पूर्वोत्तर के किसानों ने कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में सीखे समेकित कृषि के गुर

पूर्वोत्तर के किसानों ने कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में सीखे समेकित कृषि के गुर

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों हेतु चार दिवसीय क्षमता निर्माण एवं आदान सहायता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। संस्थान के उत्तर-पूर्वी पर्वतीय घटक कोष से समर्थित इस कार्यक्रम में असम, सिक्किम, त्रिपुरा, मेघालय तथा नागालैंड से आए 27 प्रगतिशील किसानों एवं कृषि उद्यमियों ने सहभागिता की। 23 फरवरी को प्रतिभागी किसानों को संस्थान में विकसित वैज्ञानिक कृषि प्रणालियों का विस्तृत अवलोकन कराया गया।
संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने किसानों के साथ संवाद करते हुए उन्हें खेती को केवल जीविकोपार्जन का साधन न मानकर एक लाभकारी उद्यम के रूप में अपनाने का संदेश दिया। संवाद के दौरान असम के एक किसान ने वर्मीकंपोस्ट की कम बाजार कीमत (4–5 रुपये प्रति किलोग्राम) की समस्या रखी, जबकि मेघालय की एक महिला किसान ने अपने राज्य में इसकी कीमत 20 रुपये प्रति किलोग्राम बताई। इस संदर्भ में डॉ. दास ने किसानों को ‘अंतर-राज्यीय विपणन प्रणाली’ विकसित करने का सुझाव दिया, जिससे विभिन्न राज्यों के किसान बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकें और अधिक लाभ अर्जित कर सकें।
पूर्वोत्तर के किसानों ने संस्थान के ‘समेकित कृषि प्रणाली’  मॉडल का गहन अध्ययन किया, जो उनके पारंपरिक कृषि तरीकों से भिन्न एवं अधिक वैज्ञानिक है। उन्हें बताया गया कि स्थानीय परिस्थितियों एवं जलवायु के अनुरूप फसलों का चयन कर भूमि के प्रत्येक भाग का समुचित एवं लाभकारी उपयोग कैसे किया जा सकता है।
कृषि तकनीकी ज्ञान साझा करते हुए डॉ. उज्ज्वल कुमार (प्रमुख, सामाजिक -आर्थिक एवं प्रसार ) ने किसानों से अपने-अपने क्षेत्रों में ‘ब्रांड एंबेसडर’ की भूमिका निभाने का आह्वान किया। डॉ. आशुतोष उपाध्याय (प्रमुख, भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग ) तथा डॉ. कमल शर्मा (प्रमुख, पशुधन एवं मात्स्यिकी  प्रबंधन प्रभाग) ने संसाधनों के समुचित उपयोग एवं कुशल प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया।
मत्स्य पालन से जुड़े किसानों को वैज्ञानिक डॉ. विवेकानंद भारती ने उच्च मूल्य वाली मछली पालन तकनीकों तथा पोषण संबंधी रोगों के वैज्ञानिक समाधान की जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप न्यूट्री-गार्डन बीज, कृषि उपकरण एवं बैग जैसे उपयोगी कृषि इनपुट भी प्रदान किए गए।
इस अवसर पर वैज्ञानिक डॉ. बिश्वजीत देबनाथ, डॉ. तारकेश्वर कुमार एवं डॉ. अभिषेक दुबे ने भी आधुनिक कृषि तकनीकों पर विस्तृत जानकारी साझा की। संस्थान के प्रक्षेत्र भ्रमण के दौरान डॉ. पी. सी. चंद्रन ने पशुपालन संबंधी उन्नत तकनीकों से अवगत कराया, जबकि प्रक्षेत्र प्रबंधक श्री अभिषेक कुमार ने फसल प्रक्षेत्र की आधुनिक पद्धतियों का प्रदर्शन किया।
किसानों ने संस्थान के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन, उन्नत प्रायोगिक मॉडलों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यहाँ से प्राप्त ज्ञान एवं तकनीक उनके राज्यों में कृषि के क्षेत्र में सकारात्मक एवं क्रांतिकारी परिवर्तन लाएंगे।

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