बिहार में घरेलू कामगारों की सामाजिक सुरक्षा पर रिपोर्ट जारी, योजनाओं तक पहुंच आसान बनाने पर दिया गया जोर
- बिहार में 46.5 लाख घरेलू कामगारों का ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण, 80% महिलाएं; कल्याण के लिए विभाग कर रहा प्रयास : श्रमायुक्त
पटना: बिहार सरकार के सहयोग से 29 अक्टूबर 2026 को पटना स्थित होटल मौर्य, गांधी मैदान में घरेलू कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा को सुलभ और सशक्त बनाने पर आधारित रिपोर्ट जारी की गई। इस रिपोर्ट का विषय “Making Social Protection Available and Accessible for Domestic Workers: A Case Study of Bihar” है। कार्यक्रम में बिहार सरकार के श्रमायुक्त बिहार, राजेश भारती, नई दिल्ली स्थित यूएन वीमेन की कनु प्रिया, भारत सरकार के वी.वी. गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान की फेलो एवं तकनीकी विशेषज्ञ एलिना सामंतराय तथा अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO), नई दिल्ली की वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी दिव्या वर्मा सहित संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हुए। इस पहल का उद्देश्य बिहार में घरेलू कामगारों तक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पहुंच और उनकी उपलब्धता से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना है।
उक्त अवसर पर श्रमायुक्त श्री राजेश भारती ने बताया कि घरेलू कामगार असंगठित क्षेत्र के ऐसे श्रमिक हैं, जो घरों में साफ-सफाई, खाना बनाने, कपड़े धोने एवं इस्त्री करने, बच्चों की देखभाल, बुजुर्गों एवं बीमार व्यक्तियों की सेवा, बागवानी, घरेलू वाहन चलाने तथा अन्य घरेलू कार्यों के माध्यम से समाज और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इसके बावजूद, लंबे समय तक इस कार्यक्षेत्र को औपचारिक रोजगार व्यवस्था में अपेक्षित पहचान और संरक्षण की समस्या रहती है। अधिकांश घरेलू कामगारों का रोजगार अनौपचारिक प्रकृति का है तथा उनके पास लिखित नियोजन अनुबंध का अभाव रहता है।
उन्होंने कहा कि ई-श्रम पोर्टल के आँकड़ों में बिहार के लगभग 46.5 लाख घरेलू कामगारों का उल्लेख है। इनमें लगभग 80 प्रतिशत महिलाएँ हैं, जिनमें बड़ी संख्या वंचित एवं कमजोर सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आती है। इस कड़ी में विभाग द्वारा उनके कल्याण के लिए कई प्रयास किये गये है।
बिहार सरकार द्वारा घरेलू कामगारों सहित असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए बिहार शताब्दी असंगठित क्षेत्र कामगार एवं शिल्पकार सामाजिक सुरक्षा योजना एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य श्रमिकों और उनके परिवारों को मृत्यु, दुर्घटना, दिव्यांगता तथा गंभीर बीमारी जैसी परिस्थितियों में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। यह योजना घरेलू कामगारों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि घरेलू कार्य के दौरान दुर्घटना, चोट अथवा अन्य गंभीर परिस्थितियों के कारण उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में आर्थिक सहायता से कामगार और उनके परिवार को कठिन समय में राहत मिलती है।
बिहार के अनेक श्रमिक रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते हैं। इनमें घरेलू कामगार भी शामिल हैं। दूसरे राज्य में कार्य करते समय दुर्घटना होने पर श्रमिक और उसके परिवार को आर्थिक तथा प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार की प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना, 2008 महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
घरेलू कामगारों के हित में बिहार सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम उन्हें न्यूनतम मजदूरी संबंधी व्यवस्था के अंतर्गत लाना है। घरेलू कामगारों के कार्य का मूल्यांकन केवल परंपरागत घरेलू सेवा के रूप में नहीं, बल्कि श्रम के रूप में किया जाना आवश्यक है। न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण इस दिशा में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है। बिहार सरकार द्वारा घरेलू कामगारों की न्यूनतम मजदूरी में अप्रैल 2025 में अक्टूबर 2024 में अधिसूचित दरों की तुलना में 17 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। इसमें अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के PRS प्रोजेक्ट के अंतर्गत किए गए प्रयासों का भी योगदान है।
उन्होंने बताया कि घरेलू कामगारों की एक बड़ी समस्या यह है कि वे प्रायः अलग-अलग घरों में काम करते हैं। इस कारण उनके लिए अपनी समस्याओं को सामूहिक रूप से उठाना कठिन हो सकता है। व्यक्तिगत स्तर पर नियोक्ता से मजदूरी, कार्य के घंटे या अन्य शर्तों के संबंध में बातचीत करने की उनकी क्षमता भी सीमित हो सकती है। औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के अंतर्गत घरेलू कामगारों के लिए ट्रेड यूनियन बनाने, सामूहिक सौदेबाजी करने और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार प्राप्त है।
असंगठित कामगारों, जिनमें घरेलू कामगार भी शामिल हैं, के लिए समर्पित हेल्पलाइन नंबर 155214 स्थापित किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य कामगारों की शिकायतों को सामने लाने और उनके समाधान की प्रक्रिया को सुगम बनाना है।
उन्होंने कहा कि आगे की आवश्यकता यह है कि योजनाओं का लाभ पात्र कामगारों तक प्रभावी ढंग से पहुँचे, पंजीकरण और जागरूकता का विस्तार हो, शिकायतों का समयबद्ध समाधान किया जाए तथा रोजगार की शर्तों में पारदर्शिता सुनिश्चित हो। इन प्रयासों के साथ घरेलू कामगारों के लिए स्पष्ट नीतिगत ढाँचा और प्रभावी क्रियान्वयन व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिससे बिहार में घरेलू कामगारों की आर्थिक सुरक्षा, सामाजिक प्रतिष्ठा और कार्यस्थल पर गरिमा को मजबूत आधार मिले।
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