बंधुआ एवं बाल श्रम उन्मूलन को लेकर हुआ राज्य स्तरीय जन जागरूकता अभियान का शुभारंभ

बंधुआ एवं बाल श्रम उन्मूलन को लेकर हुआ राज्य स्तरीय जन जागरूकता अभियान का शुभारंभ

पटना, 09 फरवरी 2026: बंधुवा मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 की स्वर्ण जयंती के अवसर पर आज श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग, बिहार सरकार द्वारा राज्य स्तर पर बंधुआ एवं बाल श्रम उन्मूलन को लेकर एक विशेष जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन नियोजन भवन स्थित प्रतिबिंब सभागार में  किया गया। इस अवसर पर जन जागरूकता अभियान के तहत जागरुकता रथ को विभागीय सचिव श्री दीपक आनन्द के द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य उक्त विषय पर कार्यरत स्वयं सेवी संस्थाएं, संबंधित विभागों एवं आमजन को बंधुआ एवं बाल श्रम की रोकथाम, पीड़ितों के अधिकारों तथा पुनर्वास से संबंधित कानूनों के प्रति जागरूक करना था। 
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत संबोधन से हुई, जिसके पश्चात बंधुआ मजदूरी से संबंधित पीपीटी प्रस्तुति, जिंगल का प्रसारण एवं प्रचार सामग्री का वितरण किया गया।  इस दौरान सचिव ने अपने संबोधन में कहा कि बंधुआ मजदूरी प्रणाली के उन्मूलन हेतु वर्ष 1976 में बनाया गया अधिनियम सामाजिक न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कदम है। इसके बावजूद आज भी समाज के कुछ वर्ग बंधुआ मजदूरी जैसी अमानवीय प्रथा का शिकार हो रहे हैं, जो एक सभ्य समाज के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और कलंकित करने वाली स्थिति है। इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी एक व्यक्ति या संस्था ने कुरीतियों के विरुद्ध आवाज़ उठाई है, तब-तब समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव हुआ है। इस दिशा में इंटरनेशनल जस्टिस मिशन द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं, जो बंधुआ मजदूरी के उन्मूलन के लिए निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं।

दीपक आनन्द ने आगे कहा कि श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग प्रवासी श्रमिकों के हितों की रक्षा और उनके कल्याण के लिए लगातार प्रयासरत है। प्रायः देखने में आता है कि लोग रोजगार की तलाश में लुधियाना, सूरत, पंजाब जैसे स्थानों पर ठेकेदारों के बहकावे में आकर चले जाते हैं, जहाँ उन्हें मजदूरी, आवास और भोजन जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जाता है और वे शोषण का शिकार बन जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए जन-जागरूकता, सामाजिक सहभागिता और विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं। विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि इंटरनेशनल जस्टिस मिशन जैसे संगठनों के सहयोग से बंधुआ मजदूरी में फँसे किसी भी व्यक्ति को तत्काल मुक्त कराया जाए और सरकार की सभी सहायता एवं पुनर्वास योजनाओं का लाभ उन्हें शीघ्र उपलब्ध कराया जाए।

उक्त कार्यक्रम के दौरान विषय-वस्तु विशेषज्ञ संस्था इंटरनेशनल जस्टिस मिशन (IJM) द्वारा बंधुआ मजदूरी से संबंधित कानूनी प्रावधानों, विभागीय भूमिकाओं, बचाव एवं पुनर्वास प्रक्रिया पर एक विस्तृत PPT प्रस्तुति दी गई। इस प्रस्तुति के माध्यम से अधिनियम की प्रमुख धाराओं, जिम्मेदार विभागों की भूमिका तथा जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े पहलुओं को सरल और व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया गया।

इस अवसर पर विमुक्त बंधुआ श्रमिकों द्वारा अपने संबोधन में बंधुआ मजदूरी की अमानवीय परिस्थितियों, बचाव की प्रक्रिया और उसके बाद शुरू हुई पुनर्वास की यात्रा को साझा किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि विमुक्ति के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया आसान नहीं होती। रोजगार से जुड़ाव, स्थायी आजीविका, सामाजिक स्वीकार्यता, दस्तावेज़ी प्रक्रियाएँ, मुआवजा एवं सरकारी योजनाओं तक समय पर पहुँच जैसी कई चुनौतियाँ सामने आती हैं। सर्वाइवरों ने इस बात पर जोर दिया कि निरंतर प्रशासनिक सहयोग, सामाजिक समर्थन और समुदाय की भूमिका पुनर्वास को स्थायी बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह संबोधन उपस्थित लोगों को समस्या की जमीनी सच्चाई से जोड़ने वाला रहा।

राजेश भारती, श्रम आयुक्त, बिहार सरकार ने अपने संबोधन में कहा कि बंधुआ एवं बाल श्रम का उन्मूलन राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा बचाव, पुनर्वास, मुआवजा भुगतान, आजीविका से जुड़ाव तथा निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी जोर दिया कि जन-जागरूकता, विभागों के बीच समन्वय तथा समाज की सक्रिय भागीदारी के बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम में राज्य में इस विषय पर कार्यरत विभिन्न गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की। इनमें अदिथी, बचपन बचाओ आंदोलन, जन जागरण संस्थान, प्रयास एवं SSEVS सहित अन्य संस्थाएँ शामिल रहीं। इन संगठनों द्वारा अपने अनुभव साझा किए गए तथा बंधुआ एवं बाल श्रम उन्मूलन के लिए प्रशासन और नागरिक समाज के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथियों एवं विमुक्त श्रमिकों द्वारा जन-जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। ये जन-जागरूकता रथ पटना के विभिन्न क्षेत्रों जैसे दीघा–दानापुर क्षेत्र, पटना जंक्शन–मीठापुर क्षेत्र एवं पटना शहर के प्रमुख स्थानों पर भ्रमण करेंगे। अभियान के अंतर्गत जिंगल का प्रसारण, पोस्टर चस्पा करना तथा पंपलेट वितरण जैसी गतिविधियाँ संचालित की गयी।
इसके साथ ही यह भी उल्लेखनीय है कि श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग, बिहार सरकार के सहयोग से राज्य के विभिन्न जिलों में भी इसी कड़ी में जन-जागरूकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं, ताकि बंधुआ एवं बाल श्रम के विरुद्ध संदेश को ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों तक व्यापक रूप से पहुँचाया जा सके। यह राज्य स्तरीय पहल न केवल जन-जागरूकता बढ़ाने, बल्कि प्रशासन, नागरिक समाज और समुदाय के बीच समन्वय को मजबूत करते हुए बंधुआ एवं बाल श्रम उन्मूलन तथा प्रभावी पुनर्वास को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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