श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में आइसा-आरवाईए का ‘GENZ Rising’ कार्यक्रम आयोजित
*बिहार के लोगों को धन्यवाद देती हूं कि जंतर मंतर के आंदोलन को ताकत दी– नेहा*
*बीपीएससी 70वीं परीक्षा में धांधली और दरोगा भर्ती परीक्षा सहित अन्य परीक्षा में हुई में अनियमितताओं के सवाल पर जवाब दे सम्राट चौधरी– नेहा*
*जंतर मंतर आंदोलन के मुकदमे वापस हो सकते हैं तो किसान आंदोलन और शाहीन बाग आंदोलन के मुकदमे भी वापस हो– दीपंकर भट्टाचार्य*
*युवा पीढ़ी के सवालों, आंदोलन और प्रतिरोध की आवाज़ बना कार्यक्रम*
पटना के श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में आइसा और आरवाईए के संयुक्त तत्वावधान में ‘GENZ Rising’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-युवा, GEN Z और GEN Alpha के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य देश और बिहार के युवाओं के सामने मौजूद शिक्षा, रोजगार, लोकतंत्र, पुलिस दमन और आंदोलन से जुड़े सवालों को सामने लाना था।
कार्यक्रम को भाकपा माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य एवं आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा जंतर-मंतर आंदोलन की चर्चित चेहरा नेहा बोरा ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया।
बिहार में चर्चित जेन अल्फा आदित्य कुमार ने भी संबोधित किया और अपनी बात कही।
*कार्यक्रम चार सत्रों में हुआ आयोजित*
*पहला सत्र — ‘जुल्म फिर जुल्म है, बढ़ता है तो मिट जाता है’*
पहले सत्र में पुलिस दमन, आंदोलन और संघर्ष के अपने अनुभवों को युवाओं ने साझा किया। इस सत्र में विशाल, जो पुलिस बर्बरता के शिकार रहे हैं, ने अपने अनुभव रखे। आरिफ, जो सिवान में पुलिसिया गोलीबारी के शिकार हुए, ने भी अपनी बात रखी।
वहीं सबा, जो आंदोलन के दौरान जेल गईं और पटना विश्वविद्यालय की छात्र नेता हैं, ने आंदोलन के अनुभवों और जेल में बिताए समय को साझा किया। नवीन, जहानाबाद में NEET परीक्षा से जुड़ी पीड़िता के पिता, ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा व्यवस्था की चुनौतियों पर अपनी बात रखी।
इस सत्र में नवादा के स्कूली छात्रों सहित बड़ी संख्या में GEN Z और GEN Alpha के युवाओं ने भी अपनी बात रखी और मौजूदा सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों पर सवाल उठाए।
*दूसरा सत्र — ‘आंदोलन की आवाज़’*
दूसरे सत्र में छात्र-युवा आंदोलनों और उनके संघर्षों पर चर्चा हुई। सत्र को चिंटू कुमारी, प्राध्यापक एवं विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 के आंदोलन की नेता; संदीप सौरभ, विधायक, पालीगंज एवं छात्रों-युवाओं के सवालों पर मुखर आवाज; अजीत कुशवाहा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आरवाईए; हबीबा, JPSC आंदोलन, झारखंड की प्रमुख नेता; तथा इरफान, जंतर-मंतर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल, ने संबोधित किया।
सत्र को संबोधित करते हुए प्राध्यापक चिंटू कुमारी ने विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 के आंदोलन की नेता ने सरकार के मंशा पर सवाल उठाए और नए विश्वविद्यालय अधिनियम निरस्त करने की मांग की।
जंतर-मंतर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में एक इरफान ने सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी मेहनतकश लोग हैं और देश हमसे चलता है। उन्होंने छात्र नौजवानों के पक्ष में कविता भी पढ़ी। उन्होंने कहा कि
पालीगंज विधयाक संदीप सौरभ ने सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार के लोग पूछ रहे हैं सरकार से कि आखिर ऐसी कौन पढ़ाई चल रही है जिससे कि 6 क्लास के बच्चे 2 क्लास की किताब नहीं पढ़ पा रहे हैं। बिहार शिक्षा का बजट कम कर दिया गया। विद्यालयों के पास भवन नहीं हैं। सवाल पूछने वाले लोगों को जेल में भेज दिया जा रहा है।
झारखंड आंदोलन की नेता हबीबा ने सत्र को संबोधित करते हुए झारखंड आंदोलन का अनुभव रखा एवं बिहार के छात्र युवाओं के आन्दोलन के साथ एकजुटता प्रदर्शन किया।उन्होंने कहा कि बिहार के छात्र युवा आज लड़ रहे हैं। गरीब पृष्ठभूमि के छात्र वर्षों तैयारी करते हैं,और जब परीक्षा होती है उनके हिस्से आता है पेपर लीक। वक्ताओं ने कहा कि छात्र-युवा आंदोलनों ने हमेशा देश में बदलाव की लड़ाई को नई दिशा दी है। शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल पर युवाओं की एकजुटता आने वाले समय में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
आरवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा ने कार्यक्रम को संबोधित किया और कहा कि बिहार छात्र नौजवान लगातार संघर्ष कर रहे हैं लेकिन ये सरकार सुन रही है। उनकी मांगो को मांगने के बजाए लाठियां बरसा रही है।
कार्यक्रम के अंतिम सत्र को व्यंग्यकार एवं प्रोफेसर डॉ. मेडुसा ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज जरूरत है सोशल मीडिया पर सही चीज़ों को प्रसारित करने का। और युवाओं को आंदोलन को आगे बढ़ाने का।
*आइसा राष्ट्रीय महासचिव नेहा ने कार्यक्रम को संबोधित किया उन्होंने बिहार के लोगों को धन्यवाद देते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को बिहार की जनता ने ताकत दी। उन्होंने भाजपा एवं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधा और कहा कि आंदोलन के दौरान सम्राट सरकार के दमन का चेहरा भी सामने आया, लेकिन साथ ही सरकार की नीतियों और दमन के खिलाफ संघर्ष करने का एक मजबूत उदाहरण भी देश के सामने बिहार ने पेश किया
