डॉ. आनंद कुमार बोले - नीतीश कैबिनेट के फैसलों को सम्राट सरकार ने धरातल पर उतारा

डॉ. आनंद कुमार बोले - नीतीश कैबिनेट के फैसलों को सम्राट सरकार ने धरातल पर उतारा

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना, 13 सितम्बर ::

बिहार के नए और युवा अधिवक्ताओं के लिए राज्य सरकार की ओर से प्रतिमाह पांच हजार रुपये स्टाइपेंड देने की प्रक्रिया शुरू होने पर अधिवक्ता जगत में खुशी का माहौल है। जदयू विधि प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तथा पटना उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता डॉ. आनंद कुमार ने राज्य सरकार के इस महत्वपूर्ण निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री एवं जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया है।

डॉ. आनंद कुमार ने बताया कि 1 जनवरी 2024 के बाद बिहार स्टेट बार काउंसिल में पंजीकृत सभी पात्र युवा अधिवक्ताओं को तीन वर्षों तक प्रतिमाह पांच हजार रुपये का स्टाइपेंड दिए जाने की व्यवस्था की गई है। उनके अनुसार, यह निर्णय न्यायिक क्षेत्र में अपना करियर शुरू करने वाले युवा अधिवक्ताओं के लिए बड़ी राहत साबित होगा। शुरुआती दौर में अधिवक्ताओं को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में मिलने वाली यह सहायता उन्हें अपने पेशे को मजबूती से आगे बढ़ाने में मदद करेगी।

डॉ. आनंद कुमार ने कहा कि बिहार के विभिन्न न्यायालयों में प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ताओं की समस्याओं और उनकी मांगों को समझने के लिए उन्होंने पूरे बिहार के न्यायालयों का दौरा किया था। वर्ष 2025 में विधानसभा चुनाव से पूर्व उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष अधिवक्ताओं की समस्याओं को विस्तार से रखा था। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने उनके हित में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। अब वर्तमान सरकार द्वारा इन घोषणाओं को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।

डॉ. आनंद कुमार के अनुसार, अधिवक्ताओं के हित में तत्कालीन कैबिनेट द्वारा जिन प्रमुख प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी, उनमें युवा अधिवक्ताओं को प्रतिमाह पांच हजार रुपये स्टाइपेंड देने के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। इनमें प्रमुख हैं- नए अधिवक्ताओं को तीन वर्षों तक प्रतिमाह 5,000 रुपये स्टाइपेंड। प्रत्येक जिला न्यायालय में महिलाओं के लिए पिंक शौचालय की व्यवस्था। गंभीर बीमारी की स्थिति में अधिवक्ताओं के मुफ्त इलाज की व्यवस्था। अधिवक्ता कल्याण ट्रस्ट के माध्यम से अधिवक्ताओं के निधन पर एकमुश्त सहायता राशि। प्रत्येक न्यायालय में ई-लाइब्रेरी की स्थापना। इन योजनाओं को अधिवक्ता समुदाय के सामाजिक और पेशागत कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

डॉ. आनंद कुमार ने कहा कि नीतीश कुमार की कैबिनेट द्वारा अधिवक्ताओं के हित में लिए गए निर्णयों को वर्तमान एनडीए सरकार द्वारा मूर्त रूप दिया जा रहा है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और वर्तमान महाधिवक्ता एस.डी. संजय को बधाई एवं साधुवाद दिया। उन्होंने कहा कि युवा अधिवक्ताओं के लिए आर्थिक सहायता केवल वित्तीय सहयोग नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल है। जब नए अधिवक्ताओं को शुरुआती वर्षों में आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, तो वे अधिक समर्पण और आत्मविश्वास के साथ न्यायिक पेशे में अपनी भूमिका निभा सकेंगे।

डॉ. आनंद कुमार ने युवा अधिवक्ताओं की मांगों को समर्थन देने के लिए जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा, विधान परिषद में सत्तारूढ़ दल के उपनेता ललन सर्राफ तथा पूर्व महाधिवक्ता पी.के. शाही के प्रति भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता समाज की समस्याओं को सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से रखने और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास किए गए। सामूहिक प्रयासों का परिणाम अब सामने दिखाई दे रहा है।

डॉ. आनंद कुमार ने कहा कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनके कल्याण के लिए आर्थिक सहायता, बेहतर सुविधाएं, स्वास्थ्य सुरक्षा और आधुनिक न्यायिक संसाधनों की उपलब्धता आवश्यक है। ई-लाइब्रेरी जैसी व्यवस्था अधिवक्ताओं को कानून और न्यायिक निर्णयों से संबंधित आधुनिक संसाधनों तक आसानी से पहुंच उपलब्ध कराएगी। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा एएजी, जीपी, जीए एवं एससी पदों पर किए गए मनोनयन के लिए भी मौजूदा एनडीए सरकार को धन्यवाद दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि अधिवक्ता कल्याण से जुड़े शेष प्रस्तावों को भी शीघ्र धरातल पर उतारा जाएगा।

युवा अधिवक्ताओं के लिए पांच हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड की शुरुआत को बिहार के अधिवक्ता समुदाय ने नई उम्मीद के रूप में देखा है। सरकार के इस कदम से जहां नए अधिवक्ताओं को पेशे की शुरुआत में आर्थिक संबल मिलेगा, वहीं अधिवक्ता कल्याण से जुड़ी अन्य योजनाओं के लागू होने से न्यायिक व्यवस्था की आधारभूत सुविधाओं को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।                                                           —-------------

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