शिक्षित, सुरक्षित और बाल श्रम मुक्त बिहार ही है हमारा लक्ष्य, इसके लिए हों संकल्पित : मंत्री अरुण शंकर प्रसाद
दिनांक 12 जून 2026
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित हुआ “बाल श्रम के विरुद्ध बिहार” कार्यक्रम
शिक्षित, सुरक्षित और बाल श्रम मुक्त बिहार ही है हमारा लक्ष्य, इसके लिए हों संकल्पित : मंत्री अरुण शंकर प्रसाद
पटना। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 2026 के अवसर पर श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग, बिहार द्वारा दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान, पटना में “बाल श्रम के विरुद्ध बिहार” थीम पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार सरकार के श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के माननीय मंत्री, श्री अरुण शंकर प्रसाद ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के अध्यक्ष, श्री अशोक कुमार, उपाध्यक्ष, श्री अरविंद कुमार सिंह, विशेष सचिव-सह-सचिव बोर्ड, श्री सुनील कुमार यादव, विशेष सचिव, श्री उपेंद्र प्रसाद, श्रमायुक्त बिहार, श्री राजेश भारती, संयुक्त श्रमायुक्त, श्री राजेश कुमार, बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग की सचिव, श्रीमती राखी केशरी, यूनिसेफ बिहार की चीफ फील्ड ऑफिसर, श्रीमती मोनिका. ओ. नेल्सन, माननीय मंत्री के आप्त सचिव. श्री अजय शंकर राय के साथ विभाग एवं आयोग के वरीय पदाधिकारी एवं अधिकारी उपस्थित रहे। मौके पर माननीय मंत्री के द्वारा बाल श्रम के विरुद्ध प्रचार वाहनों को भी रवाना किया गया।
इस दौरान अपने संबोधन में माननीय मंत्री, श्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि बाल श्रम केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि बच्चों के बचपन, शिक्षा और सम्मानजनक भविष्य पर सीधा आघात है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने, स्वस्थ जीवन जीने और अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने समाज से आह्वान करते हुए कहा कि “ज्ञान, करुणा और सामाजिक न्याय की धरती बिहार से हम यह संदेश देते हैं कि हर बच्चे को शिक्षा मिले और कोई भी बच्चा श्रम करने के लिए मजबूर न हो।” मंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि “बाल श्रम मुक्त बिहार” के संकल्प को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अभियान है। बच्चे देश के भावी कर्णधार हैं, देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी, आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी ने भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में बच्चों की भूमिका को रेखांकित किया है, जिसको पूरा करने में हम सभी सहभागी बनकर प्रदेश को बालश्रम मुक्त बनायें, जो विकसित भारत बनने में सहचर की भूमिका निभाएगा।
माननीय मंत्री ने बताया कि बिहार देश का पहला राज्य है, जहां बाल श्रम से मुक्त कराए गए किशोर श्रमिकों को मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से ₹25 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इस सहायता का उद्देश्य उन्हें शिक्षा, कौशल विकास और सम्मानजनक जीवन की मुख्यधारा से जोड़ना है। विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि विमुक्त बच्चों का विद्यालयों में नामांकन हो तथा उन्हें आवश्यक शैक्षणिक और सामाजिक सहयोग मिले। उन्होंने कहा कि सरकार केवल बाल श्रमिकों को कार्यस्थलों से मुक्त कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके पुनर्वास और भविष्य निर्माण की दिशा में भी लगातार कार्य कर रही है।
कार्यक्रम में बाल श्रम की सामाजिक और आर्थिक जड़ों पर भी चर्चा हुई। माननीय मंत्री ने कहा कि गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी और जागरूकता की कमी जैसी समस्याएं बाल श्रम को बढ़ावा देती हैं। इसलिए इसके समाधान के लिए बहुआयामी प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग बाल श्रमिकों के कल्याण, पुनर्वास और संबंधित कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत बाल श्रम कराने वालों पर 20 हजार से 50 हजार रुपये तक जुर्माना और दो वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है, जिसका सख्ती से अनुपालन कराया जा रहा है।
माननीय मंत्री ने सभी नागरिकों से अपील की कि यदि कहीं भी बाल श्रम की जानकारी मिले तो इसकी सूचना विभाग को दें। इसके लिए 9471229133 व्हाट्सएप नंबर जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयास से ही बाल श्रम जैसी गंभीर समस्या का स्थायी समाधान संभव है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने यह संकल्प दोहराया कि “न कोई बच्चा मजदूर बनेगा, न उसका बचपन छिनेगा; शिक्षित, सुरक्षित और बाल श्रम मुक्त बिहार ही हमारा लक्ष्य है।” यही संदेश पूरे आयोजन का केंद्र बिंदु रहा और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को मजबूती प्रदान करता दिखा।
कार्यक्रम के दौरान श्रम अधीक्षक अधिनियम पटना प्रभारी द्वारा विमुक्त कराये गए 5 बाल/ किशोर श्रमिकों को 25,000 और 5 को 3000 का डमी चेक दिया गया। इसके अलावा विश्व बाल निषेध दिवस के अवसर पर प्रमंडल स्तर पर आयोजित वाद – विवाद प्रतियोगिता में +2 देशरत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद बालिका उच्च विद्यालय, दरभंगा की अदिति कुमारी को पहला स्थान, पीएम श्री एस एस बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गोपालगंज (सारण) की वर्षा कुमारी को दूसरा स्थान और प्रोजेक्ट कन्या इंटर विद्यालय, नवादा (गयाजी) के कृपा तुलसी और बैद्यनाथ गर्ल्स हाई स्कूल, मुंगेर की आरुसी वर्मा को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ, जिन्हें पुरुस्कृत भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान बाल श्रम के विरुद्ध अभियान पर आधारित प्रचार फिल्म एवं डॉक्युमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया। कार्यक्रम का समापन श्रमायुक्त बिहार, श्री राजेश भारती के संबोधन से हुआ।
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