राष्ट्रीय पुस्तक मेला में गांधीवादी पुस्तकों पर परिचर्चा में भाग लेते रचनाकार प्रेम कुमार मणि भैरव लाल दास प्रोफेसर रीता सिंह और सुजाता

राष्ट्रीय पुस्तक मेला में गांधीवादी पुस्तकों पर परिचर्चा में भाग लेते रचनाकार प्रेम कुमार मणि भैरव लाल दास प्रोफेसर रीता सिंह और सुजाता

 

राष्ट्रीय पुस्तक मेला : ग्यारहवां दिन

पुस्तक मेला में महान चिंतकों की जीवन–गाथा पर पुस्तकें

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पटना, 4दिसम्बर । स्थानीय गांधी मैदान में समय इंडिया, नई दिल्ली के तत्वावधान में जारी राष्ट्रीय पुस्तक मेला में मेला में गांधी, बुद्ध, भगवान महावीर, स्वामी रामतीर्थ, राजाराम मोहन राय, विवेकानन्द, रामकृष्ण परमहंस, कबीर, संत रैदास, प्रेमचन्द जैसे महान चिंतकों की आत्मकथा, जीवनी, चिंतन परक पुस्तकें पाठकों के लिए उपलब्ध हैं । यदि आप रोमां रोलां जैसे चिंतक की महात्मा गांधी, रामकृष्ण परमहंस, विवेकानंद के जीवन दर्शन पर उनके विचारों को पढ़ना चाहते हैं, तो राजकमल प्रकाशन समूह के स्टॉल पर पुस्तकें उपलब्ध हैं । इसी स्टॉल पर आपको के.सी. दत्ता का राजा राममोहन राय, अमृतलाल नागर का चैतन्य महाप्रभु, अमृत राय का कलम का सिपाही, महात्मा गांधी का सत्य के प्रयोग प्राप्त कर सकते हैं । इसी तरह वाणी प्रकाशन समूह के स्टॉल पर गांधीवादी लेखिका और समाज सेविका सुजाता की गांधी पर केन्द्रित पाँच पुस्तकें: नौआखाली, सौ साल पहले:  चम्पारण का      गांधी, सत्य के दस्तावेज, राष्ट्रपिता और भगत सिंह पुस्तकें गांधीवादी चिंतन और दर्शन को समझने और गांधी को नए नजरिए से देखने की दृष्टि के लिए उपलब्ध हैं । ऐसी तमाम पुस्तकें पुस्तक मेला में विभिन्न स्टाल्सों पर आपको अनुभव की नई दुनिया में ले जाने के लिए हैं । आप 10 दिसम्बर तक जारी पुस्तक मेला का लाभ उठा सकते हैं । पुस्तक प्रेमियों के लिए मेला परिसर में प्रवेश की समयावधि प्रात: 11 बजे से रात्रि 9:00 बजे बजे तक की है ।  

गांधीवादी पुस्तकों की परिचर्चा सम्पन्न : राष्ट्रीय पुस्तक मेला में वाणी प्रकाशन समूह की ओर से सुप्रसिद्ध गांधीवादी लेखिका व समाज–सेविका सुजाता की गांधी के दर्शन और चिंतन पर केन्द्रित पाँच पुस्तकों की परिचर्चा आयोजित की गई । परिचर्चा में वरिष्ठ लेखक प्रेमकुमार मणि, साहित्यकार, इतिहासकार व गांधीवादी चिंतक भैरवलाल दास और लेखिका प्रो. रीता सिंह ने भाग लिया । परिचर्चा में मौजूदा दौर में गांधी के चिंतन और विचारों पर रोशनी डालते हुए प्रेमकुमार मणि ने गांधी की प्रासंगिकता को आज के दौर में बेहद प्रामाणिक बताया । उन्होंने कहा कि अपने समय में गांधी जितने प्रासंगिक थे वर्तमान में उनका चिंतन भारतीय समाज के लिए ज्यादा उपयोगी सिद्ध हो सकता है बशर्ते पूरी ईमानदारी से उनके दर्शन की मूल आत्मा को जीवन में उतारा जाए । गांधीवादी चिंतक भैरवलाल दास ने कहा कि गांधी ने सत्य के प्रयोग को अपने जीवन का हिस्सा बनाया । पहले खुद पर प्रयोग किया फिर दूसरों को अपनाने के लिए कहा । आज कथनी और करनी का फासला बहुत बढ़ गया है । इसीलिए चिंतन प्रयोग जीवन में असफल हो रहे हैं । परिचर्चा में प्रो. रीता सिंह ने भी अपने विचार रखे । गांधी पर पुस्तक परिचर्चा के बहाने आज के दौर में एक बार फिर गांधी विचारों के केन्द्र में आ गए ।

स्त्री विमर्श और आज का समाज परिचर्चा आज : पुस्तक मेला में मंगलवार को सायं 4:00 बजे स्त्री विमर्श और आज का समाज विषय पर परिचर्चा होगी । इस परिचर्चा का सत्र खुला संवाद का होगा है । आप सभी आमंत्रित हैं । आप आएं और अपने विचार रखें । दोपहर 1:00 से 2:00 बजे के बीच वाणी प्रकाशन समूह एक और कार्यक्रम लेकर पाठकों के बीच उपस्थित होगा । इस कार्यक्रम में प्रकाशन की ओर से प्रकाशित ‘आँच’ कविता संग्रह पर परिचर्चा होगी । सायं 6:00 बजे पर्यावरण पर चर्चा होगी । 

नगर में आज :– राष्ट्रीय पुस्तक मेला 

स्त्री विमर्श और आज का समाज परिचर्चा 

मंगलवार सायं 4:00 बजे, गांधी मैदान, सभागार मंच 

चन्द्र भूषण

प्रबंध न्यासी

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