बिहार में पहली बार लुई ब्रेल पुण्यतिथि पर ऐतिहासिक समावेशी आयोजन

बिहार में पहली बार लुई ब्रेल पुण्यतिथि पर ऐतिहासिक समावेशी आयोजन

*पटना, 6 जनवरी 2026* — राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), बिहार एवं ब्रेली इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड ट्रेनिंग के संयुक्त तत्वावधान में आज *रॉबर्ट लुई ब्रेल* की पुण्यतिथि के अवसर पर एक भव्य समावेशी शिक्षा संवाद एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह बिहार में *पहली बार* SCERT पटना के परिसर में आयोजित ऐसा कार्यक्रम था, जिसने दृष्टिबाधित एवं दिव्यांग छात्रों के अधिकारों और शिक्षा पर गंभीर चर्चा को नई दिशा दी।
 मुख्य वक्ता एवं सम्मानित अतिथि:
- *श्री विजय कुमार भास्कर* (समावेशी शिक्षा पदाधिकारी, SCERT) — लुई ब्रेल के जीवन, संघर्ष और ब्रेल लिपि के वैश्विक प्रभाव पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
- *श्रीमती विभा रानी* (HOD, समावेशी शिक्षा विभाग) — नेत्रहीन एवं मूक-बधिर छात्रों के लिए समावेशी शिक्षा की आवश्यकता, पाठ्यक्रम सुधार और शिक्षक प्रशिक्षण पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया।
- *कुमारी जूली सिन्हा (जूही)* — सचिव, ब्रेली इंस्टीट्यूट — कहा: _“लुई ब्रेल के बताए रास्ते पर चलना ही उनका असली सम्मान है। हमें उनके आदर्शों को शिक्षा प्रणाली में उतारना होगा, न कि केवल प्रतिमा स्थापित कर देना।”_
- कुमारी जूही सिन्हा जी ने*श्रीमती विभा रानी* (HOD) को _फोल्डिंग स्टिक_ देकर सम्मानित किया गया — जो दृष्टिबाधितों के लिए ‘ दूसरी 
- दिव्यांग छात्र-छात्राएँ, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं मीडिया प्रतिनिधि।

💬 कार्यक्रम की खास बात:
- SCERT में पहली बार समावेशी शिक्षा पर इतना बड़ा संवाद।
- “ब्रेल लिपि नहीं, एक आंदोलन है!” — इस भावना के साथ सभी ने एकजुटता का संदेश दिया।
- भविष्य में राज्य स्तर पर ब्रेल लिपि पाठ्यक्रम, शिक्षक प्रशिक्षण एवं छात्रवृत्ति नीति में सुधार की मांग उठाई गई।
> _कुमारी जूली सिन्हा ने श्रीमती विभा रानी को फोल्डिंग स्टिक सौंपी — पीछे बैठे दिव्यांग भाई-बहनों की हँसी, ताली और आँखों में उम्मीद की चमक ने पूरे हॉल को भावुक कर दिया।_
जूही सिन्हा की कहानी (संक्षेप में):
> _जूही ने ब्रेल लिपि सीखकर महसूस किया — “मैं नेत्रहीन नहीं, हूं बस अलग तरह से देखती हूँ।” आज वह बिहार के सबसे बड़े शिक्षा संस्थान में लुई ब्रेल की विरासत को जीवंत कर रही हैं — और फोल्डिंग स्टिक देना सिर्फ सम्मान नहीं, एक वादा है: ‘हम आपके साथ चलेंगे, जब तक आप भी देख न लें — अपनी   तरह से आँख’ का प्रतीक है।

 उपस्थित गणमान्य:
- *चंद्र मोहन चंद्राकर* — व्याख्याता
- *सपना जी* — प्रतिनियुक्ति व्याख्याता
- *निरुपम जी* — प्रधानाध्यापिका
- *पूनम कुमारी* — डाटा ऑपरेटर

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