बागमती पर विनाशकारी तटबंध निर्माण पर तत्काल रोक लगे — रिव्यू कमिटी को कारगर बनाए सरकार : माले

बागमती पर विनाशकारी तटबंध निर्माण पर तत्काल रोक लगे — रिव्यू कमिटी को कारगर बनाए सरकार : माले

पटना, 22 फरवरी 2026

भाकपा(माले) राज्य सचिव कुणाल ने मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट प्रखंड स्थित बेनीबाद में 16 फरवरी से जारी सामूहिक अनशन के प्रति एकजुटता जताते हुए कहा है कि बाढ़ नियंत्रण के नाम पर बागमती नदी पर जबरन तटबंध निर्माण बिहार के लिए विनाशकारी साबित होगा. उन्होंने मांग की कि जब तक राज्य सरकार द्वारा गठित रिव्यू कमिटी अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करती, तब तक तटबंध निर्माण के सभी कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए.

कुणाल ने कहा कि तटबंध निर्माण की मौजूदा योजना के तहत सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और समस्तीपुर के करीब 120 गांव बांध के भीतर आ जाएंगे. इससे हजारों परिवारों का विस्थापन होगा और हजारों एकड़ उपजाऊ खेती की जमीन बर्बाद हो जाएगी. यह केवल पर्यावरण और आजीविका का प्रश्न नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और मानवाधिकार का भी मुद्दा है.

उन्होंने याद दिलाया कि जनआंदोलनों और नदी विशेषज्ञों के दबाव में वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने एक रिव्यू कमिटी गठित की थी और घोषणा की थी कि कमिटी की रिपोर्ट आने तक तटबंध निर्माण का काम नहीं होगा, लेकिन आठ वर्ष बीत जाने के बावजूद कमिटी को न तो पर्याप्त संसाधन दिए गए और न ही उसे प्रभावी ढंग से काम करने का अवसर मिला. उलटे बीच-बीच में प्रशासनिक बल के सहारे निर्माण कार्य शुरू कराया जाता है और आंदोलनकारियों पर फर्जी मुकदमे लादे जाते हैं.

माले राज्य सचिव ने कहा कि बेनीबाद में जारी अनशन बागमती क्षेत्र की जनता की सामूहिक चेतावनी है. सरकार को चाहिए कि वह दमन और पुलिस बल के सहारे निर्माण कार्य थोपने के बजाय संवाद और वैज्ञानिक समीक्षा का रास्ता अपनाए. रिव्यू कमिटी क्षेत्रीय जनता, किसान संगठनों और विशेषज्ञों से विचार-विमर्श कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे और उसी के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाए.

भाकपा(माले) ने सरकार के समक्ष निम्न मांगें रखी हैं—

रिव्यू कमिटी की रिपोर्ट आने तक तटबंध निर्माण पर सख्ती से रोक लगाई जाए

रिव्यू कमिटी को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर उसे कारगर बनाया जाए तथा उसमें बागमती संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधि को शामिल किया जाए

जहां-जहां तटबंध बन चुका है, वहां के विस्थापितों के पुनर्वास की गारंटी और अधिग्रहित जमीन का उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाए

बाढ़ नियंत्रण के लिए जल निकासी की वैज्ञानिक और कारगर व्यवस्था विकसित की जाए

बागमती नदी पर पर्याप्त संख्या में पुलों का निर्माण किया जाए ताकि क्षेत्र की आवाजाही और आर्थिक गतिविधियां बाधित न हों

कुणाल ने कहा कि बाढ़ की समस्या का समाधान केवल तटबंध निर्माण नहीं है। बिहार के लिए दीर्घकालिक और वैज्ञानिक जल प्रबंधन नीति की जरूरत है, जिसमें नदी के प्राकृतिक प्रवाह, जल निकासी, स्थानीय पारिस्थितिकी और लोगों की आजीविका को केंद्र में रखा जाए. सरकार यदि जनता की आवाज को अनसुना करेगी, तो आंदोलन और तेज होगा.

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