वोट चोरी देश द्रोह, ज्ञानेश कुमार को अविलंब गिरफ्तार किया जाए– संदीप सौरभ
*एसआईआर के बाद हुए सभी चुनाव रद्द हों, वोट चोरी से बनी सरकार को सत्ता में रहने का हक नहीं– भाकपा माले*
राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत पटना में भाकपा माले ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी ,एसआईआर निलंबित करने (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से काटे गए तमाम नामों को बहाल करने,चुनाव आयोग की स्वतंत्र एवं लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली बहाल करने,चुनाव आयुक्तों की बहाली की वर्तमान प्रणाली रद्द करने,चुनाव आयुक्तों की बहाल करने वाली कमिटी में सुप्रीमकोर्ट के मुख्यन्यायधीश को शामिल करने,एसआईआर के बाद हुए चुनाव को रद्द करने की मांग को लेकर जीपीओ गोलंबर पर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में भाकपा माले पोलित ब्यूरो सदस्य कॉमरेड अमर,पालीगंज विधायक संदीप सौरभ, पूर्व विधायक गोपाल रविदास,महानगर सचिव जितेंद्र कुमार,राज्य कमिटी सदस्य एसके शर्मा, रणविजय कुमार, मुकेश मुक्त, आइसा बिहार राज्य उपाध्यक्ष सबा आफरीन, ऐपवा नेत्री अनुराधा कुमारी, राखी मेहता, अनय मेहता, मुर्तजा अली सहित भाकपा माले के कार्यकर्ता मौजूद थे।
सभा को संबोधित करते हुए पालीगंज विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि एसआईआर असंवैधानिक है, ये लोकतंत्र विरोधी है।ये बात भाकपा माले और पुरा विपक्ष इसका विरोध करते रहा है,जो बात आज सच साबित हो रही है। आंदोलन रुकने वाला नहीं है। ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी से कम कुछ नहीं चाहिए। सरकार को गड़बड़ी करनी थी इसलिए नियम बदल कर ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त की कुर्सी पर बैठाया गया।
सभा को पूर्व विधायक गोपाल रविदास ने संबोधित करते हुए कहा कि SIR के बाद हुए सभी चुनाव रद्द किए जाएं। 13 करोड़ नागरिकों को वोटिंग प्रक्रिया से बाहर कर के चुनी हुई सरकार कभी वैध नहीं माना जाना चाहिए। वोट चोरी से आई सरकार को गद्दी पर रहने का कोई हक़ नहीं।
लोकतंत्र में सरकार का गठन जनता के मताधिकार और जनादेश के आधार पर होना चाहिए। यदि बड़ी संख्या में नागरिकों को मतदान से वंचित कर चुनाव कराया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी भावना के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट चोरी के जरिए सत्ता में आई सरकार को गद्दी पर बने रहने का कोई हक नहीं है। उन्होंने सभी चुनावों को रद्द कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करना निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है। किसी भी नागरिक को उसके मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची से बाहर किए गए नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जाए, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और वोट चोरी के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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