मशरूम से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है बिहार-राम कृपाल यादव

मशरूम से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है बिहार-राम कृपाल यादव

खेती में नवाचारः मशरूम से सशक्त किसान, समृद्ध बिहार
कम लागत, ज्यादा कमाई: मशरूम बना किसानों की ताकत
मशरूम से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है बिहार

-राम कृपाल यादव
(दिनांक 22.01.2026)

माननीय कृषि मंत्री, बिहार श्री राम कृपाल यादव ने बताया कि बिहार में मशरूम उत्पादन निरंतर प्रगति की दिशा में अग्रसर है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में जहाँ राज्य का कुल मशरूम उत्पादन 35 हजार मीट्रिक टन था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 42 हजार मीट्रिक टन हो गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में यह उत्पादन और बढ़कर लगभग 44 हजार 930 मीट्रिक टन तक पहुँच गया है। उन्होंने कहा कि यह सतत वृद्धि बिहार की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में मशरूम उत्पादन के बढ़ते महत्व और संभावनाओं को दर्शाती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि देश के कुल मशरूम उत्पादन में बिहार का योगदान लगभग 12 प्रतिशत है, जिससे राज्य इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

बिहार सरकार द्वारा संचालित मशरूम उत्पादन योजना के प्रभावी एवं सतत क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप राज्य में मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। यह प्रगति किसानों की आय में वृद्धि, पोषण सुरक्षा के सुदृढ़ीकरण तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आज मशरूम उत्पादन बिहार की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में कम लागत, अधिक आय और रोजगार सृजन की क्षमता वाले एक मजबूत, टिकाऊ एवं भविष्यन्मुखी विकल्प के रूप में उभर कर सामने आया है।

माननीय मंत्री ने बताया कि योजना के अंतर्गत अनुदान, आधारभूत संरचना, प्रशिक्षण तथा कृषि विश्वविद्यालयों के तकनीकी सहयोग से किसानों एवं उद्यमियों को वैज्ञानिक पद्धति से मशरूम उत्पादन के लिए सक्षम किया जा रहा है। कम भूमि, अल्प निवेश और कम समय में नियमित आमदनी देने वाली यह गतिविधि छोटे एवं सीमांत किसानों, भूमिहीन परिवारों, महिलाओं तथा ग्रामीण युवाओं के लिए घर के पास रोजगार का सशक्त माध्यम बन रही है।
उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर, पटना, नालंदा, गया, वैशाली एवं पश्चिम चंपारण जिले मशरूम उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। इन जिलों में उत्पादित मशरूम स्थानीय बाजारों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश एवं नेपाल जैसे पड़ोसी देशों तक भेजे जा रहे हैं, जिससे किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य प्राप्त हो रहा है।
माननीय कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि मशरूम उत्पादन से ग्रामीण परिवारों को कई स्तरों पर लाभ मिल रहा है। कम जगह में परिवार श्रम आधारित एवं महिला-हितैषी घरेलू उद्यम के रूप में इसे अपनाया जा रहा है। धान एवं गेहूं के भूसे जैसे कृषि अवशेषों के उपयोग से लागत में कमी आ रही है और ‘कचरा से कमाई’ की अवधारणा को बढ़ावा मिल रहा है। मुख्य खेती के साथ पूरक आय के रूप में यह गतिविधि तेज नकदी प्रवाह सुनिश्चित कर रही है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य एवं दैनिक आवश्यकताओं पर खर्च करना आसान हो रहा है। साथ ही छंटाई, पैकिंग, भंडारण, परिवहन एवं प्रसंस्करण के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।

माननीय मंत्री ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आत्मनिर्भर भारत के विजन और माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी की आत्मनिर्भर बिहार की परिकल्पना के अनुरूप राज्य सरकार मशरूम उत्पादन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बना रही है। यह गतिविधि कम संसाधनों में अधिक आय, पोषण सुरक्षा और स्थानीय रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर किसानों, महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बना रही है तथा गांवों में टिकाऊ और समावेशी विकास को सुदृढ़ कर रही है।

उन्होंने बताया कि मशरूम उत्पादन को और प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत वातानुकूलित आधारभूत संरचना की स्थापना की जा रही है तथा राज्य योजना मद से मशरूम किट का वितरण एवं झोपड़ी आधारित मशरूम इकाइयों का निर्माण कराया जा रहा है। योजना का क्रियान्वयन राज्य के सभी जिलों में किया जा रहा है।

उन्होंने इच्छुक किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों एवं युवा उद्यमियों से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन एवं योजना लाभ हेतु अपने निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), प्रखंड/जिला उद्यान कार्यालय अथवा मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण इकाइयों से संपर्क करें।

0 Response to "मशरूम से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है बिहार-राम कृपाल यादव"

एक टिप्पणी भेजें

Ads on article

Advertise in articles 1

advertising articles 2

Advertise under the article