डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने मछली पालकों के लिए जारी की सलाह

डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने मछली पालकों के लिए जारी की सलाह

मछली पालक इन उपायों से ठंड में बनाए रखें प्राकृतिक आहार की उपलब्धता

पटना, 07 जनवरी।

बिहार सरकार का डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग राज्य में मछली उत्पादन को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में विभाग ने मछली पालकों के लिए सलाह जारी की है। इन सलाहों में कड़ाके की ठंड से मछलियों को बचाने और उनकी देखभाल संबंधी बातें शामिल हैं। मछली पालक विभाग की इन सलाहों का पालन करके न सिर्फ मछलियों की उचित देखभाल कर सकते हैं बल्कि अपनी आमदनी भी बढ़ा सकते हैं।

औसत तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से कम होने पर यदि मछली पूरक आहार ग्रहण नहीं करती हो तो पूरक आहार का प्रयोग बंद कर दें। ठंड के मौसम में प्राकृतिक आहार की उपलब्धता तालाब में बनाए रखने के लिए प्रति एकड़ की दर से प्रत्येक 10 से 15 दिनों के अंतराल पर 15 किलो ग्राम चूना, 15 किलो ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट, 5 किलो ग्राम मिनरल मिक्सचर एवं 50 किलो ग्राम सरसों या राई की खल्ली (पानी में भिगोकर) घोलकर तालाब में छिड़काव करना चाहिए। साथ ही, मत्स्य बीज उत्पादकों को कॉमन कार्प का ब्रीडिंग जनवरी के अंतिम सप्ताह या फरवरी माह से प्रारंभ कराने के लिए 15-20 दिन पूर्व नर एवं मादा कॉमन कार्प के प्रजनक मछली (ब्रूड) को दो अलग-अलग तालाबों में संचयन कर लेना चाहिए। प्रजनक मछली (ब्रूड) को आरगुलस के संक्रमण से बचाने के लिए आवश्यकतानुसार 80 -100 मिली लीटर प्रति एकड़ की दर से बुटॉक्स या क्लिनर या टिनिक्स का छिड़काव दिन में 10 बजे पूर्वाह्न से 2 बजे अपराह्न के बीच करें।
ठंड में पैरासाइटिक संक्रमण से बचाव के लि ए 40-50 किलो ग्राम प्रति एकड़ की दर से नमक का घोल बनाकर छिड़काव करें अथवा वी.के.सी. (80 प्रतिशत) 1 लीटर प्रति एकड़ की दर से घोलकर छिड़काव करें।
ठंड के मौसम में कार्प मछली वाले तालाब में न्यूनतम पानी का स्तर 5-6 फीट एवं पंगेसियस मछली वाले तालाब में न्यूनतम पानी का स्तर 8-10 फीट बनाए रखें। पंगेसियस मछली के तालाबों में प्रतिदिन 10 से 20 प्रतिशत तक पानी का बदलाव ट्यूबवेल के पानी से करें। तापमान अधिक गिरने एवं कोहरा छाने की स्थिति में तालाब में किसी तरह का क्रिया कलाप अर्थात पूरक आहार, चूना, खाद, गोबर, दवा इत्यादि का छिड़काव बंद कर दें।
वहीं तालाब का पानी अत्यधिक हरा होने पर चूना एवं रासायनिक खाद का प्रयोग बंद कर दें एवं 800 ग्राम प्रति एकड़ की दर से कॉपर सल्फेट का प्रयोग पानी में घोलकर करें।

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