कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में टिकाऊ कृषि हेतु पर्यावरणीय संरक्षण पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में टिकाऊ कृषि हेतु पर्यावरणीय संरक्षण पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में कृषक कल्याण एवं पर्यावरण संरक्षण रहे केंद्र में

पर्यावरणीय उपेक्षा से कृषि को खतरा : डॉ. इंद्रजीत सिंह

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान अकादमी, नई दिल्ली तथा अटारी, पटना के सहयोग से “पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ कृषि एवं जलवायु परिवर्तन” विषय पर दिनांक 22 जनवरी, 2026 को तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ | 
सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. इंद्रजीत सिंह, माननीय कुलपति, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना द्वारा किया गया। डॉ. अंजनी कुमार, निदेशक, अटारी, पटना तथा डॉ. बिकास दास, निदेशक, राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उद्घाटन सत्र की शुरुआत डॉ. अभय कुमार, प्रधान वैज्ञानिक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा प्रस्तुत स्वागत भाषण से हुई। 
अपने संबोधन में डॉ. इंद्रजीत सिंह ने बताया कि रसायनों एवं एंटीबायोटिक्स के अंधाधुंध उपयोग तथा अल्पकालिक लाभ के लिए पर्यावरण की उपेक्षा जैसी मानवीय गतिविधियों ने पर्यावरणीय एवं पारिस्थितिक संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। उन्होंने प्राकृतिक खेती के पुनरुद्धार, समेकित कृषि प्रणालियों को अपनाने, नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाली फसलों के प्रोत्साहन तथा फॉस्फोरस-घुलनशील सूक्ष्मजीवों को बढ़ावा देने जैसी व्यावहारिक रणनीतियों के माध्यम से पर्यावरणीय क्षरण को कम करने के उपाय सुझाए।
डॉ. अनुप दास, निदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने आयोजन समिति के अध्यक्ष के रूप में अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरणीय संरक्षण अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुका है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि खाद्य उत्पादन में गुणवत्ता को बढ़ाने का प्रयास कभी भी पर्यावरण की सुरक्षा, जैव विविधता या कृषकों के हितों के साथ समझौता नहीं कर सकता। विकसित भारत @2047 की राष्ट्रीय परिकल्पना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कृषि विकास में पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।  डॉ. दास ने जानकारी दी कि संस्थान बहुविषयक एवं एकीकृत दृष्टिकोण अपनाकर खाद्य, पोषण एवं पर्यावरणीय सुरक्षा की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके अंतर्गत जलवायु-सहिष्णु एवं उन्नत किस्मों का विकास, समेकित कृषि प्रणाली, संरक्षण कृषि, प्राकृतिक खेती, स्मार्ट जल प्रबंधन, कृषिवानिकी सहित अनेक नवाचारी एवं टिकाऊ तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अपने मुख्य वक्तव्य में डॉ. अरुण कुमार, वरिष्ठ अनुसंधान वैज्ञानिक, महावीर कैंसर संस्थान, पटना ने बिहार में भारी धातुओं के प्रदूषण तथा उससे जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं पर प्रकाश डाला। 
डॉ. अंजनी कुमार ने बदलती जलवायु परिस्थितियों में कृषि उत्पादकता बनाए रखने में किसानों के समक्ष आने वाली चुनौतियों का उल्लेख किया तथा उपयुक्त नीतिगत हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं डॉ. बिकास दास ने मृदा जैविक कार्बन में निरंतर हो रही कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कृषि विकास का आकलन पर्यावरणीय संरक्षण और संतुलन के दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए।
डॉ. शकील अहमद खान, सचिव, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान अकादमी, नई दिल्ली ने आम जनमानस में पर्यावरणीय जागरूकता एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने में अकादमी की भूमिका को रेखांकित किया तथा इस महत्वपूर्ण विषय पर राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन आयोजित करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना की सराहना की।
इस अवसर पर “सामाजिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के किसानों का सामाजिक-आर्थिक उत्थान” विषय पर एक विशेष तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 50 किसानों के साथ-साथ धानुका एग्रो टेक, जैन इरिगेशन एवं श्री मिलेट फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस सत्र में उद्यमिता विकास, मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती एवं उत्पाद विकास, पीपीपी मॉडल के माध्यम से किसानों की आय वृद्धि तथा किसानों को कृषि उद्योग से जोड़ने जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विचार-विमर्श किया गया। 
इसके अतिरिक्त जलवायु परिवर्तन तथा प्रदूषण शमन हेतु हरित प्रौद्योगिकियां विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें देशभर से आए 200 से अधिक वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों,  शिक्षाविदों एवं किसानों ने अपने अनुभव एवं विचार साझा किए। सत्र के उपरांत किसानों ने प्रक्षेत्र भ्रमण भी किया | कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न भागों से आए प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान अकादमी  पुरस्कार जैसे कि नेसा फेलोशिप, के. सी. बोस गोल्ड मेडल आदि से सम्मानित किया गया तथा नवोन्मेषी कृषक पुरस्कार भी प्रदान किए गए। इस अवसर पर गणमान्य अतिथियों द्वारा सम्मेलन की स्मारिका एवं सार पुस्तिका का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीषा टम्टा द्वारा किया गया तथा समन्वय डॉ. रचना दुबे, वैज्ञानिक एवं डॉ. सौरभ कुमार, वैज्ञानिक द्वारा किया गया।

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