गांव के दलित, गरीबों और महिलाओं की बड़ी भागीदारी और दावेदारी के साथ खेग्रामस का दो दिवसीय 13–14 अगस्त अनशन/सत्याग्रह आंदोलन समाप्त हुआ
*पी पी एक्ट 1947 के तहत दलित वंचितों की बस्तियाँ नियमित नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा, राजधानी मेंहोगा महाजुटान- धीरेंद्र झा*
*तकरीबन 150 अंचलों/प्रखण्डों में हुए आंदोलन में लगभग 50 हजार गरीबों ने भाग लिया*
बुलडोजर राज के खिलाफ दलित गरीबों के वास आवास के लिए पी पी एक्ट 1947 को सख्ती से लागू करने, ग्रामजी कानून के तहत गरीबों को काम देने, राशन सूची में सभी जरूरत मंद परिवारों को जोड़ने, दैनिक न्यूनतम मजदूरी 700 रुपये करने, पीने के पानी को लेकर मचे हाहाकार को दूर करने, ग्रामीण आंचलों के प्लस 2 स्कूलों में अपेक्षित कमरा बनाने आदि मांगों को लेकर पुरे बिहार अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) का दो दिवसीय 13–14 अनशन/सत्याग्रह आंदोलन समाप्त हो गया।
राज्य के तकरीबन 150 प्रखण्ड/आंचलों पर हुए आंदोलन का समापन आज राष्टृपति और मुख्यमन्त्री को स्मारपत्र भेजने के जरिये हुआ। इस मौके पर मजदूरी मांगने पर ह्त्या और बलात्कार की घट रही घटनाओं पर आक्रोश व्यक्त किया गया और दलित वंचितों पर बढ़ते हमले के खिलाफ प्रतिरोध खड़ा करने का संकल्प दोहराया गया।
पूरे बिहार में इस आंदोलन में तकरीबन, 50 हजार दलित- गरीबों की भागीदारी हुई जिसमें महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय थी। आंदोलन की अगुवाई राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यदेव राम, शिवनाथ राम, बिरेंद्र गुप्ता, शत्रुघ्न सहनी, जिबछ पासवान, सत्य नारायण पासवान, गोपाल रविदास, सत्यनारायण प्रसाद, प्रदीप कुमार, रामधारी दास, मदन सिंह, हरि पासवान, शनिचरि देवी, आशा देवी आदि ने किया।
आंदोलन के समापन के मौके पर संगठन के राष्ट्रीय महासचिव धीरेंद्र झा ने कहा कि दलितों के वास आवास और जीविका से जुड़े मुद्दे पर यह आंदोलन की शुरुआत है। हमने सरकार को आगाह कर दिया है कि अगर पी पी एक्ट के तहत दलित वंचितों की पुरानी बस्तियों को नियमित नहीं किया जाता है, वास आवास की गारंटी नहीं होती है तो आंदोलन और तेज होगा। जिला मुख्यालयों पर अनशन/सत्याग्रह होगा और फिर राजधानी में ग्रामीण गरीबों का महाजुटान होगा।
अन्य मांगों के साथ आंदोलन की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं-
1. पूर्व से बसी तमाम बस्तियों को पी पी एक्ट 1947 के तहत नियमित किया जाय।
2. सभी भूमिहीनों को 5 डिसमिल जमीन और पक्का मकान दो।
3. सभी ग्राम पंचायतों में भूमिहीनों के लिए आवासीय कॉलोनी बने।
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