नौकरी और रोजगार पर बिहार के एनडीए सरकार के दावे को चुनौती
पटना 15 फरवरी 2026 ; राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने बिहार की एनडीए सरकार द्वारा नौकरी और रोजगार दिए जाने के दावे को चुनौती देते हुए सरकार से श्वेत पत्र जारी किए जाने की मांग की है।
श्री गगन ने कहा है कि एनडीए नेताओं द्वारा लगातार यह दावा किया जा रहा है कि 2020 और 2025 के बीच पच्चास लाख युवाओं को नौकरी और रोजगार दिया गया है , जो सरासर झूठ है। यदि एनडीए नेताओं के दावे में थोड़ी भी सच्चाई है तो वे विभाग वार बतावें कि किस-किस विभाग में कब-कब कितनी नौकरियां दी गई। साथ हीं यह भी बतावें कि राज्य के किस-किस प्रखंड में किन-किन लोगों को रोजगार मुहैया कराया गया। एनडीए नेताओं में यदि थोड़ी भी नैतिकता है तो 2005 से लेकर अबतक कितने युवाओं को नौकरी दी गई और इस बीच कितने लोग सेवानिवृत्त हुए। साथ हीं शपथ के साथ 1990 से 2005 के बीच विभिन्न विभागों में हुई नियमित बहाली और रिक्तियों का आंकड़ा जारी करें।
राजद प्रवक्ता ने कहा है कि एनडीए के नेता केवल झूठ बोलकर लोगों को गुमराह करते रहे हैं। जबकि सच्चाई ठीक इसके विपरित है। राजद शासनकाल में सभी विभागों में स्वीकृत पदों पर रिक्तियों के विरुद्ध नियमित बहाली हुआ करता था। 1990 के बाद पहली बार बड़ी संख्या में पिछड़ों, अति पिछड़ों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के युवाओं को लेक्चरर, प्रोफेसर, दारोगा, सिपाही, शिक्षक, इंजिनियर और प्रशासनिक सहित अन्य सेवाओं में जाने का मौका मिला था। नये जिले, अनुमंडल,अंचल, प्रखंड और थाने का सृजन कर बड़े पैमाने पर पद सृजित किए गए और सृजित पदों पर बहाली की गई।सात-सात नये विश्वविद्यालयों का सृजन कर उसके अनुसार पद सृजित कर बड़ी संख्या में शिक्षक से लेकर कर्मचारी तक भर्ती किए गए। राबड़ी देवी जी के मुख्यमंत्रित्व काल में शिक्षक बहाली को कोर्ट में चुनौती दिए जाने के बाद दलित और अति पिछड़ो के टोले में खोले गए विद्यालयों के लिए शिक्षकों के कुल स्वीकृत पदों के अतिरिक्त 1 लाख 90 हजार शिक्षा मित्रों की बहाली की गई।
वहीं 2005 में एनडीए सरकार बनने के बाद स्वीकृत पदों पर नियमित नियुक्ति के बदले सभी पदों पर एक सुनिश्चित मानदेय पर संविदा बहाली की परम्परा शुरू कर दी गई। 2022 में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद तत्कालीन उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के दबाव में विभिन्न विभागों में नियमित बहाली की प्रक्रिया शुरू हुई। अबतक बिहार लोक सेवा आयोग के द्वारा शिक्षकों सहित कुल 3,37,909 ; राज्य कर्मचारी चयन आयोग द्वारा 18,249; बिहार तकनीकी सेवा आयोग द्वारा 20,217 ; बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग द्वारा 6,486; केन्द्रीय चयन पर्षद(सिपाही )द्वारा 35,838; बिहार राज्य विश्वविद्यालय आयोग द्वारा 3300 पदों पर यानी कुल 4,30,999 पदों पर बहाली हुई है जिसका श्रेय निश्चित रूप से तेजस्वी यादव को जाता है।
जहां तक रोज़गार देने का दावा किया जा रहा है वह तो और भी रोचक है। जिस कौशल विकास योजना के द्वारा युवाओं को रोजगार और नौकरी देने का दावा किया जा रहा है, 18 दिसम्बर 2025 को संसद में पेश कैग के रिपोर्ट में इसे पुरे तौर पर फर्जी बताया गया है। इस योजना के तहत बिहार में कुल 6.33 लाख युवाओं को ट्रेनिंग दी गई है जिसमें अधिकांश के नौकरी और रोजगार दिए जाने का दावा किया गया है। कैग ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि पंजिकृत अधिकांश नाम फर्जी हैं, उन्हें ट्रेनिंग देने वाले सेन्टर फर्जी है और उन्हें प्लेसमेंट देने वाली कम्पनियां फर्जी है।
राजद प्रवक्ता ने कहा कि बिहार की एनडीए सरकार केवल झूठ बोलकर बनाए गए परसेप्शन के आधार पर लोगों को गुमराह करती रही है। जबकि हकीकत उसके दावे के ठीक विपरित है।
0 Response to "नौकरी और रोजगार पर बिहार के एनडीए सरकार के दावे को चुनौती "
एक टिप्पणी भेजें