आरएनएसआईटी की रजत जयंती पर टॉपरों को मिले स्वर्ण पदक
सुरेन्द्र कुमार रंजन, बेंगलुरु, 09 सितम्बर ::
आरएनएस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (RNSIT), बेंगलुरु ने रविवार को अपने आरआर नगर स्थित डॉ. आर. एन. शेट्टी सभागार में प्रथम वर्ष बी.ई. कक्षाओं के शुभारंभ के साथ आरएनएस गोल्ड मेडल पुरस्कार समारोह का आयोजन किया। वर्ष 2001 में स्थापित संस्थान की रजत जयंती स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित यह समारोह विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए विशेष रहा। विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (VTU), बेलगावी से संबद्ध, एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त और NAAC A+ ग्रेड प्राप्त स्वायत्त संस्थान आरएनएसआईटी में विभिन्न इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। इसी को देखते हुए कार्यक्रम को दो सत्रों में आयोजित किया गया।
सुबह के सत्र में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, सीएसई-साइबर सुरक्षा, इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग तथा सिविल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस अवसर पर एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज, बेंगलुरु के ग्लोबल हेड, ग्लोबल इंजीनियरिंग एकेडमी डॉ. पी. बी. कोटूर मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने संस्थान की 25वीं वर्षगांठ पर बधाई देते हुए देश के जवानों और किसानों के योगदान को नमन किया। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने सफलता के छह महत्वपूर्ण मंत्र बताए, साहसी बनना, जिज्ञासा बनाए रखना, आध्यात्मिक एवं आंतरिक संतुलन विकसित करना, ज्ञान को वास्तविक समस्याओं के समाधान में बदलना, नकारात्मक मानसिकताओं से बचना तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में निरंतर सीखते रहना। उन्होंने विद्यार्थियों को बदलती तकनीकी दुनिया के अनुरूप स्वयं को लगातार विकसित करने की सलाह दी।
अपराह्न सत्र में सीएसई-एआई एवं एमएल, सीएसई-डेटा साइंस, कंप्यूटर साइंस एंड बिजनेस सिस्टम्स, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, ईसीई-वीएलएसआई डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी तथा मैकेनिकल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों ने भाग लिया। केंद्रीय विनिर्माण प्रौद्योगिकी संस्थान (CMTI), बेंगलुरु के निदेशक डॉ. नागहनुमैया मुख्य अतिथि थे। उन्होंने सर सी. वी. रमन जैसी महान वैज्ञानिक हस्तियों का उल्लेख करते हुए विज्ञान और इंजीनियरिंग के बीच के अंतर को समझाया। उन्होंने कहा कि नवाचार की शुरुआत किसी समस्या की पहचान से होती है। विद्यार्थियों को तकनीकी विकास में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और भारत में ही वैश्विक स्तर की तकनीक विकसित करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने अंतर-विषयक सहयोग को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, युवा भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं और बेंगलुरु वैश्विक स्तर के कई प्रभावशाली नवाचारों का केंद्र बन चुका है।
समारोह का सबसे आकर्षक क्षण विभिन्न शाखाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को आरएनएस गोल्ड मेडल प्रदान करना रहा। मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में मानसा के (CSE), यामिनी सी (CSE-साइबर सुरक्षा), विजेता के. एम. (सिविल), रुद्रेश के. (EEE), संजना एम. और एच. लेयाश्री (CSE-AI & ML), लिखित गौड़ा (CSE-डेटा साइंस), चैत्रिका एम. (CSE-AI & DS), मेघना आर. (ECE), कार्तिक शांतावीर सुनादा (ME) और अदिति शेनॉय (ISE) शामिल रहे। इसके साथ ही शिक्षण क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले संकाय सदस्यों को भी शिक्षण उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में आरएनएसआईटी की उद्योग-केंद्रित रणनीति पर भी प्रकाश डाला गया। संस्थान के उद्योग संबंध प्रमुख डॉ. मुकेश पाटिल ने बताया कि ‘क्लासरूम से टेक्नोलॉजी तक’ की दूरी कम करने के उद्देश्य से आरएनएसआईटी ने कायनेस सेमीकॉन प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किया है। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में हुआ। यह पहल विद्यार्थियों को सेमीकंडक्टर और उभरती तकनीकों से जुड़े व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
समारोह में दो महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। सुबह के सत्र में शोध संकलन ‘RNS Book of Abstracts अन्वेषण’ और दोपहर के सत्र में कॉलेज पत्रिका ‘Apertura’ का विमोचन हुआ। इससे संस्थान में शोध, लेखन और रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता भी सामने आई। दोनों सत्रों में आरएनएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के सीईओ करन एस. शेट्टी, सीटीओ एवं एमआर मुरलीकृष्ण के. मैसूर तथा आरएन शेट्टी ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी सतीश आर. शेट्टी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में RNSIT के प्राचार्य डॉ. रमेश बाबू एच. एस. ने कहा कि संस्थान की वास्तविक ताकत उसका मानव संसाधन है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को केवल रोजगार पाने के लिए नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने और समाज की सेवा करने के लिए भी प्रेरित करें। रजत जयंती समारोह ने एक ओर संस्थान की 25 वर्षों की उपलब्धियों को रेखांकित किया, वहीं दूसरी ओर नई पीढ़ी के इंजीनियरों को नवाचार, तकनीकी दक्षता, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद प्रस्ताव और राष्ट्रगान के साथ हुआ।
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