूर्ण जीवन एवं समान अवसर के लिए प्रतिबद्ध है। श्रवण श्रुति कार्यक्रम ने न केवल बच्चों के कानों को ठीक किया, बल्कि उन आवाजों को सुना, जो पहले कभी सुनी ही नहीं गई थी। यह एक समावेशी एवं संवेदनशील स्वास्थ्य प्रणाली का द्योतक है। 
जिलाधिकारी ने कहा कि लक्ष्य रखा गया है कि नव वर्ष में अगले 6 (छः) महीना के अंदर पटना के 500 मूक-बधिर बच्चों का कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी कराया जाए ताकि उन्हें सुनने-बोलने की क्षमता आए। इसके लिए कम उम्र में ही ऐसे बच्चों की पहचान जरूरी है। जागरूकता की कमी के कारण कुछ ही बच्चों का समुचित स्क्रीनिंग हो पाती है। हमें इसमें सुधार लाने की आवश्यकता है। आइए हमसब मिलकर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा पीछे न छूटे। 

जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को निदेश दिया कि संस्थागत प्रसव के हरएक मामले में नवजात बच्चों की स्क्रीनिंग जरूर कराएं ताकि कम उम्र में ही मूक-बधिर बच्चों की पहचान हो सके। सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी न्यू-बॉर्न स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित कर्मियों को तैनात रखें। आशा एवं एएनएम के माध्यम से जन-जन को जागरूक करें। जिलाधिकारी ने कहा कि त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के माननीय जन-प्रतिनिधियों, जीविका दीदियों, विकास मित्रों,  आँगनबाड़ी सेविकाओं-सहायिकाओं इत्यादि के माध्यम से श्रवण श्रुति कार्यक्रम के बारे में समाज में जागरूकता फैलाएं। डोर-टू-डोर विजिट के द्वारा मूक-बधिर बच्चों की पहचान करें। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निदेश दिया कि ओएई मशीन के अलावा टीकाकरण के समय ही बच्चों के व्यवहारात्मक जाँच (बिहैवियरल टेस्ट) के द्वारा सुनने की समस्या को पहचानें एवं लक्षण के अनुसार उपचार सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी ने कहा कि मूक-बधिर बच्चों के इलाज की निःशुल्क एवं बेहतरीन व्यवस्था है। जितना कम उम्र में इलाज होगा उतना अच्छा परिणाम आएगा। 
जिलाधिकारी ने कहा कि पटना जिला में जुलाई से नवम्बर, 2025 के बीच 66,434 बच्चों की कान से जुड़ी/श्रवण समस्या की जाँच की गई। इसमें 160 बच्चों में कान से जुड़ी समस्या पायी गई। इन सभी बच्चों का जिला के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों  में जाँच किया गया। ओएई प्रतिवेदन के आधार पर 56 बच्चे कोक्लियर इम्प्लांट हेतु चिन्हित किए गए। इनमें से 45 बच्चों को कोक्लियर इम्प्लांट के लिए कानपुर भेजा गया है तथा 32 बच्चों का सफलतापूर्वक कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी हो गया है। बच्चों में श्रवण बाधिता की पहचान, परीक्षण एवं उपचार तथा उपचारित बच्चों का स्पीच थेरेपी करते हुए सामाजिक समन्वय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी ने अधिकारियों को इन बच्चों की सहायता हेतु हरसंभव प्रयास करने का निदेश दिया। 

जिलाधिकारी ने कहा कि 5 साल से कम उम्र के शत-प्रतिशत मूक-बधिर बच्चों का लक्षण के अनुसार समुचित उपचार, सर्जरी एवं थेरैपी के माध्यम से सुनने, बोलने की शक्ति लौटाना है। इसके लिए सभी पदाधिकारी सघन प्रयास करें।

जिलाधिकारी ने कहा कि उपचार एवं सर्जरी के साथ-साथ नियमित स्पीच थेरैपी तथा माता-पिता एवं अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी काफी आवश्यक है। जल्दी जाँच, सही इलाज एवं थेरैपी से बच्चा सामान्य बच्चों की तरह बोल सकता है। देरी से नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह जीवन-परिवर्तनकारी पहल 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों में होने वाली श्रवण हानि (hearing loss) की समय पर पहचान, उपचार और पुनर्वास पर केंद्रित है। इसे पूरे पटना जिला में लागू किया गया है। इस योजना से मूक बधिर बच्चों को समुचित सहायता उपलब्ध हो रही है। नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग और संस्थागत क्षमता को भी मज़बूती मिली है। ज़िलाधिकारी ने सिविल सर्जन को मूक-बधिर बच्चों की कम उम्र में पहचान तथा जाँच की गति बढ़ाने के लिए पीएचसीवाइज लक्ष्य निर्धारित करने का निदेश दिया। 
ज़िलाधिकारी ने कहा यह योजना उन बच्चों के लिए है जो जन्म से या बचपन में सुन नहीं सकते हैं। इसका उद्देश्य बहुत स्पष्ट है – जल्दी पहचान, सटीक इलाज, और समावेशी पुनर्वास। श्रवणश्रुति कार्यक्रम ने न सिर्फ बच्चों के कानों को सुनने की शक्ति दी, बल्कि उनके जीवन में नई आशा, नई ऊर्जा, और सबसे महत्वपूर्ण – एक आवाज़ लौटाई।

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