श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रशिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण : मंत्री, श्री अरुण शंकर प्रसाद

श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रशिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण : मंत्री, श्री अरुण शंकर प्रसाद

श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रशिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण : मंत्री, श्री अरुण शंकर प्रसाद
- श्रम संहिताओं की बेहतर समझ और प्रभावी अनुपालन के लिए क्षमता निर्माण पर जोर
- प्रशिक्षित प्रशिक्षक ही श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन की आधारशिला : मंत्री श्री अरुण शंकर प्रसाद
- मंत्री श्री अरुण शंकर प्रसाद ने किया श्रम संहिता पुस्तक का विमोचन
पटना, 16 जुलाई 2026: दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान में वी.वी. गिरी राष्ट्रीय श्रम संस्थान, भारत सरकार एवं दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय "श्रम संहिताओं एवं उनकी नियमावलियों पर प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम" का समापन समारोह श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण मंत्री श्री अरुण शंकर प्रसाद के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मंत्री ने श्रम संहिता नियमावली पुस्तक का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव श्री के. सेंथिल कुमार, श्रमायुक्त श्री राजेश भारती सहित विभाग एवं वी.वी. गिरी राष्ट्रीय श्रम संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में मंत्री श्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रशिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नई श्रम संहिताओं का उद्देश्य केवल श्रम कानूनों का सरलीकरण नहीं, बल्कि श्रमिकों और उद्योगों के बीच विश्वास, पारदर्शिता तथा संतुलन स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने समय-सीमा के भीतर नई श्रम संहिताओं से संबंधित सभी राज्य नियमावलियों का निर्माण एवं अधिसूचना जारी कर देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बनाई है।
मंत्री ने कहा कि किसी भी कानून की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागी अब केवल प्रशिक्षार्थी नहीं, बल्कि मास्टर ट्रेनर हैं, जिनकी जिम्मेदारी अपने-अपने जिलों में अधिकारियों, नियोजकों, श्रमिक संगठनों और श्रमिकों तक नई श्रम संहिताओं की सही जानकारी पहुंचाना है। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान सरल एवं स्थानीय भाषा के उपयोग पर बल देते हुए कहा कि लोगों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों से जुड़े प्रमुख प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नई श्रम संहिताओं से संगठित एवं असंगठित दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, समय पर उचित पारिश्रमिक, सुरक्षित कार्यस्थल और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों का लाभ मिलेगा, जबकि उद्योगों के लिए प्रक्रियाएं अधिक सरल एवं अनुपालन सुगम होगा। डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन और ऑनलाइन अनुपालन व्यवस्था से पारदर्शिता, जवाबदेही तथा सुशासन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग प्रशिक्षण, डिजिटल अवसंरचना और प्रशासनिक सहयोग के माध्यम से नई श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन को निरंतर मजबूत करेगा, जिससे श्रमिकों के हितों की रक्षा के साथ औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव श्री के. सेंथिल कुमार ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों को नई श्रम संहिताओं के प्रावधानों एवं उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सक्षम बनाना है। वहीं, श्रमायुक्त श्री राजेश भारती ने कहा कि राज्यभर में मास्टर ट्रेनरों के माध्यम से सभी हितधारकों को प्रशिक्षित कर नई श्रम संहिताओं के प्रभावी अनुपालन को सुनिश्चित किया जाएगा। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों के प्रति आभार ज्ञापन के साथ हुआ।

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