उन्होंने कहा कि बिहार में आंदोलनकारी छात्रों और उनके परिवारों को भी दमन का सामना करना पड़ा। आदित्य जैसे छात्रों के पिता के साथ मारपीट की गई, आइसा नेत्री सबा आफरीन के साथ ज्यादती की गई और उन्हें उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर प्रताड़ित किए जाने के आरोप सामने आए। छात्रों को अपराधियों की तरह पेश करते हुए उनके चेहरे अखबारों में प्रचारित किए गए।
उन्होंने कहा कि बिहार की जनता और खासकर छात्र-युवा इन तमाम सवालों का हिसाब जरूर लेंगे। छात्रों पर हुए दमन का हिसाब लिया जाएगा, बिहार में छात्राओं और महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा और बलात्कार की घटनाओं पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। SIR की प्रक्रिया में लोगों के मताधिकार और नागरिकता से जुड़े सवालों पर पैदा हुई चिंताओं का भी जवाब देना होगा।
उन्होंने कहा कि बिहार के छात्रों को बीपीएससी 70वीं परीक्षा में धांधली और दरोगा भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं के सवाल पर भी जवाब चाहिए। छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली हर अनियमितता का हिसाब लिया जाएगा।
उन्होंने बिहार के छात्रों और युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों, शिक्षा, रोजगार, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के सवालों पर एकजुट हों। अब समय आ गया है कि बिहार का छात्र-युवा आंदोलन दमन, अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत जनआंदोलन का रूप ले और सरकार से हर सवाल का जवाब मांगे।
*दीपंकर भट्टाचार्य का संबोधन*
भाकपा-माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि GENZ का मतलब केवल एक पीढ़ी नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष और अपने हक की लड़ाई है। आज युवाओं के सामने शिक्षा, रोजगार, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और सम्मान के सवाल सबसे बड़े सवाल हैं। ‘स्कूल ठीक करो’ आंदोलन को बिहार में एक व्यापक जनआंदोलन बनाने की जरूरत है। वन नेशन वन इलेक्शन की बात करने वाले लोग वन नेशन वन एजुकेशन सिस्टम की बात क्यों नहीं करते हैं। कॉमन स्कूल सिस्टम की लड़ाई छात्र युवा लड़ेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि कहा कि पिछले 20 वर्षों में बिहार की स्कूल शिक्षा व्यवस्था को सबसे ज्यादा बर्बाद किया गया है। स्कूलों की आधारभूत संरचना, शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता लगातार सवालों के घेरे में है। सरकार ने विद्यालयों के नाम बदलने और उन्हें उत्क्रमित करने की घोषणा तो की, लेकिन उनकी वास्तविक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उत्क्रमित विद्यालय आज भी उपेक्षा और बदहाली का शिकार हैं, उत्क्रमित नहीं उत्पीड़ित विद्यालय बनाए गए हैं बिहार में।वहीं विश्वविद्यालय भी गंभीर संकट से गुजर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल छात्रों और शिक्षकों का सवाल नहीं, बल्कि पूरे बिहार के भविष्य का सवाल बनाना होगा। बिहार के हर व्यक्ति से अपील है कि शिक्षा के सवाल को जनआंदोलन बनाएं। बेहतर स्कूल, पर्याप्त शिक्षक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सभी के लिए समान शिक्षा व्यवस्था के लिए व्यापक संघर्ष खड़ा करना होगा।
उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में देश में सोशल मीडिया के जरिए लड़कियों और युवाओं को निशाना बनाने की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इंस्टग्राम पर आ के आंदोलन और उसकी भाषा का जिक्र करते हुए कहा कि यह कल्चरल शॉक था उनके लिए । उनका यह बयान एक तरह का उकसावा था, जिसने गुंडागर्दी और हिंसा की ताकतों को प्रोत्साहित किया। इसका असर सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक देखने को मिला। रुचिका सिंह जैसी युवतियों की पीड़ा सामने आई, जिन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के इस बयान ने उनका जीवन नर्क बना दिया ।
दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि 15 अगस्त को युवाओं और आंदोलनकारियों को ‘दिमागी नक्सल’ कहकर निशाना बनाना भी इसी उकसावे की राजनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पुराने जुमलों की राजनीति अब खत्म हो रही है और युवाओं के सवालों का जवाब दमन और बदनाम करने की कोशिश से नहीं दिया जा सकता। बंगाल में स्कूल आंदोलन में शामिल युवक के पिता के साथ हुई हिंसा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के उकसावे वाले बयानों का ही हिस्सा है। प्रधानमंत्री मोदी 15 अगस्त को लाल किले से से वॉलेंटियर फोर्स बनाने की बात कह रहे थे, उनका वॉलिंटियर फोर्स वही गुंडे हैं जो आंदोलनों में व्यवधान उत्पन्न करते हैं और लोगों को पीटते हैं।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केस खत्म करने की बात कही स्वागतयोग्य है। जंतर मंतर आंदोलन के मुकदमे वापस हो सकते हैं तो किसान आंदोलन और शाहीन बाग आंदोलन के मुकदमे भी वापस हो।
0 Response to "श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में आइसा-आरवाईए का ‘GENZ Rising’ कार्यक्रम आयोजित"
एक टिप्पणी भेजें