अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को को ए.एन. सिन्हा इंस्टीट्यूट में मुफ्त ठहराने और बैठक की सुविधा देने का फैसला लोकतांत्रिक संस्थानों का दुरुपयोग " -आइसा
आइसा ने ए.एन. सिन्हा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, पटना में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के क्षेत्रीय बैठक के लिए मुफ्त आवास एवं संस्थान की सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की कड़ी निंदा की है। 7 अगस्त 2026 को एबीवीपी, दक्षिण बिहार की ओर से संस्थान के निदेशक को भेजे पत्र में 13-14 अगस्त को होने वाली बैठक के लिए 10 कमरे, एक सुइट तथा राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस रूम उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। पत्र में एबीवीपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री एवं सह-संगठन मंत्री के बैठक में शामिल होने का भी उल्लेख है।
जहां एक ओर संस्थान के कर्मचारियों को सिर्फ़ 50% रियायत का प्रावधान है, वही भाजपा और आरएसएस से संबंधित छात्र संगठन को यहां मुफ्त सुविधाएं प्राप्त कराई जा रही हैं। आइसा का कहना है कि ए.एन. सिन्हा इंस्टीट्यूट एक शैक्षणिक एवं सामाजिक शोध संस्थान है, न कि आरएसएस का निजी अतिथि गृह। इंस्टीट्यूट की अपनी अधिसूचना में विभिन्न कमरों और सुविधाओं के लिए शुल्क निर्धारित हैं। ऐसे में किसी एक राजनीतिक संगठन को इन सुविधाओं का निःशुल्क उपलब्ध कराया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि एबीवीपी को राजनीतिक कार्यक्रम के लिए सरकारी/सार्वजनिक संस्थान की सुविधाएं मुफ्त दी जा सकती हैं, तो अन्य छात्र एवं सामाजिक संगठनों के लिए समान नियम क्यों नहीं लागू होंगे? संस्थान के डायरेक्टर को इसपर जवाब देना चाहिए।
आइसा ने कहा कि यह घटना बिहार में भाजपाई सत्ता एवं
संस्थानों के बीच बढ़ते गठजोड़ को उजागर करती है। यह विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के भगवाकरण की कड़ी में एक कदम है।
आइसा मांग करती है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए, मुफ्त आवास एवं संस्थान की अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर संस्थान के निदेशक स्पष्टीकरण दे एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से पैसा लिया जाए तथा सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थानों के संसाधनों के उपयोग के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और सभी संगठनों पर समान रूप से लागू होने वाली नीति बनाई जाए।
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