मानसिक, चारित्रिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए गुरु का सान्निध्य जरूरी : जितेन्द्र कुमार सिन्हा

मानसिक, चारित्रिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए गुरु का सान्निध्य जरूरी : जितेन्द्र कुमार सिन्हा

सुरेन्द्र कुमार रंजन, पटना, 29 जुलाई ::

जीवन की सार्थकता के लिए जीवन में आध्यात्मिक गुरु का होना जरूरी है। आध्यात्मिक गुरु के प्रति प्रेम, आस्था और विश्वास बनाए रखना होगा तभी जीवन के क्षेत्र में सफलता संभव है, उक्त उद्गार मातृ उद्बोधन आश्रम आध्यात्मिक केन्द्र , अशोक नगर, कंकड़बाग, पटना द्वारा आयोजित  गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मुख्य अतिथि जितेन्द्र कुमार सिन्हा ने व्यक्त किए।

कार्यक्रम की शुरुआत आश्रम से कलश यात्रा के साथ शुरू हुई।सद्गुरुजी की चरण पादुका को भजन कीर्तन के साथ ट्रस्ट के सदस्य श्री राधे श्याम अपने सिर पर रखकर कार्यक्रम स्थल (राजा उत्सव कम्युनिटी हॉल)पर पहुंच मंच पर आसीन किया। इसके बाद पुरोहित श्री ठाकुर अरुण कुमार सिंह,यजमान श्री फाल्गुनी मित्रा एवं श्रीमती कृष्णा मित्रा के द्वारा स्वास्तिका वाचन कर सद्गुरु जी का पूजन किया गया। फिर नौ कन्याओं द्वारा सद्गुरुजी का स्वागत और मंगल आरती की गई। इसके बाद अतिथियों का स्वागत ट्रस्ट के पदाधिकारियों द्वारा तिलक लगाकर एवं स्फटिक माला पहनाकर कर किया गया। तत्पश्चात् उन्हें पुष्प गुच्छ ,अंग वस्त्र और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। फिर मुख्य अतिथि के रूप में आमन्त्रित सूचना एवं जनसंपर्क के सेवा निवृत्त पीआरओ व प्रसिद्ध लेखक जितेन्द्र कुमार सिन्हा, विशिष्ट अतिथि के रूप में आमन्त्रित "राजनीति चाणक्य" मासिक पत्रिका के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध लेखक सुनील कुमार सिन्हा एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में आमन्त्रित बिहार के चर्चित उद्घोषक सह गायक शैलेश कुमार द्वारा स्मारिका एवं कैलेंडर का लोकार्पण किया गया। इसके बाद अतिथियों ने उपस्थित भक्तजनों को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु के बिना जीवन निरर्थक है। जीवन को सार्थक बनाने के लिए हमें एक आध्यात्मिक गुरु का चयन करना होगा। उनके प्रति प्रेम, आस्था और विश्वास रखना होगा। गुरु की जब कृपा हो जाती है तो कठिन से कठिन काम भी सरल हो जाता है और हर मुसीबत से छुटकारा मिल जाता है। इसलिए जीवन को सफल बनाने के लिए गुरु का सानिध्य जरुरी है।

गुरु पूर्णिमा पत्रिका "ज्ञान सागर" के संपादक सुरेन्द्र कुमार रंजन ने गुरु पूर्णिमा के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु उस चमकते हुए चन्द्र के समान होते हैं जो अंधेरे में रोशनी देकर अपने शिष्यों का पथ प्रदर्शन करते हैं। वास्तव में गुरु वही है जो अपने सदुपदेशों के माध्यम से शिष्य के अज्ञान रूपी अंधकार को नष्ट कर ज्ञान रूपी उजाले की ओर ले जाता है। 
ट्रस्ट के संस्थापक सह संचालक ठाकुर अरुण कुमार सिंह ने आध्यात्मिक गुरु के महत्त्व को उद्घाटित करते हुए कहा कि एक सच्चा और अच्छा आध्यात्मिक गुरु वही होता है जिसमें लोभ,मोह और अहंकार जैसे अवगुण न हो और जो अपने शिष्यों के प्रति समर्पित हो। कलयुग में सच्चा गुरु वही है जो शास्त्रों के अनुसार भक्ति बताता है और जो पूर्ण ज्ञान रखता है जिससे मनुष्य को मोक्ष प्राप्त हो सके।

