दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन ने गरिमामय वातावरण में मनाया “विश्व हिन्दी दिवस”
जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना, बिहार 10 जनवरी ::
“विश्व हिन्दी दिवस” के अवसर पर दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन द्वारा एक भव्य, सारगर्भित एवं विचारोत्तेजक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य हिन्दी tभाषा के महत्व, उसकी वैश्विक पहचान तथा राष्ट्रीय एकता में उसकी भूमिका को रेखांकित करना था। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं युवाओं की उल्लेखनीय सहभागिता रही, जिसने इसे और अधिक प्रभावशाली बना दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष जितेन्द्र कुमार सिन्हा ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने हिन्दी को भारत की आत्मा बताते हुए कहा है कि यह भाषा देश की सांस्कृतिक, सामाजिक एवं बौद्धिक चेतना को जोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने केंद्र सरकार से पुरजोर मांग की है कि हिन्दी को संविधान में राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया जाए, ताकि इसे उसका उचित सम्मान और अधिकार मिल सके।
संस्था की उपाध्यक्ष डॉ. ऋचा दुबे ने कहा है कि हिन्दी केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और मूल्यों की संवाहक है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया है कि वे दैनिक जीवन में हिन्दी का अधिकाधिक प्रयोग करें और डिजिटल मंचों पर भी हिन्दी को प्राथमिकता दें।
वहीं संस्था के सचिव पप्पू कुमार सिंह ने हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए जमीनी स्तर पर किए जाने वाले प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा है कि सामाजिक संगठनों की भूमिका इसमें अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे जन-जन तक भाषा का संदेश पहुंचा सकते हैं।
कोषाध्यक्ष श्री प्रेम सागर पाण्डेय ने हिन्दी को रोजगार, प्रशासन और शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा है कि जब तक भाषा आजीविका से नहीं जुड़ेगी, तब तक उसका व्यापक प्रसार संभव नहीं होगा।
कार्यक्रम में संस्था के सदस्य सुरेन्द्र कुमार रंजन का कहना था कि राष्ट्रभाषा का दर्जा मिलने से हिन्दी प्रशासन, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्रों में और अधिक सशक्त रूप से स्थापित होगी।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था की निदेशिका सुनीता पाण्डेय द्वारा दीप प्रज्वलन एवं स्वागत उद्बोधन के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन सदैव भारतीय भाषाओं, संस्कृति एवं सामाजिक चेतना के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध रहा है और आगे भी इस दिशा में निरंतर कार्य करता रहेगा। संस्था आने वाले समय में हिन्दी कार्यशालाओं, साहित्यिक गोष्ठियों और युवाओं के लिए विशेष अभियानों का आयोजन करेगी।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी सदस्यों, बुद्धिजीवियों एवं प्रतिभागियों ने हिंदी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार हेतु सामूहिक संकल्प लिया। सभी ने यह संकल्प दोहराया कि वे व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में हिन्दी को प्राथमिकता देंगे और नई पीढ़ी को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रहित एवं हिन्दी भाषा की समृद्धि की कामना के साथ हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह में नई ऊर्जा और प्रतिबद्धता का संचार किया।
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