स्वस्थ मिट्टी के लिए तकनीकी समाधान
डॉ. आशुतोष उपाध्याय
प्रमुख, भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना – 800014
(1)
अंधाधुंध रसायनिक खाद का प्रयोग, मिट्टी को बनाता लाचार
इससे बिगड़ता स्वास्थ्य धरा का, आओ करें हम गहन विचार
जितनी लगी हो पौधों को भूँख, हम उतना ही दें उनको आहार
सही मात्रा में उर्वरकों का उपयोग, है वैज्ञानिक खेती का आधार
(2)
मृदा परीक्षण करवाना है जरूरी, जानने को मृदा में मौजूदा तत्व
तो सब बनवा लो मृदा स्वास्थ्य कार्ड, ये है आप सबका दायित्व
किस तत्व की है कितनी कमी, और कितने देने होंगे पोषक तत्व
सही आकलन व सक्षम प्रयोग देगा, स्वस्थ मिट्टी को स्थायित्व
(3)
सही स्रोत और सही मात्रा की, सबको रखना होगी जानकारी
सही समय पर सही विधि अपनाने का, हर कोई है अधिकारी
वैज्ञानिक विधि अपनाने से मिटेगी, बेबस किसानों की लाचारी
मृदा में पोषक तत्वों का अनुप्रयोग, है मृदा के लिए लाभकारी
(4)
उचित समय पर संतुलित मात्रा में, उर्वरकों का अनुप्रयोग करो
लीफ कलर चार्ट अपनाकर, आवश्यक नत्रजन का व्यवहार करो
राइजोबियम एवं एज़ोटोबैक्टर से, नत्रजन मिट्टी में स्थिर करो
यूरिया का प्रयोग घटाओ, ड्रोन से नैनो यूरिया का छिड़काव करो
(5)
नील हरित शैवाल के द्वारा धान फसल में, नत्रजन की आपूर्ति करो
फास्फोरस घुलनशील बैक्टीरिया से फास्फोरस, माटी में उपलब्ध करो
रसायनिक उर्वरकों का उपयोग घटाओ, और मृदा प्रदूषण को कम करो
प्राकृतिक व जैविक खेती अपनाओ, उत्पादन पौष्टिकता से भरपूर करो
(6)
ग्लूकोनाइट में 3 से 6 प्रतिशत मात्रा में, पोटाश उर्वरक होता है
धीमे से यह होता स्रावित, ह्रास कम एवं उपलब्ध अधिक होता है
मृदा की आवश्यकता अनुसार ही इसका, कुशल अनुप्रयोग होता है
बढ़ाता मृदा जल धारण क्षमता, मृदा वातन में भी सुधार होता है
(7)
हो मिट्टी में ज्यादा क्षारीयता तो, जिप्सम का करना अनुप्रयोग
और यदि अम्लीय हो मिट्टी तो, चूने को मिलाना है सही प्रयोग
सूक्ष्म सिंचाई से घटती लवणता, पोषक तत्वों का पौधे करते भोग
रहे माटी स्वस्थ मिले ज्यादा उपज, हमें लेना होगा सबका सहयोग
(8)
गोबर खाद और वर्मी कम्पोस्ट से, मिट्टी में पोषक तत्व भरो
ढैंचा के प्रयोग से मिट्टी की, जल धारण क्षमता में सुधार करो
फसल चक्र को अपनाकर के, फसलों में दलहन को शामिल करो
फसल अवशेषों व सूखे पत्तों से ढ़क, मिट्टी में नमी बरकरार रखो
(9)
बार बार गहरी जुताई करने से, सूक्ष्म जीवों को पहुँचता नुकसान
न्यूनतम जुताई में घटती लागत, व कार्बन संरक्षण होता आसान
फसलों के साथ मेड़ों पर पेड़, मिट्टी को करते पोषक तत्व प्रदान
होता ज्यादा लाभ रुकता मृदा क्षरण, मिलता एक स्थाई समाधान
(10)
तो आओ हम सब करें प्रतिज्ञा, इस माटी को हरदम स्वस्थ रखेंगे
और आवश्यकतानुसार उर्वरकों का, हम सक्षमता से व्यवहार करेंगे
फसल अवशेष को मिट्टी में ही सड़ायेंगे, और पराली नहीं जलायेंगे
इस तरह दीर्घ काल तक हम, अपनी माटी को उपजाऊ बनाये रखेंगे
______________________________
0 Response to "स्वस्थ मिट्टी के लिए तकनीकी समाधान"
एक टिप्पणी भेजें