पटना में बुजुर्गों की देखभाल की बढ़ती लागत के साथ जलवायु और नीतिगत चिंताएं बनी बड़ी चुनौती: आदित्य बिरला सन लाइफ इंश्योरेंस का अ-निश्चित इंडेक्स 2.0

पटना में बुजुर्गों की देखभाल की बढ़ती लागत के साथ जलवायु और नीतिगत चिंताएं बनी बड़ी चुनौती: आदित्य बिरला सन लाइफ इंश्योरेंस का अ-निश्चित इंडेक्स 2.0

पटना: भारत में वित्तीय दबाव, स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं, कार्य-जीवन की चुनौतियों और व्यापक सामाजिक जोखिमों के कारण अनिश्चितता का स्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है। राष्ट्रीय अ-निश्चित इंडेक्स 79 है, जो यह दर्शाता है कि वित्तीय तैयारी, स्वास्थ्य खर्च, मानसिक संतुलन और दीर्घकालिक स्थिरता को लेकर लोगों की चिंताएं बनी हुई हैं।

पटना में अ-निश्चीत इंडेक्स 85 दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय और ईस्ट ज़ोन दोनों के औसत से अधिक है और यह शहर में बढ़ी हुई चिंता को दर्शाता है। यहां अनिश्चितता का स्वरूप आर्थिक दबावों, नीतिगत फैसलों और जलवायु से जुड़े जोखिमों से मिलकर बनता है। प्रमुख चिंताओं में सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता को लेकर असमंजस, जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न व्यवधान और बुजुर्गों की देखभाल की बढ़ती लागत शामिल हैं।

वित्तीय तनाव को और बढ़ाने वाले कारणों में बढ़ती महंगाई से बचत का घटता मूल्य और सरकारी टैरिफ का घरेलू बजट पर पड़ने वाला असर प्रमुख हैं। इसके साथ ही अपराध, आय की अस्थिरता और सामाजिक शांति भंग होने की आशंका भी पटना के नागरिकों की चिंता को और गहरा कर रही है।

सामाजिक-आर्थिक विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि जैसे-जैसे व्यक्ति एसईसी श्रेणी में नीचे जाता है, अनिश्चितता का स्तर बढ़ता जाता है। एसईसी-बी और एसईसी-सी वर्ग में चिंता एसईसी-ए की तुलना में अधिक पाई गई। अन्य शहरों के विपरीत, पटना में अधिक बीमा कवरेज या ज्यादा निवेश साधन होने से अनिश्चितता कम नहीं हुई। बल्कि बीमा पॉलिसियों और निवेश साधनों की संख्या बढ़ने के साथ अनिश्चितता का स्तर भी बढ़ता दिखाई दिया, जिससे संकेत मिलता है कि वित्तीय जटिलता स्वयं तनाव का कारण बन रही है।

जनसांख्यिकीय दृष्टि से पुरुषों में अनिश्चितता का स्तर थोड़ा अधिक पाया गया। आयु वर्ग में बेबी बूमर्स और मिलेनियल्स में चिंता अधिक दर्ज की गई, जबकि जेनरेशन-ज़ेड में सबसे कम अनिश्चितता देखी गई। पेशे के आधार पर अनिश्चितता में कोई बड़ा अंतर नहीं पाया गया। जीवन-चरण के अनुसार, विवाहित व्यक्तियों—विशेषकर बच्चों वाले परिवारों—में अनिश्चितता अधिक रही, जबकि अविवाहित लोग अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं।

कुल मिलाकर, पटना के निष्कर्ष उन जोखिमों के मिश्रण को दर्शाते हैं जो बड़े पैमाने पर व्यक्ति के नियंत्रण से बाहर हैं—जैसे नीतिगत बदलाव, जलवायु व्यवधान और आर्थिक अस्थिरता—साथ ही व्यक्तिगत वित्तीय दबाव भी इसमें शामिल हैं। जब वैश्विक, स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े जोखिम जीवन के विभिन्न चरणों में एक-दूसरे से जुड़ते जाते हैं, तब भविष्य की ठोस योजना बनाना और उपयुक्त सुरक्षा कवच सुनिश्चित करना दीर्घकालिक आत्मविश्वास बनाने के लिए अनिवार्य हो जाता है।

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