बिहार में चौर भूमि का होगा कायाकल्प, मछली पालन से बढ़ेगी किसानों की आय
मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन शुरू, मिलेगा 50 प्रतिशत तक का अनुदान
योजना के तहत मछली पालन के साथ कृषि व बागवानी को मिलेगा बढ़ावा
चौर भूमि के उपलब्ध संसाधनों का होगा बेहतर उपयोग, उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर
पटना, 23 सितंबर।
बिहार सरकार राज्य में बेकार पड़ी चौर भूमि को उपयोगी बनाकर किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में पहल कर रही है। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए है। योजना के माध्यम से राज्य में बड़े पैमाने पर उपलब्ध निजी चौर भूमि को मत्स्य आधारित समेकित जलकृषि के लिए विकसित किया जाएगा, जिससे अव्यवहृत पडे़ चौर संसाधनों में मछली पालन के साथ-साथ कृषि, बागवानी एवं कृषि वानिकी को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसका उद्देश्य चौर भूमि में उपलब्ध जल एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना तथा किसानों की आय में वृद्धि करना है। इसके लिए लाभुक आधारित चौर विकास और उद्यमी आधारित चौर विकास मॉडल लागू किए जाएंगे।
50 प्रतिशत तक मिलेगा अनुदान
योजना के तहत एक हेक्टेयर क्षेत्र में दो तालाबों के निर्माण के लिए प्रति हेक्टेयर 8.88 लाख रुपये, चार तालाबों के निर्माण के लिए 7.32 लाख रुपये तथा एक तालाब के निर्माण एवं भूमि विकास के लिए 9.69 लाख रुपये की इकाई लागत निर्धारित की गई है। सभी वर्ग के लाभुकों को इकाई लागत का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। वहीं, उद्यमी आधारित चौर विकास के लिए 40 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है।
आवेदन के लिए इन दस्तावेजों की होगी जरूरत
व्यक्तिगत या समूह लाभुकों को स्व-अभिप्रमाणित दो पासपोर्ट आकार के फोटो, आधार कार्ड, जाति प्रमाण-पत्र तथा समूह में कार्य करने की सहमति से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। वहीं, उद्यमी लाभुकों को स्व-अभिप्रमाणित निबंधन प्रमाण-पत्र, पिछले तीन वर्षों का अंकेक्षण एवं आयकर रिटर्न, पैन कार्ड, जीएसटी, भू-स्वामित्व प्रमाण-पत्र और लीज एकरारनामा प्रस्तुत करना होगा।
मत्स्य प्रशिक्षण प्राप्त लाभुकों तथा मत्स्य आधारित उद्यम का अनुभव रखने वाले आवेदकों को चयन में प्राथमिकता दी जाएगी। योजना के लिए आवेदन मत्स्य निदेशालय की वेबसाइट fisheries.bihar.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन किया जा सकता है। इसके अलावा, अपने नजदीकी जिला मत्स्य कार्यालय में जाकर भी विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
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