छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने से पीछे हट रही है भाजपा सरकार : नेहा

छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने से पीछे हट रही है भाजपा सरकार : नेहा

बेउर जेल में गिरफ्तार साथियों से माले नेताओं की मुलाकात, मुकदमे हटाने को लेकर डीजीपी से मिलाप्रतिनिधिमंडल

पटना, 27 जुलाई 2026। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं NEET पेपर लीक के खिलाफ चले ऐतिहासिक छात्र आंदोलन की प्रमुख नेता का. नेहा बोरा ने आज पटना पहुंचकर कहा कि बिहार की भाजपा–जदयू सरकार छात्र आंदोलन के बाद हुए समझौते से पीछे हट रही है। सरकार ने आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने का भरोसा दिया था, लेकिन इसके उलट पूरे बिहार में आंदोलनकारी छात्रों, छात्र नेताओं और विपक्षी कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। यह न केवल समझौते का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर भी सीधा हमला है।

नेहा ने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ पूरे बिहार में लाखों छात्रों ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया। इसके बावजूद हजारों छात्र–छात्राओं पर मुकदमे दर्ज किए गए, बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुईं और आज भी अनेक छात्र झूठे मामलों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि समझौते का सम्मान करते हुए छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे बिना शर्त तत्काल वापस लिए जाएं तथा गिरफ्तार सभी छात्रों और छात्र नेताओं को न्याय दिलाया जाए।

उन्होंने कहा कि अब सरकार छात्र आंदोलन का समर्थन करने वाले भाकपा–माले नेताओं को भी चुन-चुनकर निशाना बना रही है। सिवान और छपरा सहित कई जिलों में माले नेताओं पर राजनीतिक दुर्भावना से मुकदमे दर्ज किए गए हैं। जीरादेई के पूर्व विधायक अमरजीत कुशवाहा सहित कई नेताओं पर साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वहीं भाकपा–माले विधायक दल के पूर्व नेता महबूब आलम और विधायक जूही महबूबा तक को मुकदमों में घसीटना सरकार की बदले की राजनीति का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलनों का समर्थन करना कोई अपराध नहीं है और सरकार को दमन का रास्ता छोड़कर छात्रों की जायज़ मांगों का समाधान करना चाहिए।
इस दौरान नेहा बोरा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से मुलाकात कर छात्रों, छात्र नेताओं और आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने, गिरफ्तार महिला एक्टिविस्टों की अविलंब रिहाई सुनिश्चित करने तथा पुलिस दमन की घटनाओं की समीक्षा करने की मांग की। डीजीपी ने प्रतिनिधिमंडल को मामले पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल में विधायक अरुण सिंह, अजीत कुमार सिंह, शिवप्रकाश रंजन तथा कुमार परवेज़ भी शामिल थे।

इसके पहले भाकपा–माले विधायक अरुण सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बेउर केंद्रीय कारा पहुंचकर गिरफ्तार साथियों पालीगंज विधायक संदीप सौरभ, आइसा राज्य अध्यक्ष धनंजय, राज्य सचिव दीपंकर मिश्रा, उपाध्यक्ष सबा आफरीन, मीडिया प्रभारी दिव्यम के अलावा तेजप्रताप यादव और शांतनु शेखर से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना तथा उन्हें आंदोलन के प्रति व्यापक जनसमर्थन की जानकारी दी।

 नेताओं ने विश्वास दिलाया कि उनकी रिहाई और मुकदमों की वापसी तक संघर्ष जारी रहेगा।

नेहा बोरा ने घोषणा की कि यदि सरकार मुकदमे वापस लेने और दमन की नीति समाप्त करने की दिशा में तत्काल कदम नहीं उठाती है, तो 30 जुलाई को पूरे बिहार में राज्यव्यापी प्रतिवाद दिवस आयोजित किया जाएगा। इस प्रतिवाद के माध्यम से छात्र, युवा, शिक्षक और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले सभी नागरिक सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करेंगे।

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