प्रत्येक तीन माह में राज्य के सभी जिलों के तीन पंचायत को बाल श्रम मुक्त किया जाएगा : अरुण शंकर प्रसाद

प्रत्येक तीन माह में राज्य के सभी जिलों के तीन पंचायत को बाल श्रम मुक्त किया जाएगा : अरुण शंकर प्रसाद

*- मंत्री ने किया बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के नवीकृत कार्यालय का उद्घाटन, बाल श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई*
*- बाल श्रम के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के साथ पुनर्वास पर भी सरकार का विशेष जोर : अरुण शंकर प्रसाद*
*- प्रत्येक तीन माह में राज्य के सभी जिलों के तीन पंचायत को बाल श्रम मुक्त किया जाएगा : अरुण शंकर प्रसाद*

*पटना, 24 जून 2026 :* आज माननीय मंत्री, श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग-सह-युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग, श्री अरुण शंकर प्रसाद ने आज नियोजन भवन, सी-ब्लॉक, छठा तल स्थित बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के नवीकृत कार्यालय का उद्घाटन बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के अध्यक्ष, श्री अशोक कुमार, उपाध्यक्ष, श्री  अरविन्द कुमार सिंह एवं श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव, श्री के. सेंथिल कुमार की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया।
इस अवसर पर माननीय मंत्री ने कहा कि बाल श्रम केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि बच्चों के बचपन, शिक्षा और सम्मानजनक भविष्य पर सीधा आघात है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने, स्वस्थ जीवन जीने तथा अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिलना चाहिए। हर बच्चे को शिक्षा मिले और कोई भी बच्चा श्रम करने के लिए मजबूर न हो।
माननीय मंत्री ने कहा कि बच्चे देश के भविष्य हैं और विकसित भारत के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सभी नागरिकों से बाल श्रम उन्मूलन के अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की। उन्होंने यह भी दुहराया की देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी ने विकसित भारत की परिकल्पना में युवाओं की अहम भागीदारी को उल्लेखित करते हुए कहा है कि किशोर श्रम के बदले राष्ट्र के युवा कौशल को अपनाकर विश्वस्तर पर अपनी पहचान बनाएं। तकनीक, शिक्षा और खेल उनकी प्राथमिकता बने, जिसमें अव्वल होकर हमारे नौनिहाल वैश्विक पहचान बनाएं।   
उन्होंने बताया कि राज्य के सभी जिलों में जिला प्रशासन, श्रम विभाग, पुलिस प्रशासन, बाल संरक्षण इकाइयों एवं संबंधित विभागों के सहयोग से विशेष धावा दल गठित किए गए हैं। ये दल होटल, ढाबों, रेस्टोरेंट, चाय की दुकानों, गैराज, कार्यशालाओं, ईंट-भट्ठों, घरेलू एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों सहित अन्य संभावित कार्यस्थलों पर नियमित जांच अभियान चला रहे हैं। अभियान के दौरान चिन्हित बाल श्रमिकों को तत्काल मुक्त कराकर उनके पुनर्वास एवं आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
माननीय मंत्री ने बताया कि बिहार देश का पहला राज्य है, जहाँ बाल श्रम से मुक्त कराए गए किशोर श्रमिकों को मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से ₹25,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इस सहायता का उद्देश्य उन्हें शिक्षा, कौशल विकास एवं सम्मानजनक जीवन की मुख्यधारा से जोड़ना है। विभाग यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि मुक्त कराए गए बच्चों का विद्यालयों में नामांकन हो तथा उन्हें आवश्यक शैक्षणिक एवं सामाजिक सहयोग प्राप्त हो। मैं आप सभी को अवगत कराना चाहूँगा कि विमुक्त बाल श्रमिकों की विमुक्ति एवं पुनर्वास के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 विमुक्त बाल श्रमिकों की संख्या 1130, दर्ज FIR 846, CMRF से 25,000/- बच्चों के खाते में FD की संख्या 284, 3,000/- तत्काल आर्थिक सहायता प्राप्त बच्चों की संख्या 398,प्रति बाल श्रमिक 5,000/- जमा किये जाने की संख्या 621 रही। 
उन्होंने कहा कि सरकार केवल बाल श्रमिकों को कार्यस्थलों से मुक्त कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके समग्र पुनर्वास एवं उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए भी निरंतर कार्य कर रही है।
माननीय मंत्री ने निर्माण श्रमिकों से अपील की कि वे अपना निबंधन बिहार भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के पोर्टल पर कराकर विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाएँ। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाल श्रम करवाने वाले अभिभावकों की पहचान कर उन्हें पात्रता के अनुसार राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाए, ताकि आर्थिक सशक्तिकरण के माध्यम से बाल श्रम की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि बाल श्रम उन्मूलन केवल प्रशासनिक कार्रवाई से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए सामाजिक जागरूकता और जनभागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
इस अवसर पर विशेष सचिव-सह-सचिव बोर्ड, श्री सुनील कुमार यादव, विशेष सचिव, श्री उपेन्द्र प्रसाद, श्रमायुक्त बिहार, श्री राजेश भारती,  बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग श्रीमती राखी कुमारी केशरी, श्रम अधीक्षक (बाल श्रम) श्रीमती स्नेहा सृजन सहित आयोग के अन्य अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

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