बेंगलुरु में गूंजा बिहार का गौरव - माटी की खुशबू से सराबोर हुआ आर्ट ऑफ लिविंग परिसर

बेंगलुरु में गूंजा बिहार का गौरव - माटी की खुशबू से सराबोर हुआ आर्ट ऑफ लिविंग परिसर

सुरेन्द्र कुमार रंजन, बेंगलुरु, 07 सितम्बर ::

बिहार की हजारों वर्ष पुरानी ज्ञान, संस्कृति, कला और आध्यात्मिक विरासत ने कर्नाटक की धरती पर अपनी ऐसी छटा बिखेरी कि पूरा आर्ट ऑफ लिविंग परिसर बिहार की माटी की खुशबू से सराबोर हो उठा। 3 से 6 सितंबर तक आयोजित चार दिवसीय बिहार महोत्सव 2026 में लोकगीतों की मिठास, लोकनृत्यों की थिरकन, मधुबनी चित्रकला की रंगीन दुनिया और बिहार के पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू ने प्रवासी बिहारियों को अपनी जन्मभूमि से भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। हजारों लोगों की मौजूदगी में सम्पन्न हुआ यह महोत्सव न केवल बिहार की सांस्कृतिक विरासत का उत्सव बना, बल्कि देशभर में बिहार की गौरवशाली पहचान को नए अंदाज में प्रस्तुत करने का प्रभावी मंच भी साबित हुआ।

महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर जी महाराज, बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी, बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार और बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने श्री श्री रविशंकर जी महाराज को बिहार की पहचान से जुड़े मखाने की माला, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। गुरुदेव ने भी अंगवस्त्र भेंटकर मुख्यमंत्री को सम्मानित किया। इस आत्मीय मिलन ने महोत्सव के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप को और गहरा कर दिया। मुख्यमंत्री ने बिहार महोत्सव के आयोजन की स्वीकृति देने के लिए श्री श्री रविशंकर जी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बिहारवासियों के लिए यह बड़े गौरव की बात है कि गुरुदेव ने अपने आश्रम में बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत करने का अवसर दिया। यह आयोजन बिहार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार ने सदियों से देश और दुनिया को ज्ञान, करुणा, दर्शन और अहिंसा का संदेश दिया है। यह ऐतिहासिक और गौरवशाली धरती रही है। आज आवश्यकता है कि बिहार के लोग अपनी कर्मभूमि के साथ-साथ अपनी जन्मभूमि के विकास में भी योगदान दें। बिहार समृद्ध होगा, तभी विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में और मजबूती मिलेगी। उन्होंने श्री श्री रविशंकर जी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने 45 वर्षों से अधिक समय से दुनिया को जीवन जीने की नई दिशा दी है। सुदर्शन क्रिया के माध्यम से करोड़ों लोगों को स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवन की राह दिखाने में गुरुदेव का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
श्री श्री रविशंकर जी महाराज ने बिहार की लोक परंपराओं और लोक संस्कृति की प्रशंसा करते हुए कहा कि बिहार सदियों से कला, संस्कृति, साहित्य और आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र रहा है। उन्होंने बिहारवासियों से अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रखने तथा बिहार को समृद्ध बनाने में सक्रिय योगदान देने की अपील की। मधुबनी कला की विशेष प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार महोत्सव में देश की विविधता की सुंदर झलक दिखाई दे रही है। विभिन्न पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत होती है और देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लोग एक-दूसरे की संस्कृति से जुड़ते हैं।
बिहार के लोक कलाकारों ने पारंपरिक लोकनृत्यों की दमदार प्रस्तुति देकर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। प्रसिद्ध भोजपुरी गायिका कल्पना के लोकगीतों ने भी महोत्सव में रंग जमा दिया। लोगों ने उनके गीतों का जमकर आनंद लिया।

कार्यक्रम का संचालन बिहार के चर्चित उद्घोषक शैलेश कुमार ने अपने प्रभावशाली अंदाज में किया। उन्होंने बिहार के इतिहास, संस्कृति और गौरव से जुड़े रोचक एवं ज्ञानवर्धक प्रसंगों को अपनी मधुर वाणी में प्रस्तुत कर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। उनकी प्रस्तुति से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ही नहीं, बल्कि स्वयं श्री श्री रविशंकर जी महाराज ने भी खड़े होकर तालियां बजाईं और उनका उत्साह बढ़ाया।

महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने आर्ट ऑफ लिविंग परिसर स्थित गौशाला, गुरुकुल और साधना स्थल का भ्रमण किया। गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना कर बिहारवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने महोत्सव में लगाए गए बिहार के पारंपरिक व्यंजनों, मधुबनी पेंटिंग और अन्य सांस्कृतिक उत्पादों के स्टॉलों का अवलोकन किया।

चार दिनों तक चले इस आयोजन ने बेंगलुरु में रहने वाले प्रवासी बिहारियों को अपनी जन्मभूमि, भाषा, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का काम किया। मंत्रियों, विधायकों और हजारों लोगों की मौजूदगी में सम्पन्न बिहार महोत्सव 2026 इस संदेश के साथ यादगार बन गया कि बिहार की संस्कृति जहां भी पहुंचती है, वहां अपनी मिट्टी की पहचान और अपनापन छोड़ जाती है।
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