जंतर-मंतर आंदोलन के समर्थन में आइसा का 'छात्र-युवा आक्रोश दिवस' आयोजित, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ बुलंद हुई छात्रों की आवाज़
20 जुलाई 2026, पटना
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स' एसोसिएशन (आइसा), पटना विश्वविद्यालय ने आज संगठन के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर छात्र-युवा आक्रोश दिवस का आयोजन किया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, पेपर लीक, शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी आंदोलन तथा संसद मार्च और आमरण अनशन के समर्थन में पटना कॉलेज कैंटीन के सामने आयोजित इस कार्यक्रम में पटना के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से बड़ी संख्या में छात्र-युवाओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 12:30 बजे फोटो प्रदर्शनी के साथ हुई, जिसके बाद ओपन माइक और सभा का आयोजन किया गया। सभा का संचालन आइसा पटना विश्वविद्यालय सचिव कॉमरेड सबा ने किया।
कार्यक्रम में आइसा बिहार राज्य सचिव कॉमरेड दीपांकर, आइसा बिहार राज्य उपाध्यक्ष कॉमरेड मनीषा, आइसा पटना विश्वविद्यालय उपाध्यक्ष कॉमरेड आशीष, कॉमरेड विश्वजीत, कॉमरेड वीर आदित्य, भाकपा (माले) कार्यकर्ता कॉमरेड राजन तथा आइसा पटना विश्वविद्यालय के साथियों आज़ाद, मोनू और शंकर ने नेतृत्वकारी भूमिका निभाई।
सभा को संबोधित करते हुए कॉमरेड दीपांकर, मनीषा, विश्वजीत और वीर आदित्य ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था आज अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है। लगातार हो रहे पेपर लीक, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की विफलताएँ और शिक्षा के बढ़ते व्यापारीकरण ने करोड़ों छात्रों के भविष्य को असुरक्षित बना दिया है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन केवल पेपर लीक के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में व्याप्त संस्थागत भ्रष्टाचार के खिलाफ एक व्यापक लोकतांत्रिक संघर्ष है, जिसे देशभर के छात्रों का समर्थन मिल रहा है।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण फोटो प्रदर्शनी रही, जिसमें शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं और उसके मानवीय परिणामों को रेखांकित किया गया। प्रदर्शनी में शिक्षा व्यवस्था से उपजे दबावों से जिन 22 छात्रों संस्थागत हत्या की गई उनकी तस्वीरें, जंतर-मंतर आंदोलन की झलकियाँ, सोनम वांगचुक तथा आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आइसा के साथियों नेहा, अमीन, मनीष, दानिश, दीपक और ऋषिकेश की तस्वीरें प्रदर्शित की गईं। इसके साथ ही छात्रों द्वारा बनाए गए रचनात्मक पोस्टर भी प्रदर्शनी का हिस्सा रहे, जिन्होंने शिक्षा के सवालों पर व्यापक जनध्यान आकर्षित किया।
ओपन माइक के दौरान विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्रों ने संसद मार्च और जंतर-मंतर पर जारी आमरण अनशन के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की तथा शिक्षा के सवालों पर अपने अनुभव और विचार साझा किए। पीडब्ल्यूसी की छात्रा दिशा ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति की आवाज़ों को दबाने के खिलाफ स्वयं लिखी हुई एक मार्मिक कविता प्रस्तुत की, जिसे उपस्थित छात्रों ने खूब सराहा।
सभा के दौरान कॉमरेड राजन ने अपने जनप्रतिरोधी गीतों से उपस्थित छात्रों में जोश भर दिया और कार्यक्रम को सांस्कृतिक ऊर्जा प्रदान की।
कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने "धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो", "NTA की जवाबदेही तय करो", "पेपर लीक बंद करो", "शिक्षा बचाओ, भविष्य बचाओ" और "भाजपा सरकार जवाब दो" जैसे नारों के साथ केंद्र सरकार से शिक्षा व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार की जिम्मेदारी लेने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
आइसा ने घोषणा की कि जंतर-मंतर पर जारी संघर्ष और शिक्षा बचाओ आंदोलन के समर्थन में देशभर में छात्रों की आवाज़ को और व्यापक बनाया जाएगा तथा जब तक पेपर लीक, परीक्षा भ्रष्टाचार और शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
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