न्याय दर्शन : आत्मा का प्रकाश" पुस्तक के शीघ्र प्रकाशन की घोषणा
जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना, 20 जुलाई ::
लेखक एवं चिंतक अवधेश झा ने अपनी आगामी पुस्तक "न्याय दर्शन : आत्मा का प्रकाश" के शीघ्र प्रकाशन की घोषणा की। यह पुस्तक भारतीय दर्शन, वेदांत एवं सनातन ज्ञान परंपरा के आलोक में न्याय के शाश्वत स्वरूप का दार्शनिक एवं आध्यात्मिक विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
पुस्तक का केंद्रीय संदेश है— "न्याय शाश्वत, सत्य एवं सनातन है।" इसमें प्रतिपादित किया गया है कि न्याय सत्य, धर्म, आत्मबोध और मानवीय चेतना से जुड़ा एक सार्वभौमिक एवं सनातन सिद्धांत है।
इस अवसर पर न्यायमूर्ति श्री राजेन्द्र प्रसाद ने कहा, "भारतीय न्याय व्यवस्था का मूल आधार वैदिक अवधारणाओं पर आधारित था और अपने मूल स्वरूप में यह विश्व की सर्वोत्तम न्याय व्यवस्थाओं में से एक रही है। वर्तमान भारतीय न्याय व्यवस्था भी अत्यंत सुदृढ़ है, किंतु न्याय मिलने में होने वाला अनावश्यक विलंब एक गंभीर चुनौती है। विलंब से प्राप्त न्याय, वस्तुतः अन्याय के समान है। आज जब विश्व न्याय, समानता, मानवाधिकार और नैतिक मूल्यों पर गंभीर विमर्श कर रहा है, तब भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोक में न्याय की पुनर्व्याख्या समय की आवश्यकता है। मुझे विश्वास है कि यह पुस्तक विधि के विद्यार्थियों, न्यायविदों, शोधार्थियों, शिक्षकों तथा दर्शन एवं अध्यात्म में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।"
पुस्तक की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें न्यायमूर्ति राजेन्द्र प्रसाद एवं अवधेश झा के बीच न्याय, धर्म, संविधान, समाज और अध्यात्म से जुड़े विभिन्न विषयों पर हुए सारगर्भित संवाद संकलित किए गए हैं। ये संवाद न्याय के व्यापक, मानवीय एवं आध्यात्मिक आयामों को नई दृष्टि प्रदान करते हैं।
अवधेश झा ने कहा, "भारत अतीत में भी विश्वगुरु था, वर्तमान में भी है और भविष्य में भी रहेगा। इसका आधार वेद, वैदिक ज्ञान, ब्रह्म और आत्मज्ञान रहा है। हमारी संस्कृति आदिकाल से ब्रह्मज्ञान, आत्मज्ञान और स्वज्ञान की परंपरा की वाहक रही है। हमारे यहाँ महर्षि वसिष्ठ, महर्षि संदीपनि जैसे महान गुरु हुए हैं तथा भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण जैसे आदर्श शिष्य, जिन्होंने ज्ञान, धर्म और न्याय की परंपरा को विश्व के समक्ष स्थापित किया।"
उन्होंने बताया कि "न्याय दर्शन : आत्मा का प्रकाश" शीघ्र ही प्रकाशित होकर पाठकों के लिए उपलब्ध होगी।
इस अवसर पर उन्होंने कहा, "न्याय तभी सार्थक है, जब वह सत्य, करुणा और मानव गरिमा से जुड़ा हो। न्याय आत्मा का शाश्वत प्रकाश है।"
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