ग़ज़ल कुंभ–2026, वाराणसी में साहित्यिक उत्सव का भव्य आयोजन!इस अवसर पर प्रसिद्ध शायरा  साहित्यकार राजकांता राज के दो ग़ज़ल संग्रह — ‘चाक पर नेमतें’ तथा बाल ग़ज़ल संग्रह ‘मेढ़क बोला टर्र टर्र टर्र’ का  लोकार्पण हुआ संपन्न

ग़ज़ल कुंभ–2026, वाराणसी में साहित्यिक उत्सव का भव्य आयोजन!इस अवसर पर प्रसिद्ध शायरा साहित्यकार राजकांता राज के दो ग़ज़ल संग्रह — ‘चाक पर नेमतें’ तथा बाल ग़ज़ल संग्रह ‘मेढ़क बोला टर्र टर्र टर्र’ का लोकार्पण हुआ संपन्न

वाराणसी। ग़ज़ल कुंभ–2026 के अंतर्गत 11 जनवरी को वाराणसी में एक गरिमामय और स्मरणीय साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध शायरा डॉ० पूनम सिन्हा श्रेयसी के नवीन ग़ज़ल संग्रह ‘चाक दामन’ का भव्य लोकार्पण किया गया। साथ ही प्रसिद्ध शायरा  साहित्यकार राजकांता राज के दो ग़ज़ल संग्रह — ‘चाक पर नेमतें’ तथा बाल ग़ज़ल संग्रह ‘मेढ़क बोला टर्र टर्र टर्र’ का  लोकार्पण संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के संयोजक सुप्रसिद्ध शायर दीक्षित दनकौरी रहे। अध्यक्षता वरिष्ठ शायर भूपेंद्र सिंह ‘होश’ ने की। मंच पर अनेक प्रतिष्ठित एवं वरिष्ठ ग़ज़लकारों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।
लोकार्पण सत्र के पश्चात देश-विदेश से पधारे शायरों ने ग़ज़ल पाठ किया। विविध विषयों, सशक्त बिंबों और समकालीन संवेदनाओं से सजी ग़ज़लों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ग़ज़ल-पाठ के दौरान सभागार बार-बार तालियों से गूंज उठा।
वक्ताओं ने डॉ० पूनम सिन्हा श्रेयसी के ग़ज़ल संग्रह ‘चाक दामन’ को स्त्री-संवेदना, सामाजिक यथार्थ और शिल्प-सौंदर्य का सशक्त दस्तावेज़ बताया। वहीं राजकांता राज की कृतियों को ग़ज़ल की परंपरा में नवीन दृष्टि और बाल ग़ज़ल के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के रूप में रेखांकित किया गया।
समापन अवसर पर आयोजकों ने कहा कि ग़ज़ल कुंभ का उद्देश्य ग़ज़ल की परंपरा को सशक्त करना और नए रचनाकारों के साथ वरिष्ठ साहित्यकारों को एक साझा मंच प्रदान करना है। सफल आयोजन के लिए सभी प्रतिभागियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
यह आयोजन वाराणसी की साहित्यिक परंपरा में एक महत्वपूर्ण और यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हुआ ।

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