पारस एचएमआरआई की ओर से आयोजित कैंसर कॉन्क्लेव समाप्त, 300 से ज्यादा कैंसर चिकित्सक ने हिस्सा लिया

पारस एचएमआरआई की ओर से आयोजित कैंसर कॉन्क्लेव समाप्त, 300 से ज्यादा कैंसर चिकित्सक ने हिस्सा लिया

• 75 दूसरे राज्य से आए थे
• अंतिम दिन मुंह और गले के कैंसर पर शोध पत्र प्रस्तुत हुए और परिचर्चा हुई
पटना।
राज्य के प्रतिष्ठित पारस एचएमआरआई हॉस्पिटल की ओर से होटल ताज सिटी सेंटर में आयोजित "बिहार कैंसर कॉन्क्लेव -2026" का रविवार को समापन हो गया। दो दिवसीय कॉन्क्लेव के अंतिम दिन मुंह और गले के कैंसर पर खास चर्चा हुई और शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। अंतिम दिन इस कैंसर के इलाज में विभिन्न माध्यमों व विधि से हुए इलाज पर मंथन हुआ।
अंतिम दिन बेस्ट शोध पत्र प्रस्तुत करनेवाले डॉक्टरों को सम्मानित किया गया। मुम्बई के डॉ. एस.एच.आडवानी, दिल्ली के डॉ. विनीत तलवार, जमशेदपुर के डॉ. तामोजीत चौधरी और हैदराबाद के डॉ. दीपक कोपक्का ने कैंसर के इलाज के बारे में बेहद महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। इस कॉन्क्लेव में 300 से ज्यादा डॉक्टर ने हिस्से लिया जिसमें 75 डॉक्टर दूसरे राज्य से आए थे। मुंह और गले के कैंसर के चर्चित डॉक्टर मुम्बई के डॉ. अनिल डीक्रूज भी शामिल रहे।
समापन सत्र में पारस एचएमआरआई हॉस्पिटल के *एचओडी और डायरेक्टर मेडिकल ओंकोलॉजी डॉ. अभिषेक आनंद* ने अतिथियों का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से तय हो गया कि बिहार में भी कैंसर के लिए बड़ा कॉन्क्लेव कर सकते और शोध को साझा कर सकते हैं। इस कार्यक्रम से यह भी तय हो गया कि बिहार में कैंसर के इलाज के लिए अच्छी सुविधा मौजूद है। कार्यक्रम के संयोजन और संपन्न कराने में पारस एचएमआरआई हॉस्पिटल के *जोनल डायरेक्टर अनिल कुमार* की प्रमुख भूमिका रही। उन्होंने कहा कि पारस एचएमआरआई कैंसर सहित हर तरह के मर्ज के बेहतर और उन्नत इलाज मुहैया कराने के लिए दिन रात लगा हुआ है। हमलोग बिहार सरकार के साथ मिलकर भी इस दिशा में काम कर रहे हैं। हमलोग हर साल इस तरह के कॉन्क्लेव का आयोजन करते रहेंगे।

*पारस एचएमआरआई के बारे में* 
पारस एचएमआरआई पटना ने 2013 में परिचालन शुरू किया। यह बिहार का पहला कॉर्पोरेट अस्पताल है जिसके पास परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड द्वारा लाइसेंस प्राप्त कैंसर उपचार केंद्र है। जून 2024 में एक्सेस किए गए एनएबीएच पोर्टल के अनुसार, पारस एचएमआरआई अस्पताल, पटना 2016 में एनएबीएच मान्यता प्राप्त करने वाला बिहार का पहला अस्पताल था। इस अस्पताल की बेड क्षमता 400 से ज्यादा की है, जिसमें 80 आईसीयू बेड शामिल हैं साथ ही 2 LINAC मशीन एंव PET-CT की सुविधा भी उपलब्ध है।

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