जदयू नेताओं की नाराजगी और आक्रोश तेजस्वी जी पर क्यों ? चित्तरंजन गगन
पटना 12 अप्रैल 2026 ; राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने जदयू के प्रदेश अध्यक्ष सहित अन्य नेताओं द्वारा पिछले कुछ दिनों से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के खिलाफ दिए जा रहे बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जानना चाहा है कि आखिर तेजस्वी जी से इतनी नाराजगी और आक्रोशित होने का कारण क्या है ? उन्हें तो अपने दल के उन नेताओं के खिलाफ नाराजगी और आक्रोशित होना चाहिए जो भाजपा के एजेंट बनकर भाजपा के एजेंडे पर काम कर रहे हैं। तेजस्वी जी तो विधानसभा चुनाव के समय हीं कह दिया था कि भाजपा नीतीश कुमार जी को मुख्यमंत्री पद पर नहीं रहने देगी। और जदयू के अंदर वे लोग हावी हैं जो भाजपा के एजेंट हैं और नीतीश जी को हटाकर भाजपा को सत्ता सौंपने की साजिश में शामिल हैं। यह तो उसी दिन स्पष्ट हो गया था जब बिहार में बहुत हीं अच्छे ढंग से काम कर रही महागठबंधन सरकार से नीतीश जी अलग हो गए थे। महागठबंधन तो नीतीश कुमार जी को मोदी जी के विकल्प के रूप में देख रही थी। नीतीश जी को सम्मान देने में तेजस्वी जी या महागठबंधन के अन्य दल कभी कोई कमी नहीं की।
राजद प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा को केवल नीतीश जी का इस्तेमाल कर सत्ता पर काबिज होना था जिसमें वह सफल रहा। भाजपा नेता अभी नीतीश जी के तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं पर यह सब उसके दिखावटी और बनावटी है। यदि नीतीश जी के काम से भाजपा इतनी हीं प्रभावित है तो उन्हें मुख्यमंत्री पद से जबरन क्यों हटा रहा है। यदि नीतीश जी की इक्षा राज्यसभा में जाने की थी तो अब तो शपथ ग्रहण हो गया, उनकी इक्षा की पूर्ति हो गई तो अब मुख्यमंत्री पद पर बने रहने देने में क्या परेशानी है।
राजद प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा के अभियान का तो अभी केवल एक अध्याय हीं पुरा हुआ है, अगले अध्याय में वह नीतीश कुमार जी को और उनकी पार्टी जदयू को इतिहास से भी मिटाने के फार्मूले पर काम कर रही है। जिस दिन नीतीश कुमार जी का राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण होता है उसी दिन हरिवंश जी का राज्यसभा में मनोनीत होना और नीतीश जी के शपथ ग्रहण के समय प्रधानमंत्री जी, गृह मंत्री जी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जो बिहार के रहने वाले हैं और नीतीश कुमार जी की सरकार में मंत्री रह चुके हैं, का अनुपस्थित रहना कोई सामान्य घटना नहीं है।
जहां तक नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव जी का सवाल है तो राज्यहित से जुड़े मुद्दों को उठाना उनकी वैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। पिछले कुछ महीनों से राज्य में अनिश्चितता की स्थिति पैदा कर दी गई है। राज्यकोष खाली है, कानून व्यवस्था की स्थिति तो अब यहां तक पहुंच गई है कि दिन-दहाड़े भीड़भाड़ वाले चौराहे पर अपराधी धर से सर कलम कर दे रहा है। भ्रष्टाचार के एक पर एक मामले सामने आ रहे हैं। टीआरई 4 का परीक्षा दो वर्षों से लटका हुआ है और अभ्यर्थी धरने पर बैठे हुए हैं। दो महीने से कैबिनेट की बैठक नहीं हुई है। भाजपा और जदयू नेताओं की बयानबाजी राज्य के लिए नहीं बल्कि सत्ता में भागीदारी और हिस्सेदारी के साथ हीं अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए हो रही है।
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