भारतीय मानव अधिकार रक्षक संस्था का मिशन - “मानव अधिकारों की रक्षा और सामाजिक उत्थान
जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना, 01 अगस्त ::
किसी भी सभ्य समाज की पहचान वहां के नागरिकों के अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा से होती है। जब समाज में किसी व्यक्ति के मानव अधिकारों का हनन होता है या वह अन्याय का शिकार बनता है, तब ऐसी संस्थाओं की आवश्यकता महसूस होती है जो निष्पक्ष होकर पीड़ितों की आवाज बने। भारतीय मानव अधिकार रक्षक संस्था इसी उद्देश्य को लेकर कार्य कर रही है। संस्था का लक्ष्य केवल मानव अधिकारों की रक्षा करना ही नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग के विकास, शिक्षा, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देना भी है।
संस्था का प्रमुख उद्देश्य मानव अधिकारों के हनन के मामलों में पीड़ितों की आवाज उठाना और उन्हें उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। साथ ही, पारिवारिक विवादों को आपसी समझ और संवाद के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जाता है ताकि छोटे-छोटे मतभेद बड़े विवाद का रूप न ले। संस्था प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर समाज में कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास बनाए रखने का भी प्रयास करती है। इसका उद्देश्य जनता और प्रशासन के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना है।
भारतीय मानव अधिकार रक्षक संस्था समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए विभिन्न विभागों के उन अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित एवं प्रोत्साहित करती है, जो अपने कर्तव्यों का ईमानदारी और निष्ठा से पालन करते हैं। इसके साथ ही संस्था समाज के समग्र विकास और जनकल्याण के लिए विभिन्न सामाजिक गतिविधियों का संचालन करती है, जिससे समाज में सहयोग, भाईचारा और सेवा की भावना मजबूत हो सके।
संस्था का मानना है कि शिक्षित समाज ही सशक्त समाज होता है। इसी सोच के साथ प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का भी प्रयास किया जाता है। उच्च शिक्षा प्राप्त कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को भी संस्था मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करने का संकल्प रखती है, ताकि वे अपने भविष्य को बेहतर बना सके।
बढ़ती बेरोजगारी को देखते हुए संस्था युवाओं को कौशल विकास से जोड़ने का प्रयास करती है। प्रशिक्षण, मार्गदर्शन तथा आवश्यकता पड़ने पर आर्थिक सहयोग के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार और रोजगार के लिए प्रेरित किया जाता है। इससे आत्मनिर्भर भारत की भावना को भी मजबूती मिलती है।
महिलाओं के आर्थिक एवं शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए संस्था निरंतर प्रयासरत है। महिलाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी देना, उनमें भागीदारी सुनिश्चित करना तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य करना संस्था की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके अलावा "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" अभियान के माध्यम से समाज में बेटियों के सम्मान, शिक्षा और सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य भी किया जाता है।
दहेज प्रथा, बाल विवाह, अशिक्षा तथा अन्य सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए संस्था लगातार जागरूकता अभियान चलाने का लक्ष्य रखती है। साथ ही सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाकर उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास भी किया जाता है।
संस्था की सदस्यता के लिए आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होना आवश्यक है। साथ ही उसका नाम किसी भी प्रकार की गैर-कानूनी गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए। नए सदस्य की सदस्यता प्रारंभिक रूप से 5 माह के लिए मान्य होगी। इस अवधि में सदस्य के कार्यों और सक्रियता का मूल्यांकन किया जाएगा। संतोषजनक कार्य करने वाले सदस्य की सदस्यता एक वर्ष के लिए बढ़ा दी जाएगी।
संस्था के सभी सदस्यों को 5 माह के भीतर अपने अधीन रिक्त पदों पर नए पदाधिकारियों की नियुक्ति कर अपनी समिति का गठन पूर्ण करना होगा। सक्रिय रूप से कार्यकाल पूरा करने वाले सदस्यों को पदोन्नति दी जाएगी तथा उनका नियुक्ति पत्र संबंधित थाना प्रभारी से लेकर जिलाधिकारी तक प्रेषित किया जाएगा। सदस्यता के लिए आवश्यक दस्तावेज संस्था के व्हाट्सएप नंबर पर अथवा कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से जमा किए जा सकते हैं।
भारतीय मानव अधिकार रक्षक संस्था का उद्देश्य केवल अधिकारों की बात करना नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और जनकल्याण के माध्यम से एक जागरूक, सुरक्षित और विकसित समाज का निर्माण करना है। यदि समाज का प्रत्येक नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक बने, तो एक सशक्त, समृद्ध और न्यायपूर्ण भारत का सपना निश्चित रूप से साकार हो सकता है।
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