शहीदे आज़म भगत सिंह शहादत दिवस पर साम्राज्यवाद विरोधी विरासत को मजबूत करने का संकल्प

शहीदे आज़म भगत सिंह शहादत दिवस पर साम्राज्यवाद विरोधी विरासत को मजबूत करने का संकल्प

*अमेरिका—इजरायल गठजोड़ के आगे मोदीराज का आत्मसमर्पण नहीं चलेगा*

पटना, 23 मार्च 2026

भाकपा – माले, छात्र संगठन आइसा (AISA) और आरवाईए (RYA) ने आज शहीदे आज़म भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस के अवसर पर ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों और विभिन्न छात्र संगठनों के साथ पटना में भगत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी.

इस कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेता के डी यादव, ऐक्टू के नेता आर एन ठाकुर, रणविजय कुमार, कुमार परवेज, मुर्तजा अली, संजय यादव, पन्नालाल, विभा गुप्ता, रामेश्वर पासवान, संतोष पासवान, डॉ प्रकाश, पप्पू शर्मा, आइसा की राज्य अध्यक्ष प्रीति कुमारी, पटना विश्वविद्यालय की छात्र नेता सबा आफरीन, अदिति सिंह, आशीष कुमार, मनीषा यादव, प्रिया गुप्ता तथा आरवाईए के विनय कुमार, अखिलेश कुमार सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे.

वक्ताओं ने कहा कि ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ पूरे भारत में स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा देने वाली इन महान क्रांतिकारियों की शहादत को आज 95 वर्ष पूरे हो गए हैं. इंकलाब जिंदाबाद” और “साम्राज्यवाद का नाश हो” के नारे आज के दौर में और अधिक सार्थक हो उठे हैं.

वक्ताओं ने कहा कि भगत सिंह अपने समय के अग्रणी और दूरदर्शी क्रांतिकारी थे. बाल्यकाल में ही जलियांवाला बाग हत्याकांड के बर्बर अनुभव ने उनके भीतर आज़ादी की लौ को प्रज्वलित कर दिया. उनके चाचा अजीत सिंह के नेतृत्व में चला “पगड़ी संभाल जट्टा” आंदोलन भी उनके राजनीतिक विकास में महत्वपूर्ण प्रेरणा स्रोत रहा.

वक्ताओं ने कहा कि खेतों, खलिहानों, कारखानों और समाज के हर कोने में शोषण के खिलाफ उठी आवाज़ों ने ही आज़ादी के आंदोलन को धार दी. व्लादिमीर लेनिन के नेतृत्व में सफल हुई रूसी क्रांति से प्रेरित होकर भगत सिंह समाजवादी भारत का सपना देखते थे, जहां मेहनतकश जनता वास्तव में सत्ता की भागीदार हो.
आज के संदर्भ में वक्ताओं ने कहा कि देश की सत्ता कॉरपोरेट हितों और साम्राज्यवादी ताकतों के प्रभाव में काम कर रही है. अमेरिका—इजरायल की युद्धोन्मादी धुरी के साथ बढ़ती नजदीकियों ने भारत को आर्थिक संकट, महंगाई और अंतरराष्ट्रीय अलगाव की ओर धकेल दिया है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण लाखों भारतीय प्रवासी कामगार असुरक्षा के माहौल में फंसे हुए हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि और व्यापार नीतियों के जरिए छोटे किसानों और मजदूरों के हितों की अनदेखी की जा रही है. अमेरिका के साथ असमान व्यापार समझौते भारतीय कृषि को गंभीर संकट में डाल रहे हैं.

वक्ताओं ने कहा कि ‘हिंदू राष्ट्र’ के नाम पर देश की रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय हितों से समझौता किया जा रहा है, जिससे भारत अपने पारंपरिक मित्र देशों—विशेषकर ईरान—से दूर होता जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ता जा रहा है.

अंत में वक्ताओं ने आह्वान किया कि वर्तमान परिस्थितियों में भगत सिंह की साम्राज्यवाद-विरोधी विरासत को मजबूत करते हुए जनप्रतिरोध को व्यापक और तेज किया जाए. उन्होंने कहा कि यह समय अन्याय, शोषण और साम्राज्यवादी हस्तक्षेप के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष को नई ऊंचाई देने का है.

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