गुरुभाई एवं बहनों द्वारा भजन कीर्तन के साथ संध्याकालीन कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद सद्गुरुजी का मंच पर आगमन हुआ। नौ कन्याओं द्वारा सद्गुरुजी का स्वागत एवं मंगल आरती की गई। इसके बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों द्वारा  मुख्य अतिथि के रूप में आमन्त्रित एनएमसीएच के सेवा निवृत्त अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ सत्येन्द्र कुमार सिन्हा, विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी एंड ऑक्यूपेशनल थेरेपी पटना के विभागाध्यक्ष  सह नियंत्रण पदाधिकारी डॉ प्रियदर्शी आलोक एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में आमन्त्रित एचडीएफसी फर्स्ट बैंक, मुन्ना चौक शाखा के शाखा प्रबंधक सन्नी कुमार का स्वागत तिलक लगाकर और स्फटिक माला पहनाकर किया गया। तत्पश्चात् पुष्प गुच्छ,अंग वस्त्र ,मोमेंटो, स्मारिका और कैलेंडर देकर सम्मानित किया गया।

इसके बाद मुख्य व विशिष्ट अतिथियों एवं ट्रस्ट के पदाधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर भजन संध्या का उद्घाटन किया गया। अतिथियों ने सद्गुरुजी के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु के बिना जीवन सार्थक नहीं हो सकता है। जीवन के हरेक क्षेत्र में सफलता के लिए गुरु का सानिध्य अति आवश्यक है। जब तक गुरु की कृपा प्राप्त नहीं होती,तब तक कोई भी मनुष्य अज्ञान रूपी अंधकार में भटकता हुआ माया मोह के बंधन में बंधा रहता है। गुरु के मार्गदर्शन के बिना मानसिक, चारित्रिक और आध्यात्मिक उत्थान नहीं हो सकता है।इसके बाद कार्यक्रम के उद्घोषक श्री मनोज कुमार मुक्त सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले कलाकारों का स्वागत ट्रस्ट के पदाधिकारियों द्वारा तिलक लगाकर और माला पहनाकर  किया गया। भजन संध्या में सुप्रसिद्ध लोक गायिका वंदना सिन्हा सहित अन्य कलाकारों द्वारा गाए भक्ति से सराबोर कर्णप्रिय भजन को सुनकर भक्तजन मंत्रमुग्ध हो झूम उठे। अंत में  ट्रस्ट के संचालक ठाकुर अरुण कुमार सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यक्रम का समापन किया गया।
इस अवसर पर मातृ उद्बोधन आध्यात्मिक केन्द्र (ट्रस्ट) के संस्थापक सह संचालक ठाकुर अरुण कुमार सिंह, अध्यक्ष मुरारी शर्मा, सचिव राकेश कुमार सिंह, कार्यकारी सचिव सह कोषाध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार, महासचिव सतीश कुमार सिंह, संपादक सुरेन्द्र कुमार रंजन, उपसचिव मनोज कुमार, अनिता सिंह, रिंकी सिंह, राखी सिन्हा, सुशीला देवी, धर्मशीला देवी, आरती देवी, अनिता पटेल, सहजानंद गोस्वामी, संजीत कुमार सिंह, संजय कुमार पाण्डेय, दयानंद प्रसाद, सूरज नारायण, अशोक कुमार, परमेश्वर दयाल, राजेश कुमार राजू रवि नारायण सिन्हा, देवानंद प्रसाद, उषा देवी, रीतेश कुमार सिंह, अरूण कुमार, राधेश्याम, हरेन्द्र सिंह, पत्रकार सनोबर खान, रोहित कुमार एवं सुनील कुमार सिन्हा , कटिहार के भक्त जय नारायण झा, राजेश कुमार, शंभू कामती सहित सैंकड़ों गुरु भाई -बहन , भक्तजन एवं कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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