मृदा संरक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग से ही सुरक्षित होगा खेती का भविष्य : विजय कुमार खेमका

मृदा संरक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग से ही सुरक्षित होगा खेती का भविष्य : विजय कुमार खेमका

भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के निर्देशानुसार कृषि विज्ञान केंद्र, जलालगढ़ (पूर्णिया); जिला कृषि विभाग, कृषि विभाग आत्मा तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 18 जून, 2026 को कृषि विज्ञान केंद्र, जलालगढ़, पूर्णिया में “प्राकृतिक खेती एवं खेत बचाओ अभियान” जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत एक जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्णिया सदर के माननीय विधायक श्री विजय कुमार खेमका जी थे। इस अवसर पर माननीय विधान परिषद सदस्य श्री अनिल ठाकुर, जिला किसान मोर्चा के अध्यक्ष श्री यादवेंद्र कुमार सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. के.एम. सिंह; जिला कृषि पदाधिकारी श्री हरिद्वार प्रसाद चौरसिया, आईसीएआर-आरसीईआर, पटना से आए वैज्ञानिक डॉ. गौस अली, आत्मा के परियोजना निदेशक श्री निखिल कुमार मिश्रा; सहायक निदेशक (रसायन) श्री निशांत कुमार, जिला कृषि विभाग के अन्य पदाधिकारी, प्राकृतिक खेती से जुड़ी कृषि सखियाँ तथा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक एवं कर्मी उपस्थित रहे और कार्यशाला के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अपने संबोधन में माननीय विधायक श्री विजय कुमार खेमका ने किसानों को प्राकृतिक खेती तथा मृदा संरक्षण से जुड़े प्रमुख घटकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना तथा उनके समाधान पर बल देते हुए कहा कि किसानों को कृषि विभाग से निरंतर जुड़कर अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य में सुधार करना चाहिए तथा कृषि विभाग के सहयोग से अपने उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास करना चाहिए। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य अतिथियों ने भी किसानों को संबोधित करते हुए प्राकृतिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के महत्व पर अपने विचार साझा किए।
डॉ. के.एम. सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि भूमि का संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग के साथ-साथ जैव उर्वरकों, हरी खाद एवं फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने का आह्वान किया, जिससे मृदा की उर्वरता बनी रहे तथा खेती की लागत में कमी लाई जा सके। उन्होंने बताया कि “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत 1 जून से 30 जून तक पूरे पूर्णिया जिले में निर्धारित कार्ययोजना (रोडमैप) के अनुसार विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
 ज्ञातव्य है कि पूर्णिया जिले में डीएपी उर्वरक का अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है। इस समस्या के समाधान हेतु किसानों को उर्वरकों के संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही किसानों को मृदा नमूना संग्रहण की वैज्ञानिक विधि तथा मृदा परीक्षण के महत्व की जानकारी दी जा रही है, ताकि वे मृदा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग कर सकें। डॉ. गौस अली ने किसानों को समेकित कृषि प्रणाली, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा जैव उर्वरकों के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने जैव उर्वरकों द्वारा बीज एवं मृदा उपचार के लाभों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इनके प्रयोग से मृदा की गुणवत्ता में सुधार होता है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम की जा सकती है। कार्यक्रम में कुल 215 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 100 से अधिक महिलाएं शामिल थीं।

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