आईसीएआर-आरसीईआर में पाँच राज्यों के किसानों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आगाज

आईसीएआर-आरसीईआर में पाँच राज्यों के किसानों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आगाज

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर (ICAR-RCER), पटना में शनिवार, 21 फरवरी से झारखंड और पूर्वोत्तर भारत के पाँच राज्यों के किसानों एवं उद्यमियों के लिए चार दिवसीय 'क्षमता निर्माण कार्यक्रम' का भव्य शुभारंभ हुआ। यह विशेष प्रशिक्षण शिविर 24 फरवरी तक चलेगा, जिसमें असम, मेघालय, सिक्किम, त्रिपुरा और नागालैंड के प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। यह क्षमता निर्माण कार्यक्रम संस्थान के उत्तर पूर्वी पर्वतीय घटक कोष के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उन्नत कृषि मॉडलों के प्रदर्शन और वैज्ञानिक ज्ञान के माध्यम से मौजूदा कृषि पद्धतियों को सशक्त बनाना है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को न केवल तकनीकी जानकारी मिल रही है, बल्कि विभिन्न राज्यों के किसानों के बीच सांस्कृतिक और ज्ञान साझा करने का भी एक सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ है। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने उत्तर पूर्वी क्षेत्र के लिए समेकित खेती के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे पशुधन, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन, बागवानी और कृषि-वानिकी जैसे घटकों को एक साथ अपनाकर पोषण और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। डॉ. दास ने कहा कि किसान प्राकृतिक रूप से वैज्ञानिक होते हैं, जो अपनी बदलती जरूरतों और जमीनी हकीकत के अनुसार खेती की तकनीकों को विकसित और परिष्कृत करते रहते हैं। विशेषज्ञों की राय तौर पर डॉ. आशुतोष उपाध्याय (प्रमुख, डीएलडब्ल्यूएम) ने पूर्वोत्तर क्षेत्र की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों में वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों की आवश्यकता और इस क्षमता निर्माण कार्यक्रम की प्रासंगिकता को दर्शाया। डॉ. उज्ज्वल कुमार (प्रमुख, डीएसएसई) ने संस्थान में मौजूद 'समेकित खेती प्रणाली' के लाइव मॉडल के बारे में विस्तार से बताया, जो आधुनिक खेती के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश करता है। डॉ. पी. सी. चंद्रन (प्रधान वैज्ञानिक) ने उत्तर पूर्वी क्षेत्र में पशुपालन से होने वाले आर्थिक लाभों और प्रबंधन की बारीकियों को साझा किया।वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार ने उत्तर पूर्वी क्षेत्र की कृषि पद्धतियों और इस क्षेत्र में आधुनिक वैज्ञानिक उपायों को अपनाने के सकारात्मक प्रभाव पर प्रकाश डाला। टीम का सामूहिक प्रयास से कार्यक्रम की शुरुआत में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिश्वजीत देबनाथ ने सभी आगंतुक किसानों का स्वागत किया। वैज्ञानिकों डॉ. तारकेश्वर कुमार और श्री सुरेंद्र कुमार अहिरवाल ने किसानों को नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया। सत्र का समापन वैज्ञानिक डॉ. विवेकानंद भारती के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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