बिहार में सतत एवं सुव्यवस्थित शहरी विकास को लेकर कार्यशाला का आयोजन
*आज की प्लानिंग तय करेगी कल के बिहार के शहरों का स्वरूप*
: - *नीतीश मिश्रा*
पटना, 02 सितंबर 2026
अधिवेशन भवन, पटना के सभागार में हडको (HUDCO) के सहयोग से “सस्टेनेबल प्लानिंग फॉर टाउन्स इन बिहार : अंडरस्टैंडिंग द प्रोसेस एंड एड्रेसिंग द चैलेंजेज" विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री श्री नीतीश मिश्रा ने की।
कार्यशाला में बिहार के नगरों के समावेशी, सुव्यवस्थित एवं सतत विकास के लिए प्रभावी शहरी नियोजन की प्रक्रिया, उसकी आवश्यकताओं तथा वर्तमान चुनौतियों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। साथ ही, शहरी नियोजन को अधिक प्रभावी एवं व्यावहारिक बनाने के लिए संभावित समाधानों और भविष्य की कार्ययोजना पर भी चर्चा की गई।
मंत्री ने कहा कि शहरों का विकास केवल बेहतर आवास और जीवन की सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि विकसित शहर राज्य की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण ग्रोथ सेंटर भी बनते हैं। उन्होंने कहा कि सुव्यवस्थित एवं सुविधायुक्त शहर निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मंत्री श्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी का स्पष्ट विजन है कि बिहार के सभी शहर चरणबद्ध रूप से विकास एवं आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हों और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करें। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हमें तात्कालिक आवश्यकताओं तक सीमित न रहते हुए दीर्घकालिक दृष्टिकोण, दूरदर्शी सोच और सुनियोजित शहरी विकास को प्राथमिकता देनी होगी।
उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस कार्यशाला को केवल अकादमिक अभ्यास न मानें, बल्कि इसे बेहतर नियोजन, प्रभावी क्रियान्वयन और बेहतर शहरों के निर्माण के लिए नई प्रतिबद्धता के अवसर के रूप में लें। उन्होंने HUDCO के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके अनुभव और विशेषज्ञता से अधिकतम लाभ उठाया जाना चाहिए। अधिकारियों को विशेषज्ञों से संवाद करने, प्रश्न पूछने तथा एक-दूसरे की बेस्ट प्रैक्टिस से सीखने की आवश्यकता है।
श्री मिश्रा ने कहा कि बिहार के नगर विकास की जिम्मेदारी संभाल रही युवा टीम पर उन्हें पूरा विश्वास है। उन्होंने कहा कि आज लिए गए निर्णय बिहार की आने वाली पीढ़ियों के शहरों का स्वरूप तय करेंगे। हमारा लक्ष्य ऐसे शहरों का निर्माण होना चाहिए, जो दूरदर्शी नियोजन के साथ विकसित हों, जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ें और बिहार के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करें।
नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव श्री विनय कुमार ने कहा कि बिहार में शहरी विकास को नियोजित और टिकाऊ बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों तथा जीआईएस आधारित प्लानिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। अधिकारियों को साक्ष्य आधारित योजना तैयार करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान बनाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
उन्होंने आगे बताया कि राज्य में 12 नए सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। इसके लिए हुडको के साथ एक लाख करोड़ रुपये के लाइन ऑफ क्रेडिट का समझौता किया गया है। वहीं राज्य के 43 शहरों के मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं।
हडको के अध्यक्ष श्री संजय कुलश्रेष्ठ ने कहा कि देश में शहरी आबादी तेजी से बढ़ रही है और वर्ष 2040 तक शहरी क्षेत्रों की आबादी लगभग दोगुनी होकर 80 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में भविष्य के शहरों को केवल विस्तारित करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें जलवायु परिवर्तन और आपदाओं के लिहाज से भी मजबूत बनाना होगा। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन,अमृत , प्रधानमंत्री आवास योजना-2 जैसी योजनाओं और अर्बन चैलेंज फंड का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से स्वच्छता, जलापूर्ति, सीवेज तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास को गति दी जा सकती है।
दिल्ली विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. एन. श्रवण कुमार ने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार देश के सबसे कम शहरीकृत राज्यों में शामिल है। हालांकि, आर्थिक विकास और रोजगार के बेहतर अवसरों के लिए शहरीकरण को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने दिल्ली और जमशेदपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि अनियोजित विकास के बाद शहरों में रेट्रोफिटिंग करना काफी खर्चीला और मुश्किल होता है। इसलिए शुरुआत से ही नियोजित विकास पर जोर देना होगा। स्थानीय हितधारकों के साथ चर्चा कर शहरों को अधिक ‘लिवेबल’ बनाने की दिशा में काम किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को बेहतर अवसरों के लिए पलायन न करना पड़े।
कार्यशाला के दौरान मास्टर प्लान की आवश्यकता, उसके कानूनी प्रावधानों एवं प्रभावी शहरी नियोजन की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। नगरों एवं शहरों की विशिष्ट विशेषताओं और स्थानीय चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उनके अनुरूप विकास योजनाएं तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही, वर्तमान स्थिति के आकलन, भविष्य की संभावनाओं एवं नियोजन प्रस्तावों के लिए आवश्यक जनसांख्यिकीय, आर्थिक एवं स्थानिक आंकड़ों के संकलन, विश्लेषण एवं उपयोग की जानकारी दी गई। प्रस्तावित भू-उपयोग मानचित्र तथा टाउन प्लानिंग स्कीम तैयार करने के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई।
कार्यशाला में शहरी नियोजन में तकनीक एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग की संभावनाओं को रेखांकित किया गया। स्थानीय परिस्थितियों एवं आवश्यकताओं के अनुरूप समावेशी और संवेदनशील नियोजन विकसित करने तथा मास्टर प्लान के प्रस्तावों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदमों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
इस कार्यशाला में विभाग के सचिव श्री संदीप कुमार आर. पुडकलकट्टी, सचिव- सह- बुडको एम डी श्री अनिमेष कुमार पराशर, बिहार हाउसिंग बोर्ड के प्रबंध निदेशक- सह- विशेष सचिव श्री निलेश रामचंद्र देवरे, अपर सचिव श्री मनोज कुमार, हडको की कार्यकारी निदेशक सुश्री वर्षा पुन्हानी समेत विभिन्न नगर निगम/ नगर निकायों के नगर आयुक्त/ नगर कार्यपालक पदाधिकारी, अर्बन प्लानर्स, आर्किटेक्ट्स सहित विभाग के पदाधिकारीगण मौजूद रहे।
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