बाल श्रम उन्मूलन के लिए बिहार सरकार का विशेष अभियान जारी
*222 स्थानों पर छापेमारी, 122 बाल श्रमिक विमुक्त, 60 मामलों में प्राथमिकी दर्ज*
पटना, बिहार: श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग, बिहार सरकार द्वारा राज्य को बाल श्रम मुक्त बनाने के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर विशेष विमुक्ति एवं जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत 20 मई से 30 मई के बीच राज्य के विभिन्न जिलों में सघन निरीक्षण एवं छापेमारी की गई। इस दौरान कुल 222 स्थानों पर जांच अभियान चलाया गया, जिसमें 122 बाल श्रमिकों को विमुक्त कराया गया तथा बाल श्रम कराने वाले 60 नियोजकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई।
विभाग के माननीय मंत्री श्री अरुण शंकर प्रसाद के निदेशानुसार, विभागीय अधिकारियों द्वारा बाल श्रम को समाप्त करने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई गई है। इसके अंतर्गत न केवल बाल श्रमिकों की पहचान कर उन्हें कार्यस्थलों से मुक्त कराया जा रहा है, बल्कि उनके पुनर्वास, शिक्षा से जोड़ने तथा उनके परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की दिशा में भी समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं।
राज्य के सभी जिलों में जिला प्रशासन, श्रम विभाग, पुलिस प्रशासन, बाल संरक्षण इकाइयों तथा संबंधित विभागों के सहयोग से विशेष धावा दलों का गठन किया गया है। इन दलों द्वारा होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, चाय की दुकान, गैराज, कार्यशालाएं, ईंट-भट्ठे, घरेलू प्रतिष्ठान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान एवं अन्य संभावित कार्यस्थलों पर नियमित जांच अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान बाल श्रमिकों की पहचान कर उन्हें तत्काल विमुक्त कराया गया तथा उनके संबंध में आवश्यक कानूनी और पुनर्वास संबंधी कार्रवाई प्रारंभ की गई।
माननीय मंत्री ने बताया कि बाल श्रम न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के अधिकारों का भी हनन करता है। बाल श्रम बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को प्रभावित करता है तथा उन्हें शिक्षा और बेहतर भविष्य के अवसरों से वंचित कर देता है। इसलिए बिहार सरकार बाल श्रम उन्मूलन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्रवाई कर रही है।
बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अनुसार किसी भी बालक को रोजगार देना या उससे कार्य कराना दंडनीय अपराध है। अधिनियम के तहत दोषी नियोजकों पर 20,000 रुपये से 50,000 रुपये तक का जुर्माना तथा दो वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है। विभाग द्वारा ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है ताकि बाल श्रम के प्रति समाज में शून्य सहिष्णुता का वातावरण स्थापित हो सके।
बिहार सरकार बाल श्रमिकों के पुनर्वास के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। बिहार देश का पहला राज्य है जहां विमुक्त किशोर श्रमिकों को मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) के माध्यम से 25,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इस सहायता का उद्देश्य विमुक्त बच्चों को शिक्षा, कौशल विकास और सम्मानजनक जीवन की मुख्यधारा से जोड़ना है। विभाग यह सुनिश्चित करने के लिए भी कार्य कर रहा है कि विमुक्त बच्चों का विद्यालयों में नामांकन हो तथा वे पुनः श्रम के चक्र में न फंसें।
बाल श्रम उन्मूलन केवल प्रशासनिक कार्रवाई से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए सामाजिक जागरूकता और जनभागीदारी भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर राज्यभर में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। जिला श्रम कार्यालयों के माध्यम से विद्यालयों, सार्वजनिक स्थलों, बाजार क्षेत्रों एवं भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
इस क्रम में विभिन्न विद्यालयों में वाद-विवाद प्रतियोगिता, निबंध लेखन, चित्रकला प्रतियोगिता, शपथ ग्रहण कार्यक्रम तथा प्रभात फेरी का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने अपने विचारों के माध्यम से बाल श्रम के दुष्परिणामों, शिक्षा के महत्व और बच्चों के अधिकारों पर प्रकाश डाला। प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं ने बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प भी लिया।
प्रभात फेरियों के दौरान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने बाल श्रम उन्मूलन से संबंधित संदेशों और नारों के माध्यम से आमजन को जागरूक किया। बच्चों ने लोगों से अपील की कि वे किसी भी बच्चे को मजदूरी के लिए नियोजित न करें तथा प्रत्येक बच्चे को शिक्षा और विकास का अवसर प्रदान करने में सहयोग करें। प्रभात फेरी के दौरान ‘‘बाल श्रम बंद करो, शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करो’’, ‘‘हर बच्चे का यही अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान’’ तथा ‘‘बाल श्रम मुक्त हो बिहार’’ जैसे नारों से वातावरण गुंजायमान रहा।
विभाग ने आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों, उद्योगों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से बाल श्रम उन्मूलन अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील की है। विभाग का मानना है कि सरकार, समाज और नागरिकों के संयुक्त प्रयासों से ही बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई का पूर्ण उन्मूलन संभव है।
श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग ने पुनः स्पष्ट किया है कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, शिक्षित और सम्मानजनक बचपन उपलब्ध कराना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। बाल श्रम मुक्त बिहार के निर्माण की दिशा में विभाग आगे भी सख्त कार्रवाई और व्यापक जनजागरूकता अभियान जारी रखेगा।
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